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इटानगर: अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों और स्टोरों में आपूर्ति की गई 33 दवाएं प्रयोगशाला परीक्षण में निम्न गुणवत्ता की पाई गईं। सहायक औषधि नियंत्रक गेबोंब तायेंग ने एक विज्ञप्ति में बताया कि निरीक्षण के लिए 2014-15 और 2015-16 के दौरान विभिन्न सरकारी स्टोर और अस्पतालों से जमा किए गए 355 नमूनों में 238 दवाओं की जांच रिपोर्ट सुरक्षित घोषित की गई और 33 दवाएं मानक गुणवत्ता (एनएसक्यू) की नहीं थी। बाजारों से जमा किए गए 371 नमूनों में परीक्षण किए गए 314 में नौ की गुणवत्ता मानक अनुरूप नहीं थी, जबकि 57 के परिणाम की प्रतीक्षा है। 12 जुलाई को मिली जांच रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी खरीद वाली दवाओं के लिए एनएसक्यू का प्रतिशत 13.86 प्रतिशत रहा, जबकि बाजार से जमा और जांची गई दवाओं के लिए प्रतिशत 2.87 प्रतिशत रहा।

इटानगर: पेमा खांडू ने आज अरूणाचल प्रदेश के नौवें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। इसके साथ ही पूर्वोत्तर के इस राज्य में जारी राजनीतिक उठापटक का दौर खत्म हो गया। चोवना मेन ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। पूर्व मुख्यमंत्री दोरजी खांडू के 37 वर्षीय बेटे पेमा देश के सबसे युवा मुख्यमंत्री बन गए हैं। उन्हें और मेन को यहां राजभवन में राज्यपाल तथागत रॉय ने शपथ दिलाई। राज्यपाल ने मुख्यमंत्री नबाम तुकी को विधानसभा में विश्वास मत साबित करने का निर्देश दिया था लेकिन इसके कई घंटे पहले ही कांग्रेस विधायक दल ने तुकी की जगह पेमा खांडू को विधायक दल का नेता चुन लिया। इस हफ्ते की शुरुआत में उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद तुकी मुख्यमंत्री पद पर बहाल हो गए थे। इसके बाद 45 पार्टी विधायकों और दो निर्दलीय विधायकों के समर्थन से पेमा ने सरकार बनाने का दावा किया था। अपदस्थ मुख्यमंत्री खालिको पुल भी 30 असंतुष्ट विधायकों के साथ पार्टी में लौट आए। 60 सदस्यीय विधानसभा में फिलहाल 58 विधायक हैं और कांग्रेस का दावा है कि उसे दो निर्दलीयों समेत 47 विधायकों का समर्थन हासिल है।

इटानगर: अरुणाचल प्रदेश में फ्लेर टेस्ट से पहले बड़ा उलटफेर हुआ है। कांग्रेस के बागी विधायकों की कांग्रेस से डील हो गई है और 30 में से 24 विधायक वापस कांग्रेस में लौट आए हैं। कल तक बागी रहे पेमा खांडू को कांग्रेस विधायक दल का नया नेता चुना गया है। फिलहाल कांग्रेस विधायक दल की बैठक चल रही है, जिसमें 40 से अधिक विधायक शामिल हैं। कांग्रेस के बागी विधायक भी बैठक में मौजूद हैं। इस तरह से अब कांग्रेस के पास 39 विधायक हो गए हैं और सरकार बचनी तय है। वहीं नबाम तुकी ने कांग्रेस विधायक दल के नेता पद से इस्तीफा दे दिया है। दरअसल कांग्रेस के 20 बागी विधायकों ने संकेत दिए थे कि पार्टी अगर नेतृत्व में परिवर्तन करती है तो वह बगावती तेवर छोड़ पार्टी में वापस लौट सकते हैं। अगर ये विधायक सदन में कांग्रेस का समर्थन करते हैं तो 60 सदस्यीय विधानसभा में पार्टी के पास 35 विधायकों का समर्थन होगा और इस तरह वह आसानी से बहुमत साबित कर लेगी। इससे पहले शुक्रवार दोपहर तुकी ने शक्ति परिक्षण के लिए राज्यपाल से 10 दिनों का वक्त मांगा था। वहीं अरुणाचल विधानसभा अध्यक्ष नाबाम रबिया ने संकेत दिए थे कि वह सदन में शक्ति परीक्षण की स्थिति में नहीं हैं। विधानसभा सचिवालय से जुड़े सूत्रों ने एनडीटीवी को बताया कि शनिवार दोपहर 1 बजे शक्ति परिक्षण निर्धारित की गई है।

इटानगर: अरूणाचल प्रदेश शुक्रवार को उस समय एक और राजनीतिक टकराव के दौर की तरफ बढ़ गया जब राज्यपाल ने बहाल किये गये मुख्यमंत्री नबाम तुकी का शक्ति परीक्षण स्थगित करने का अनुरोध ठुकरा दिया। तुकी को विधानसभा में शनिवार को अपना बहुमत साबित करने का निर्देश दिया गया है। बुधवार को उच्चतम न्यायालय द्वारा बहाल किये गये मुख्यमंत्री तुकी ने आज राज्यपाल तथागत राय से मुलाकात की और शक्ति परीक्षण कम से कम दस दिन स्थगित करने का अनुरोध किया। तुकी को अपना बहुमत साबित करने का मुश्किल काम करना है क्योंकि निवर्तमान मुख्यमंत्री कालिखो पुल ने 60 सदस्यीय विधानसभा में 43 विधायकों के समर्थन का दावा किया है। सूत्रों ने कहा कि भाजपा के 11 और दो निर्दलीय विधायकों सहित 43 सदस्यों के साथ पुल के देर रात गुवाहाटी से यहां आने की संभावना है। पुल ‘पीपुल्स पार्टी आफ अरूणाचल’ (पीपीए) के प्रमुख हैं जिसमें कांग्रेस के बागी भी शामिल हैं। सोलह जुलाई तक शक्ति परीक्षण का कल निर्देश देने वाले राज्यपाल से मुलाकात के बाद तुकी ने संवाददाताओं को बताया कि उन्होंने कानूनी विशेषज्ञों की सलाह पर यह समय मांगा है। हालांकि राज्यपाल ने तुकी का अनुरोध ठुकरा दिया। तत्कालीन राज्यपाल जेपी राजखोवा की विवादित भूमिका के बाद जनवरी में गिरने वाले कांग्रेस सरकार का तुकी नेतृत्व कर रहे थे।

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