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देहरादून: उत्तराखंड उच्च न्यायालय के प्रदेश में राष्ट्रपति शासन हटाये जाने के निर्णय को हरीश रावत ने राज्य की जनभावना की जीत बताते हुए कहा कि उत्तराखंड को न्याय मिल गया है और अब पीछे की कडवी यादों को भुलाकर आगे की तरफ देखने की जरूरत है। गत 27 मार्च को राष्ट्रपति शासन लगाने के केंद्र के निर्णय को मुख्यमंत्री रावत ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय का फैसला अपने पक्ष में आने के बाद रावत ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वह इस निर्णय का स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा, ‘यह उत्तराखंड की जनभावना की जीत है। उत्तराखंड को न्याय मिला है।’ हालांकि, रावत ने कहा कि राष्ट्रपति शासन लगने के कारण प्रदेश का बहुत महत्वपूर्ण समय बर्बाद हो गया क्योंकि हर सरकार को अपने पांचवें और अंतिम वर्ष में बहुत से अहम काम करने होते हैं। उन्होंने कहा, ‘इससे कोई छोटा नुकसान नहीं हुआ है। रोना केवल यह नहीं है कि मार्च में 700 करोड रूपये खर्च नहीं हो पाया बल्कि यह भी है कि बजट के माध्यम से प्रदेश के विकास की जो दिशा बनायी गयी थी, उसकी शुरूआत ही गड़बड़ा गयी।’ हालांकि, रावत ने कहा कि उत्तराखंड के शरीर पर लगे घावों को उच्च न्यायालय के आदेश से मरहम लग गया है।

नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य से राष्ट्रपति शासन हटाने का आदेश दिया है। नैनिताल कोर्ट ने कहा कि राज्य में 18 मार्च से पहले की स्थिति बनी रहेगी। कोर्ट ने 29 अप्रैल को विधानसभा में फ्लोर टेस्ट का भी आदेश दिया है और कहा है कि कांग्रेस के नौ बागी विधायकों को अपने किए की सज़ा भुगतनी होगी। इससे पहले, राज्य में राष्ट्रपति शासन पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने सख़्त टिप्पणी करते हुए पूछा था, 'क्या इस केस में सरकार प्राइवेट पार्टी है?' भाजपा के बहुमत के दावों के बीच कोर्ट ने केंद्र से एक हफ़्ते तक राष्ट्रपति शासन नहीं हटाने का भरोसा देने के लिए कहा था। जब केंद्र ने कहा कि वह इस बात की कोई गारंटी नहीं दे सकते कि राज्य से राष्ट्रपति शासन हटाया जाएगा या नहीं, तो हाई कोर्ट ने कहा, 'आपके इस तरह के व्यवहार से हमें तकलीफ हुई है।' इससे पूर्व उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने गुरुवार को फिर सख़्त टिप्पणी की। कोर्ट ने पूछा, 'क्या इस केस में सरकार प्राइवेट पार्टी है? जजों ने पूछा, 'यदि कल आप राष्ट्रपति शासन हटा लेते हैं और किसी को भी सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर देते हैं, तो यह न्याय का मजाक उड़ाना होगा। क्या केंद्र सरकार कोई प्राइवेट पार्टी है?'

नैनीताल: उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने आज (गुरुवार) को फिर सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने पूछा, 'क्या इस केस में केंद्र सरकार प्राइवेट पार्टी है?' भाजपा के बहुमत के दावों के बीच कोर्ट ने केंद्र से एक सप्ताह तक राष्ट्रपति शासन नहीं हटाने का भरोसा देने के लिए कहा है। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने केंद्र से राष्ट्रपति शासन को हटाने का कदम एक सप्ताह तक स्थगित रखने पर विचार करने को कहा है। हाईकोर्ट ने कहा कि वह इस बात से ‘दुखी’ है कि भारत सरकार इस तरह बर्ताव कर रही है और साफ नहीं कर रही है कि वह राष्ट्रपति शासन हटाने की कार्रवाई स्थगित कर सकती है या नहीं। गौरतलब है कि इससे बुधवार को भी उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार के फ़ैसले पर पर बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था, 'भारत में संविधान से ऊपर कोई नहीं है। इस देश में संविधान को सर्वोच्च माना गया है। यह कोई राजा का आदेश नहीं है, जिसे बदला नहीं जा सकता है। राष्ट्रपति के आदेश को भी संविधान के ज़रिए बदला जा सकता है।'

देहरादून: उत्तराखंड पुलिस के घोड़े शक्तिमान की मौत हो गई है। पिछले महीने उत्तराखंड में भाजपा के एक विरोध प्रदर्शन के दौरान शक्तिमान बुरी तरह घायल हो गया था और डॉक्टरों को उसकी जान बचाने के लिए उसका एक पैर काटना पड़ा था। इस 13 वर्षीय घोड़े को ऑपरेशन के बाद कृत्रिम पैर लगाया गया था और उसे देहरादून स्थित पुलिस लाइन में रखा गया था, जहां कुछ पुलिसवाले उसकी देखभाल कर रहे थे। हालांकि डॉक्टरों ने बताया कि उसके शरीर में फैले संक्रमण के चलते वह पूरी तरह उबर नहीं पाया और बुधवार शाम उसकी मौत हो गई। इस मामले में बीजेपी विधायक गणेश जोशी को घोड़े पर क्रूर हमले के आरोप में गिरफ्तार किया था, हालांकि बाद में उन्हें जमानत दे दी गई थी। उन पर पशुओं से क्रूरता और उसे अपंग बनाने जैसी धाराएं लगाई गई थी। इस मामले को लेकर उत्तराखंड की राजनीति भी खासी गर्मा गई थी, जहां अपने विधायकों की बगावत से जूझ रही तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने कहा था कि वह घोड़े का पूरा ध्यान रखेगी और हमलावरों को दंडित करेगी। वहीं बीजेपी ने तब कांग्रेस पर उसके विधायक पर निशाना बनाने और उन्हें विधानसभा की कार्यवाही और संभावित मतदान प्रक्रिया से दूर रखने का तिकड़म अपनाने का आरोप लगाया था। वहीं केंद्रीय मंत्री और पशु अधिकारों की पैरोकार मेनका गांधी ने पुलिस के घोड़े शक्तिमान की मौत के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को गिरफ्तार करने की बात करते हुए मांग की कि अब पशुओं को पुलिस बलों का हिस्सा नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, 'मैं शक्तिमान की मौत से बहुत दुखी हूं। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। घोड़ों को अब हमारे पुलिस बल का हिस्सा नहीं होना चाहिए।' उन्होंने कहा कि शक्तिमान 'ड्यूटी पर मौजूद पुलिस अधिकारी' था और उसकी मौत के लिए जिम्मेदार व्यक्ति की गिरफ्तारी 'पुलिस अधिकारी' की हत्या के मामले में होनी चाहिए।

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