नैनीताल: क्या आर्थिक भ्रष्टाचार प्रदेश में राष्ट्रपति शासन का आधार बन सकता है? यह सवाल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोजफ और न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की संयुक्त खंडपीठ ने मंगलवार को केंद्र सरकार का पक्ष रख रहे अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी से पूछा। डबल बेंच ने कहा ऐसा होने लगा तो देश में बहुत कम सरकारें पांच साल चल पाएंगी। चीफ जस्टिस ने कहा शायद यह आजादी के बाद पहला मौका होगा, जबकि राज्यपाल और मुख्यमंत्री सदन में बहुमत सिद्ध करने की बात कर रहे हों लेकिन केंद्र स्तर से राष्ट्रपति शासन लागू हो गया हो। मामले की सुनवाई बुधवार को भी जारी रहेगी। राज्य में राष्ट्रपति शासन और विनियोग विधेयक अध्यादेश के खिलाफ दायर याचिकाओं पर मंगलवार को अटॉर्नी जनरल रोहतगी ने स्पीकर की कार्यशैली को दल विशेष को मदद करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि स्पीकर की कार्यशैली और भ्रष्टाचार के चलते प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया है। इस पर पीठ ने टिप्पणी की कि आर्थिक भ्रष्टाचार के मामलों में 356 का उपयोग होने लगा तो देश में बहुत कम सरकारें ही पांच साल तक रह पाएंगी। अटॉर्नी जनरल रोहतगी ने कहा कि बोम्मई सहित अन्य मामले से उत्तराखंड का मामला अलग है। यहां विधानसभा भंग नहीं, निलंबित की गई है।
उन्होंने 18 से 26 मार्च तक प्रदेश में चली गतिविधियों को संविधान के खिलाफ बताया और कहा कि यहां विधायकों की खरीद-फरोख्त की जाने लगी थी। इसके प्रमाण में स्टिंग की पैन ड्राइव और विधानसभा की कार्यवाही की सीडी भी अदालत में पेश की गई है। मामले में एडिशनल सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी दलील पेश की। हाईकोर्ट में राज्य सरकार की ओर से हरीश साल्वे के पक्ष रखने पर कांग्रेस के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि इस मामले में राज्यपाल को पार्टी नहीं बनाया गया है, जबकि साल्वे की दलीलें राज्यपाल के राष्ट्रपति शासन लगाने की संस्तुति पर आधारित हैं। जवाब में साल्वे ने कहा कि मामले में राज्य सरकार को पक्षकार बनाया गया है और वह राज्य का ही पक्ष रख रहे हैं। मामले में प्रदेश सरकार का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा कि राष्ट्रपति शासन के मामले में संसद में विचार हो सकता है। आमतौर पर इस प्रकार के मामले कोर्ट से दूर रखे जाने चाहिए। राष्ट्रपति के संतुष्ट होने पर ही अनुच्छेद 356 का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन उनकी संतुष्टि का आधार नहीं पूछा जा सकता। हाईकोर्ट की संयुक्त खंडपीठ ने कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत द्वारा राज्यपाल को सीएम हरीश रावत के स्टिंग की पैन ड्राइव और सीडी सौंपने पर स्पष्टीकरण मांगा है। पीठ ने कहा कि हरक सिंह रावत तब तक सरकार का अंग थे। ऐसे में वह अपने ही सीएम के विरुद्ध ऐसा कैसे कर सकते हैं?