- Details
(रवीश कुमार) पहाड़ों में जितनी बर्फ नहीं गिरी है उससे कहीं ज़्यादा दिल्ली में सत्ता के गलियारों में बर्फ गिर रही है। दो दिनों से दिल्ली में बर्फ की सिल्ली गिर रही है मगर कोई इसके बारे में बात नहीं करना चाहता। एक ऐसी रिपोर्ट आई है जिसे लेकर पढ़ने वालों की सांसें जम जाती हैं, जो भी पढ़ता है अपना फोन बंद कर देता है कि कहीं कोई इस पर प्रतिक्रिया न मांग ले।
पत्रकार इस रिपोर्ट को छोड़कर बाकी सारी रिपोर्ट धुंआधार तरीके से ट्वीट कर रहे हैं ताकि बर्फ की इस सिल्ली पर जितनी जल्दी हो सके, धूल जम जाए। बहुत मुश्किल से निरंजन टाकले नाम के एक रिपोर्टर ने एक जज की लाश पर जमी धूल की परत हटा कर ये रिपोर्ट छापी है, बहुत आसानी से उस रिपोर्ट को यह दिल्ली बर्फ की सिल्ली के नीचे दबा देना चाहती है। मगर यह रिपोर्ट धीरे-धीरे व्हाट्स अप के तहखानों में बिना बताए एक जगह से दूसरी जगह पहुंच रही है।
अंग्रेज़ी में छपी इस लंबी रिपोर्ट को पढ़ते ही पाठक डर के ऐसे अंधेरे कुएं में ख़ुद को गिरता हुआ महसूस करने लगता है, जहां उसकी चीख भी उसके पास नहीं पहुंच पाती है। हमने कई लोगों से प्रतिक्रिया के लिए पूछा, दोबारा जब फोन किया तो फोन बंद हो गया। सत्ता का डर सबको निहत्था कर देता है।
- Details
(आशु सक्सेना): गुजरात में अभी मतदान और मतगणना होना बाकी है।लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव का एजेंड़ा भी तय कर दिया। भाजपा यह मानकर चल रही है कि गुजरात विधानसभा चुनाव में उसकी जीत तय है और मोदी एक बार फिर सत्ता की बागड़ोर संभाल लेंगे।
उसके बाद पार्टी मोदी को भावी प्रधानमंत्री का दावेदार बनाकर लोकसभा चुनाव का प्रचार अभियान छेड़ देगी और मोदी के चेहरे पर 2014के लोकसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत हासिल कर लेगी। भाजपा की इस सोच को मानसिक दिवालियापन ही कहा जा सकता है।
भाजपा के चिंतकों ने पार्टी के चुनावी इतिहास पर नजर डालने की भी जहमत नही उठार्इ और मोदी को प्रधानमंत्री बनाने का ख्याब देखने लगे । लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने गुजरात की जमीन पर पैर रखते ही मोदी को प्रधानमंत्री का सबसे बेहतर उम्मीदवार घोषित कर दिया। इतना ही नही अब भाजपा ने गुजरात में मोदी के उतराधिकारी की खोज भी शुरू कर दी है।
भाजपा 1989में लोकसभा की 89सीट जीतने में सफल रही थी। उस वक्त कांग्रेस विरोधी लहर थी और भाजपा उस चुनाव में जनतादल और वामपंथी दलों के साथ चुनावी तालमेल के तहत मैदान में कूदी थी।
- Details
(आशु सक्सेना) गुजरात विधानसभा चुनाव नतीजे 2019 के लोकसभा चुनाव नतीजों को परिलक्षित करेंगे। इस वक्त गुजरात की सभी लोकसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है। जबकि पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को 115 सीट हासिल हुईं थी। सूबे का यह चुनाव मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लड़ा गया था। इस चुनाव में भी भाजपा अपने पिछले आंकडे़ को बरकरार नही रख सकी थी।
उस चुनाव में भी प्रमुख विपक्ष कांग्रेस थी, जिसने 57 सीटों पर जीत दर्ज की थी। भाजपा सूबे का यह चुनाव भी पार्टी के स्टार प्रचारक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर ही लड़ रही है। जबकि सामने इस बार भी मुख्य रूप से कांग्रेस ही है।
यूं तो आम आदमी पार्टी समेत कुछ क्षेत्रीय पार्टियां मैदान में हैं। मोटे तौर पर अभी तक जो खिचड़ी पकती नज़र आ रही है, उसमें भाजपा विरोधी अधिकांश राजनीतिक दलों की कांग्रेस के साथ गोलबंदी रहेगी। लिहाजा धर्म निरपेक्ष वोट कटने की संभावना कम होगी।
गुजरात में चुनावी माहौल गरमाया हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले एक महीने में पांच बार सूबे का दौरा कर चुके हैं। इस दौरान पीएम मोदी ने प्रदेशवासियों को करोड़ों रूपयों की बड़ी बड़ी परियोजनाओं के रूप में तोहफे दिये हैं। इस दौरान जनसभाओं में पीएम मोदी ने कांग्रेस को जमकर कौसा है। उन्होंने कांग्रेस को विकास में रूकावट बताया है।
- Details
(आशु सक्सेना) गुजरात चुनावों से पहले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अपना पूरा जोर लोगों को पार्टी की ओर आकर्षित करने पर लगा दिया है। सूबे के दूसरे तीन दिवसीय दौरे में उनकी कोशिश जनता और जमीन से जुड़ने की है। ऐसे में सवाल है क्या इस बार के चुनावों में वे हवा का रुख कांग्रेस के पक्ष में करने में कामयाब होंगे? जबकि सामने मुकाबला सीधे पीएम मोदी से है।
भाजपा ने पिछला गुजरात विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के नेत्तृत्व में लड़ा था। मोदी ने देश के अगले प्रधानमंत्री के दावेदार की चर्चा के बीच सूबे में तीसरी बार विजय पताका फहराई और 26 दिसंबर 2012 को चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। भाजपा यह चुनाव भी मोदी के चेहरे पर लड़ रही है। भाजपा की चिंता यह है कि पिछले तीन चुनाव में पार्टी का ग्राफ लगातार नीचे आया है, अगर वह सिलसिला जारी रहा, तब इस बार सत्ता हाथ से जा भी सकती है।
कांग्रेस के रणनीतिकारों ने राहुल के चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत भाजपा के गढ़ सौराष्ट्र से की है। भाजपा का गढ़ होने के बावजूद सौराष्ट्र प्रदेश का सबसे पिछड़ा इलाका है। क्षेत्र में आदिवासियों की ठीकठाक आबादी है। यही वजह है कि पीएम मोदी इस बार के विधानसभा चुनाव में खुद को सहज महसूस नहीं कर रहे हैं।
- देश
- प्रदेश
- आलेख
- रामलीला मैदान की रैली से पहले राहुल बोले- बीजेपी का दिल से धन्यवाद
- 'आतंकवाद के आरोपी अमेरिकी नागरिक को इतनी छूट क्यों': कांग्रेस
- सोनिया ने किताब की दिखाई झलक, राजीव से मुलाकात को किया याद
- नहीं साइन करूंगी पीस बॉन्ड, हाईकोर्ट से झटके के बाद बोलीं नेहा बोरा
- हाईकोर्ट ने नेहा बोरा की याचिका खारिज की, एसईएम को दिया निर्देश
- दिल्ली में एसआईआर के खिलाफ किसानों और कई संगठनों का मार्च
- 'जेल के अंदर हों या बाहर, आंदोलन रहेगा जारी': सीजेपी का एलान
- अरुणाचल बॉर्डर पर चीन से तनाव पर खड़गे ने मोदी से पूछे तीन सवाल
- अरुणाचल में भारत-चीन के बीच टकराव, डीजी आईटीबीपी का खुलासा
- छात्र नेता नेहा बोरा की याचिका पर हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
- एसआईआर के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन आजादी की दूसरी लड़ाई: खड़गे
- जेडीयू से बाहर निकाले जाने पर अनंत सिंह बोले- बनाऊंगा अपनी पार्टी
- अनंत सिंह को जेडीयू ने पार्टी से निकाला, पत्नी पर भी लिया एक्शन
- जामिया में छात्रसंघ चुनाव को लेकर हंगामा, क्लासेज ऑनलाइन चलेंगी
- दिल्ली में सीएपीएफ की 273 कंपनियों की तैनाती 31 अक्टूबर तक बढ़ी
- एमसीडी में पार्षदों का बवाल, मेयर के आसन पर रखे कागज फेंके
- दिल्ली में प्रदूषण के चलते ग्रेप-1 के प्रतिबंध लागू, एक्यूआई स्तर 'खराब'
- मोदी सरकार सत्ता में बनी रही तो अराजकता फैलना तय: संजय राउत
- दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए व्यापक विंटर एक्शन प्लान तैयार
- मणिपुर में तनाव जारी: घाटी के जिलों में बंद, जनजीवन पूरी तरह ठप
- देश की अर्थव्यवस्था को सिर्फ उत्पादन नहीं, रोजगार और मांग भी चाहिए
- हंगामें में निपटा मॉनसून सत्र पीएम मोदी के खिसकते जनाधार का संकेत
- संसद का मॉनसून सत्र विपक्ष के हंगामें की भेंट चढ़ता नज़र आ रहा है
- इथेनॉल: क्या भारत सही दिशा में बढ़ रहा है या कोई गलती कर रहा है?
- यूपी में अखिलेश दोहराएंगे मुलायम सिंह का 40 साल पुराना इतिहास
- जंतर मंतर पर प्रदर्शन की इजाजत मोदी सरकार के लिए सिरदर्द बनी
- यूपी विधानसभा चुनाव होगा 'लोकसभा चुनाव 2029' का सेमी फाइनल
- क्या प्रधानमंत्री तेलंगाना सुरंग हादसे की ज़िम्मेदारी लेंगे, या फिर किसी..?
- अमेरिका में रह रहे अवैध भारतीय प्रवासियों से जुड़े यक्ष प्रश्न
- दिल्ली यानि "मिनी इंडिया" का चुनाव बना 'पीएम मोदी बनाम केजरीवाल'






