नई दिल्ली: लोकसभा में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने वक्फ संशोधन विधेयक पेश कर दिया है। विधेयक पर बोलते हुए रिजिजू ने कहा कि 'मुझे न केवल उम्मीद है, बल्कि मुझे पूरा यकीन है कि इस विधेयक का विरोध करने वालों के दिलों में भी बदलाव आएगा। हर कोई सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ इस विधेयक का समर्थन करेगा।'
किरेन रिजिजू ने कहा कि 2013 में दिल्ली वक्फ बोर्ड ने पार्लियामेंट की जो बिल्डिंग है, उसे भी वक्फ प्रॉपर्टी घोषित कर दिया गया था। यूपीए की सरकार ने इसे डिनोटिफाई भी कर दिया। अगर नरेंद्र मोदी जी की सरकार नहीं होती, हम संशोधन नहीं लाते तो जिस जगह हम बैठे हैं, वह भी वक्फ की संपत्ति होती। यूपीए की सरकार होती तो पता नहीं कितनी संपत्तियां डिनोटिफाई होतीं।'
उन्होंने कहा, 'मैं कुछ भी अपने मन से नहीं बोल रहा हूं। ये सब रिकॉर्ड की बात है।' रिजिजू ने आगे कहा, 'कई लोगों ने अपने अपने तरीके से बातें रखीं, किसी ने कहा ये बिल गैरकानूनी है। ये बिल कोई नया विषय नहीं है। आजादी से पहले से इसका इतिहास शुरू होता है।'
उन्होंने कहा, 'अगर आप सच्चे दिल से सोचते तो आप इसपर विचार करते। जो कुछ लेना देना नहीं है इस बिल में उसको लेकर लोगों को गुमराह करने का काम किया है।'
'ये बस एक संपत्ति के मैनेजमेंट से जुड़ा विषय है...'
किरेन रिजिजू ने कहा कि 'वक्फ संशोधन बिल में किसी भी धार्मिक कार्यकलाप में हस्तक्षेप का कोई प्रावधान नहीं है। हम किसी भी मस्जिद के संचालन में हस्तक्षेप करने नहीं जा रहे। किरेन रिजिजू ने कहा कि ये मस्जिद या धार्मिक क्रियाकलापों से जुड़ा मामला नहीं है। ये बस एक संपत्ति के मैनेजमेंट से जुड़ा विषय है। कोई मुसलमान जकात देता है तो उसे पूछने वाले हम कौन होते हैं। हम तो बस उसके मैनेजमेंट से जुड़ी बात कर रहे हैं। इसका धार्मिक व्यवस्था से कोई लेना-देना नहीं है।'