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देहरादून: उत्तराखंड की कांग्रेस नेत्री गोदावरी थापली के पुत्र के खिलाफ एक युवती ने देहरादून में कथित रूप से मारपीट और कपड़े फाड़ने का मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस ने बताया कि मामले की विवेचना की जा रही है। हालांकि, इस संबंध में अभी गिरफ्तारी नहीं की गई है। पुलिस के अनुसार, पीड़ित युवती ने विक्रांत थापली पर आरोप लगाया है कि वह कल शाम उसे कार में बैठाकर रेसकोर्स इलाके में ले गया जहां उसने उसके साथ मारपीट और बदसलूकी की और उसके कपड़े भी फाड़ दिए। पुलिस ने कहा कि वह मामले की पूरी जांच पड़ताल के बाद ही कोई कार्रवाई करेगी। दूसरी ओर, गोदावरी ने इस संबंध में कहा कि दोनों के बीच लंबे समय से प्रेम प्रसंग था और मनमुटाव के इस मामले को परिवार में ही सुलझा लिया जाएगा।

देहरादून: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शुक्रवार को कहा कि प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगने का असर आने वाले समय में अन्य राज्यों पर भी होगा और इसका मुकाबला लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और विकासवादी सोच रखने वाली सभी शक्तियों को एकजुट होकर करना होगा। यहां संवाददाताओं से बातचीत करते हुए रावत ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश के बाद उत्तराखंड की सरकार को बर्खास्त किया गया और आगे भी अन्य गैर भाजपा सरकारों पर यही खतरा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि कई राज्यों के मुख्यमंत्री अपने ब्यानों में यह आशंका व्यक्त कर चुके हैं कि देश में कोई गैर भाजपा सरकार सुरक्षित नहीं है। इंदिरा हृदयेश, मंत्री प्रसाद नैथानी सहित अपने पूर्व मंत्रिमंडलीय सहयोगियों की मौजूदगी में पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘हम सबकी सामूहिक समझ है कि उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगने से केवल प्रदेश पर ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों पर भी इसका आने वाले समय में इसका असर पड़ेगा।’ लोकतंत्र में सभी के विचार, वेशभूशा, रहनसहन अलग होने के बावजूद एक ताना-बाना होने की बात कहते हुए रवत ने कहा कि लोकतंत्र में सहमति और असहमति दोनों साथ-साथ चलती है लेकिन यहां असहिणुता का प्र्दशन हो रहा है।

नैनीताल: उत्तराखंड में राजनीतिक संकट पर आज (गुरूवार) सुनवाई करने के दौरान नैनीताल हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के खिलाफ सख्त रवैया अपनाया। इस दौरान हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को नसीहत देने के अंदाज में कहा कि राष्ट्रपति शासन को लेकर केंद्र अपनी मनमानी बंद करे। साथ ही कोर्ट ने केंद्र से 12 अप्रैल तक रिपोर्ट तलब करते हुए 18 अप्रैल को सुनवाई की तारीख तय की है। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि केंद्र सरकार को इस मामले में अब मनमानी बंद कर देनी चाहिए। हम याचिकाकर्ता के हितों की रक्षा करेंगे। हम धारा 356 हटा भी सकते हैं। केंद्र की तरफ से अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने एक बार फिर संशोधित जवाब पेश करने के लिए हाईकोर्ट से दो हफ्ते का समय मांगा। हरीश रावत के अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अटॉर्नी जनरल की इस मांग का जोरदार विरोध किया। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद हाईकोर्ट ने 18 अप्रैल तक सुनवाई टाल दी।

देहरादून: उत्तराखंड में भाजपा द्वारा सरकार गठन की संभावनाएं तलाशे जाने की खबरों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राज्यपाल कृष्णकांत पाल से आग्रह किया है कि प्रदेश में राष्ट्रपति शासन हटने और सरकार गठन की संभावना बनने पर भाजपा की बजाय विधानसभा में सबसे बड़े दल का नेता होने के चलते उन्हें ही पहले न्योता दिया जाए और सदन में बहुमत सिद्ध करने के लिए कहा जाए। पूर्व मंत्रियों दिनेश अग्रवाल और प्रीतम सिंह द्वारा कल रात राजभवन जाकर पूर्व मुख्यमंत्री रावत की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में समाचारपत्रों और मीडिया में आई खबरों का हवाला देते हुए कहा गया है कि हालांकि, इन खबरों की सच्चाई और विश्वसनीयता अभी पुष्ट नहीं हो पाई है, लेकिन ऐसा लग रहा है कि उत्तराखंड में भाजपा को सरकार बनाने के लिए कहा जा सकता है। रावत ने कहा कि इन खबरों ने अधोहस्ताक्षरी (रावत) के दिमाग में गंभीर शंका पैदा कर दी है कि भाजपानीत केंद्र सरकार राष्ट्रपति शासन हटाकर और फिर भाजपा को सरकार बनाने का मौका देकर संविधान के साथ फिर धोखा करेगी।

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