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देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि वह विधानसभा का समयपूर्व चुनाव कराने के बारे में नहीं सोच रहे हैं और वह विकास बहाल करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं। हरीश रावत नई दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात करने आए थे। बाद में जब रावत से यहां पत्रकारों ने मंत्रिमंडल में फेरबदल या राज्य में समयपूर्व चुनाव कराये जाने के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, ‘वह (चुनाव) होगा जब समय आएगा। फिलहाल प्राथमिकता उत्तराखंड का विकास बहाल करना है जो पिछले दो महीने से पटरी से उतर गया था। राज्य के विकास की रफ्तार को एक झटका लगा है, जो हमें फिर लाना है।’ उन्होंने कहा, ‘यह हमारे मंत्रिमंडल एवं सरकार के सामने बड़ी प्राथमिकता है और हमारा ध्यान उसी पर है। उत्तराखंड अपना विकास चाहता है। हम अपने तरीके से बढ़ना चाहते हैं। हमारी लड़ाई गरीबी के खिलाफ और विकास के लिए है।’ दरअसल ऐसी अटकल है कि कांग्रेस अपने नौ विधायकों को अयोग्य ठहराये जाने के मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय के सामने अब भी बनी हुई अनिश्चितता को दूर करने के लिए समयपूर्व चुनाव करा सकती है।
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देहरादून: जय बदरी विशाल के गगनभेदी उद्घोष के साथ गढ़वाल हिमालय में स्थित विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ मंदिर के कपाट बुधवार 11 मई को छह महीने के अंतराल के बाद श्रद्धालुओं के लिये दोबारा खोल दिये गये। चमोली में स्थित 11 हजार फीट से अधिक की उंचाई पर स्थित भगवान विष्णु को समर्पित बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही गढ़वाल हिमालय के चारधाम के नाम से प्रसिद्ध चारो धामों के कपाट खुल गये हैं । अन्य तीनों धाम, गंगोत्री, यमुनोत्री और केदारनाथ के कपाट नौ मई को अक्षय तृतीया के पर्व पर खोले गये थे। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के विशेष कार्याधिकारी वी डी सिंह ने बताया कि धार्मिक रीति रिवाज व वैदिक मंत्रोचार के साथ प्रात: 4:35 पर बदरीनाथ के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिये गये। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर हजारों तीर्थयात्रियो ने अखंड ज्योति के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। कपाट खुलने के अवसर पर स्थानीय भोटिया जनजाति की महिलाओं ने अपने पारंपरिक लोक गीतों, लोक नृत्यों व मंगलगीत के माध्यम से बद्री विशाल की महिमा का व्याख्यान किया।
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देहरादून: उत्तराखंड में 45 दिन बाद हरीश रावत सरकार की ताजपोशी का रास्ता बुधवार को फिर साफ हो गया है। उत्तराखंड विधानसभा के फ्लोर टेस्ट के नतीजे कांग्रेस के पक्ष में आए और बहुमत हासिल किया। जश्न और बधाइयों के बीच हरीश रावत एक बार फिर उत्तराखंड के सीएम के तौर पर वापसी कर रहे हैं। उन्होंने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि पिछला कुछ समय हमारे लिए असमंजस से भरा रहा है, लेकिन अंत भला सो सब भला। सुप्रीम कोर्ट से फ्लोर टेस्ट के नतीजे सामने आने के बाद हरीश रावत ने आज मीडिया से बातचीत में कहा कि मैं समूची राजनीतिक स्थिति में हस्तक्षेप करने और निर्णायक भूमिका में आने के लिए उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय को धन्यवाद देता हूं। न्यायपालिका ने लोकतंत्र में फिर से विश्वास बहाल किया है। हम लोग खराब दौर को छोड़कर आगे देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि शक्ति परीक्षण के दौरान समर्थन के लिए बसपा प्रमुख मायावती का धन्यवाद किया। रावत ने कहा कि उन्हें पीएम मोदी से सहयोग की उम्मीद है। रावत ने यह भी कहा कि हम लोगों को आगे बढ़ने के लिए केंद्र के सक्रिय समर्थन की जरूरत होगी। प्रधानमंत्री से मिलेंगे और राज्य के लिए उनसे सहयोग मांगेंगे। रावत ने कहा कि अब हम नई शुरुआत कर सकेंगे और राज्य के हित के लिए यह आवश्यक है। उत्तराखंड में हरीश रावत की दोबारा ताजपोशी का रास्ता साफ; शक्ति परीक्षण में मिला बहुमत, राष्ट्रपति शासन हटाने की सिफारिश और पढ़ें उत्तराखंड में हरीश रावत की दोबारा ताजपोशी का रास्ता साफ; शक्ति परीक्षण में मिला बहुमत, राष्ट्रपति शासन हटाने की सिफारिश गौर हो कि सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उत्तराखंड विधानसभा में हुए शक्ति परीक्षण पर अपनी मंजूरी की मुहर लगा दी, जिसके पश्चात कांग्रेस के नेता हरीश रावत उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पद से अपदस्थ किए जाने के छह सप्ताह बाद फिर से राज्य के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। उच्चतम न्यायालय की एक पीठ ने अपनी व्यवस्था में कहा कि रावत को शक्ति परीक्षण में 61 में से 33 वोट मिले। मतदान में कोई अनियमितता नहीं पाई गई। नौ विधायक अपनी अयोग्यता के कारण मतदान नहीं कर सके। साथ ही पीठ ने राष्ट्रपति शासन को वापस लेने का आदेश दिया ताकि 68 वर्षीय रावत मुख्यमंत्री के तौर पर कार्यभार संभाल सकें। देहरादून में यह खबर फैलते ही जश्न शुरू हो गया कि उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर कल राज्य विधानसभा में संपन्न हुए शक्ति परीक्षण में रावत जीत गए हैं। इस घटनाक्रम को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है जिसने उत्तराखंड में विनियोग विधेयक पर मतदान के दौरान कांग्रेस के नौ विधायकों के भाजपा के पक्ष में होने के बाद कांग्रेस की सरकार को बर्खास्त कर दिया और राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया था। इसके बाद बागी विधायकों को विधानसभा अध्यक्ष ने दलबदल कानून के तहत अयोग्य घोषित कर दिया। इस फैसले को उच्च न्यायालय ने बरकरार रखा और उच्चतम न्यायालय ने इसमें हस्तक्षेप नहीं किया।
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नैनीताल: उत्तराखंड हाई कोर्ट ने 9 बागी विधायकों की याचिका खारिज कर दी है। हाई कोर्ट ने सभी बागी विधायकों को अयोग्य करार दिया है। अब ये विधायक सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं, जहां मुख्य न्यायाधीश ने इस मामले को दीपक मिश्रा की बेंच को भेज दिया है। फ्लोर टेस्ट से एक दिन पहले उत्तराखंड हाईकोर्ट का यह फैसला काफी महत्वपूर्ण है। शनिवार को हाईकोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड में 10 मई यानी मंगलवार को होने वाले फ़्लोर टेस्ट में बाग़ी विधायकों को वोटिंग से दूर रहने का आदेश दिया है। शनिवार को बाग़ी विधायकों की ओर से वरिष्ठ वकील सी.ए. सुंदरम और दिनेश द्विवेदी ने पैरवी की जबकि स्पीकर और शिकायतकर्ता की ओर से कपिल सिब्बल, उनके बेटे अमित सिब्बल जैसे वकील दलील देने में जुटे थे। न्यायमूर्ति यू.सी. ध्यानी ने दोनों पक्षों के बीच करीब तीन घंटे की दलीलों के खत्म होने के बाद कहा, 'सुनवाई सम्पन्न हो गई है। मैं नौ मई को सुबह सवा दस बजे निर्णय सुनाऊंगा।' कांग्रेस के 9 बाग़ी विधायक अमृता रावत, हरक सिंह रावत, प्रदीप बतरा, प्रणव सिंह, शैला रानी रावत, शैलेंद्र मोहन सिंघल, सुबोध उनियाल, उमेश शर्मा, विजय बहुगुणा, हाई कोर्ट के फैसले के बाद अब मतदान में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। 18 मार्च को विधानसभा में विनियोग विधेयक पर मत विभाजन की भाजपा की मांग का कांग्रेस के नौ विधायकों ने समर्थन किया था, जिसके बाद राज्य में सियासी तूफान पैदा हो गया और उसकी परिणिति 27 मार्च को राष्ट्रपति शासन के रूप में हुई थी।
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