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ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश में आज कम तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 4.3 मापी गई । राष्ट्रीय भूकंपविज्ञान केन्द्र के अनुसार भूकंप का केंद्र राज्य के कुरंग कुमेय जिले में था। भूकंप का झटका बीती देर रात एक बजकर बीस मिनट पर महसूस किया गया। कहीं से जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं है। रात 12 बजकर 20 मिनट पर भारत-म्यांमार सीमा पर भी 5.4 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया। भारत-बांग्लादेश सीमा के पास कल त्रिपुरा में 5.7 तीव्रता का भूकंप आया था जिसे असम सहित पूर्वोत्तर राज्यों में महसूस किया गया।

 

इटानगर: तेजी से घटे एक घटनाक्रम में मुख्यमंत्री पेमा खाडू के नेतृत्व में पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (पीपीए) के 43 में से 33 विधायकों के भाजपा में शामिल होने के बाद पार्टी ने शनिवार को अरुणाचल प्रदेश में अपनी सरकार का गठन किया। खांडू ने विधानसभा अध्यक्ष तेंजिंग नोरबू थोंगदोक के सामने विधायकों की परेड करायी। विधानसभा अध्यक्ष ने विधायकों के भाजपा में शामिल होने को मंजूरी दे दी। पूरा नाटकीय घटनाक्रम गुरूवार को शुरू हुआ जब पीपीए के अध्यक्ष काहफा बेंगिया ने कथित पार्टी विरोधी गतिविधि के लिए खांडू, उपमुख्यमंत्री चौवना मेन और पांच विधायकों को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया। राज्य में नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (एनईडीए) सरकार की गठबंधन सहयोगी पीपीए ने कल टकाम पेरियो को राज्य का नया मुख्यमंत्री चुना था। हालांकि राजनीतिक समीकरण तब बदल गए जब शुरुआत में पेरियो को समर्थन देने वाले पीपीए के अधिकतर विधायक बाद में खांडू के खेमे में चले गए। पीपीए ने आज चार और पार्टी विधायकों- होनचुन न्गानदम, बमांग फेलिक्स, पुंजी मारा और पानी टराम को भी निलंबित कर दिया। खांडू ने विधानसभा परिसर में संवाददाताओं से कहा, ‘अरुणाचल प्रदेश में आखिरकार कमल खिल गया। राज्य में लोग नयी सरकार के नेतृत्व में नये साल में विकास की नयी सुबह देखेंगे।’

इटानगर: अरुणाचल प्रदेश में तेजी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रम के बीच पीपुल्स पार्टी ऑफ अरूणाचल (पीपीए) ने मुख्यमंत्री पेमा खांडू, उप मुख्यमंत्री चोवना मेन और पांच अन्य विधायकों को कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण गुरुवार देर रात प्राथमिक सदस्यता से अस्थायी तौर पर निलंबित कर दिया। पार्टी के जिन पांच विधायकों को निलंबित किया गया है, वे जेम्बी टाशी (लुमला), पासांग दोरजी सोना (मेचुका), चोव तेवा मेन (चोखाम), जिंगनू नामचोम (नामसाई) और कामलुंग मोसांग (मियाओ) हैं। पीपीए अध्यक्ष काहफा बेंगिया ने एक आदेश में कहा कि पार्टी के संविधान और 20 दिसंबर को कार्यकारी समिति की बैठक में पारित प्रस्ताव के जरिए मिले अधिकार के तहत विधायकों को अस्थायी तौर पर प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। Ads by ZINC बेंगिया ने कहा कि प्रथम दृष्टया इन साक्ष्यों से वह संतुष्ट थे कि ये लोग ‘पार्टी विरोधी’ गतिविधियों में शामिल हैं। आदेश में आगे कहा गया है कि निलंबन के साथ खांडू अब पीपीए विधायक दल के नेता नहीं रहे। उन्होंने पार्टी विधायकों और पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे खांडू की ओर से बुलाई गई किसी बैठक में शामिल नहीं हों तथा आदेश की अहवेलना करने वाले सदस्य को पार्टी की अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना होगा।

इटानगर: अरूणाचल प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में वर्ष 2016 खासा महत्वपूर्ण रहा जिसमें कई महीनों तक चली सियासी उथलपुथल में प्रदेश ने छोटी सी अवधि में तीन मुख्यमंत्री देखे और अल्पावधि के लिए यहां राष्ट्रपति शासन भी लगाया गया। लंबे चले सियासी नाटक में राज्यपाल पी राजखोवा को 22 सितंबर को पद से हटा दिया गया। पर्यवेक्षकों के मुताबिक ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि वह राज्य में ‘भाजपा के नेतृत्व वाली या भाजपा द्वारा पोषित सरकार’ को लंबे तक टिकाए रखने में कामयाब नहीं हुए। हायुलियांग विधानसभा क्षेत्र में 19 नवंबर को हुए उप चुनाव में दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री कालिखो पुल की तीसरी पत्नी दासांगलु पुल भाजपा के टिकट पर खड़ी हुई थीं। इसमें वह विजयी रहीं।कालिखो पुल के निधन के कारण यहां चुनाव जरूरी हो गया था। गत नौ अगस्त को मुख्यमंत्री के आधिकारिक बंगले में कालिखो पुल फांसी पर लटके मिले थे। राज्य में 450 करोड़ रूपये का बिजली घोटाला भी सामने आया जिसमें केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरन रिजिजू पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे। विपक्षी कांग्रेस ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से रिजिजू को पद से हटाने और मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। हालांकि भाजपा नेता ने इन आरोपों से इनकार किया है।इस वर्ष भूस्खलन और हादसों के कारण 30 लोगों की जान गई । इस सीमांत राज्य में राजनीतिक संकट अप्रैल 2015 में पुल को मंत्रिमंडल से हटाने के साथ ही शुरू हो गया था।

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