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देहरादून: उत्तराखंड पुलिस के घोड़े शक्तिमान की मौत हो गई है। पिछले महीने उत्तराखंड में भाजपा के एक विरोध प्रदर्शन के दौरान शक्तिमान बुरी तरह घायल हो गया था और डॉक्टरों को उसकी जान बचाने के लिए उसका एक पैर काटना पड़ा था। इस 13 वर्षीय घोड़े को ऑपरेशन के बाद कृत्रिम पैर लगाया गया था और उसे देहरादून स्थित पुलिस लाइन में रखा गया था, जहां कुछ पुलिसवाले उसकी देखभाल कर रहे थे। हालांकि डॉक्टरों ने बताया कि उसके शरीर में फैले संक्रमण के चलते वह पूरी तरह उबर नहीं पाया और बुधवार शाम उसकी मौत हो गई। इस मामले में बीजेपी विधायक गणेश जोशी को घोड़े पर क्रूर हमले के आरोप में गिरफ्तार किया था, हालांकि बाद में उन्हें जमानत दे दी गई थी। उन पर पशुओं से क्रूरता और उसे अपंग बनाने जैसी धाराएं लगाई गई थी। इस मामले को लेकर उत्तराखंड की राजनीति भी खासी गर्मा गई थी, जहां अपने विधायकों की बगावत से जूझ रही तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने कहा था कि वह घोड़े का पूरा ध्यान रखेगी और हमलावरों को दंडित करेगी। वहीं बीजेपी ने तब कांग्रेस पर उसके विधायक पर निशाना बनाने और उन्हें विधानसभा की कार्यवाही और संभावित मतदान प्रक्रिया से दूर रखने का तिकड़म अपनाने का आरोप लगाया था। वहीं केंद्रीय मंत्री और पशु अधिकारों की पैरोकार मेनका गांधी ने पुलिस के घोड़े शक्तिमान की मौत के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को गिरफ्तार करने की बात करते हुए मांग की कि अब पशुओं को पुलिस बलों का हिस्सा नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, 'मैं शक्तिमान की मौत से बहुत दुखी हूं। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। घोड़ों को अब हमारे पुलिस बल का हिस्सा नहीं होना चाहिए।' उन्होंने कहा कि शक्तिमान 'ड्यूटी पर मौजूद पुलिस अधिकारी' था और उसकी मौत के लिए जिम्मेदार व्यक्ति की गिरफ्तारी 'पुलिस अधिकारी' की हत्या के मामले में होनी चाहिए।

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