नई दिल्ली: लोकसभा में बुधवार (02 अप्रैल, 2025) को वक्फ संशोधन बिल पेश किया गया। केंद्रीय संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने इस विधेयक को पेश किया। इस दौरान विपक्ष ने जमकर हंगामा मचाया।
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के सांसद ए. राजा ने भी इस बिल का विरोध किया और सत्ताधारी दल बीजेपी को निशाने पर लेते हुए कहा कि जिस पार्टी का एक भी मुस्लिम सांसद लोकसभा में नहीं है वो अल्पसंख्यकों के अधिकारों की बात कर रही है।
लोकसभा में वक्फ बिल पर चर्चा के दौरान बोलते हुए उन्होंने कहा, “विडंबना ये है कि वो पार्टी अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा एक ऐसी पार्टी करने जा रही है, जिसका एक भी मुस्लिम सांसद लोकसभा में नहीं है।” उन्होंने कहा, "आज भारतीय संसद के लिए यह एक उल्लेखनीय दिन है कि वह हमारे भाग्य का फैसला करे कि क्या यह धर्मनिरपेक्ष देश उस रास्ते पर चलेगा जिसे संविधान के पूर्वजों ने अच्छी तरह लिखा था या देश में सांप्रदायिक ताकतों की ओर से तय किए गए नकारात्मक रास्ते पर चलेगा।"
‘धर्मनिरपेक्षता की रक्षा कैसे की जा सकती है’
इससे पहले लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक, 2025 पेश करते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सवाल उठाया कि वक्फ संपत्तियों का इस्तेमाल देश और मुसलमानों के विकास के लिए क्यों नहीं किया गया। विधेयक पेश करने के लिए कोई मुस्लिम सांसद नहीं है। वे मुस्लिम समुदाय का एक भी सदस्य पेश नहीं कर पा रहे हैं और वे नैतिकता का पाठ पढ़ा रहे हैं कि धर्मनिरपेक्षता की रक्षा कैसे की जा सकती है।
‘वक्फ के पास इतनी बड़ी संपत्ति लेकिन मुसलमानों के लिए क्या किया?’
रिजिजू ने कहा कि भारत में दुनिया में सबसे ज्यादा वक्फ संपत्तियां हैं और उन्होंने सवाल किया कि इनका इस्तेमाल गरीब मुसलमानों की शिक्षा, चिकित्सा, कौशल विकास और आय सृजन के लिए क्यों नहीं किया गया। लोकसभा में रिजिजू ने कहा, "जब हमारे देश में दुनिया की सबसे बड़ी वक्फ संपत्ति है, तो इसका इस्तेमाल गरीब मुसलमानों की शिक्षा, चिकित्सा, कौशल विकास और आय सृजन के लिए क्यों नहीं किया गया? इस संबंध में अब तक कोई प्रगति क्यों नहीं हुई?"