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चेन्नई: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने शनिवार को केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि उसने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के परिवार को उचित स्थान पर उनके (सिंह के) अंतिम संस्कार के अधिकार से ‘वंचित किया’, जहां बाद में उनका स्मारक बनाया जा सके। उन्होंने इसे दिवंगत नेता की विशाल विरासत और सिख समुदाय का अपमान करार दिया।

मोदी सरकार पर बरसे सीएम स्टालिन

स्टालिन ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, "डॉ. मनमोहन सिंह के परिवार को उनके स्मारक के लिए उचित स्थान पर उनका (सिंह का) अंतिम संस्कार करने के अधिकार से वंचित करने का बीजेपी सरकार का फैसला उनकी विशाल विरासत और सिख समुदाय का सीधा अपमान है।"

उन्होंने कहा कि "परिवार के अनुरोध को अस्वीकार करना और दो बार के प्रधानमंत्री का पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए निगमबोध घाट भेजना अहंकार, पूर्वाग्रह और सार्वजनिक स्मृति से उनके विशाल योगदान को मिटाने का जानबूझकर किया गया प्रयास है।"

चेन्नई: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने सोमवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी)-नीत केंद्र सरकार के तहत लोकतंत्र सबसे बड़े खतरे का सामना कर रहा है, क्योंकि उसने ‘‘पारदर्शिता को खत्म करने’’ के लिए चुनाव संचालन नियमों में बिना सोचे समझे संशोधन किया है। स्टालिन ने सभी राजनीतिक दलों से ‘‘स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव पर हमले’’ का मुकाबला करने की अपील की।

तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (डीएमके) के अध्यक्ष स्टालिन ने कहा कि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा चुनाव बूथ का सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने के निर्देश के बाद, सरकार सीसीटीवी फुटेज सहित चुनाव दस्तावेजों के सार्वजनिक निरीक्षण को रोकने के लिए संशोधन लेकर आयी है, इस प्रकार ‘‘संविधान की एक बुनियादी विशेषता को नष्ट कर दिया है।’’

उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘चुनाव में पारदर्शिता खत्म करने के लिए चुनाव संचालन नियमों की धारा 93(2)(ए) में लापरवाही से संशोधन किए जाने से बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के तहत लोकतंत्र सबसे गंभीर खतरे का सामना कर रहा है।’’

चेन्नई: द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) अध्यक्ष और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन की अध्यक्षता में रविवार को यहां हुई पार्टी की कार्यकारिणी समिति की बैठक में बाबासाहेब अंबेडकर की ‘मानहानि’ करने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की कड़ी निंदा की गई। डीएमके ने पारित एक प्रस्ताव में आरोप लगाया कि शाह ने डॉ. अंबेडकर के बलिदान को कलंकित किया है, जो ‘अस्वीकार्य’ है और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) शासन के तहत संसदीय लोकतंत्र पर एक धब्बा है।

डीएमके ने बीजेपी पर लगाया 'ध्यान भटकाने' का आरोप

डीएमके की कार्यकारी समिति की बैठक में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया, "यह शर्मनाक है कि देश के गृह मंत्री ने लोकतंत्र के मंदिर में इस प्रकार की अपमानजनक बात की। संसद के अंदर और बाहर बीजेपी द्वारा इस मुद्दे से ध्यान भटकाने का नाटक अत्यंत हास्यास्पद है।" पार्टी ने राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन के लिए पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं तथा संसद के दोनों सदनों में मंत्री का विरोध करने के लिए सांसदों की सराहना की।

चेन्नई: मद्रास हाईकोर्ट ने तिरूवल्लूर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) को यहां पुझल में केंद्रीय जेल (प्रथम) में जाने और वहां जेल अधिकारियों द्वारा कथित रूप से बुरी तरह पीटे गए विचाराधीन कैदी जयंतन का बयान दर्ज करने, मामले की जांच करने और अपनी राय के साथ जांच रिपोर्ट 17 दिसंबर या उससे पहले सौंपने का निर्देश दिया है। जस्टिस एस एम सुब्रमण्यम और जस्टिस एम जोतिरमण ने विचाराधीन कैदी की मां आनंदी की याचिका पर हाल ही में सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। बेंच ने कहा कि विचाराधीन कैदी का बयान जेल अधीक्षक या किसी भी अन्य जेल अधिकारी की मौजूदगी में नहीं लेना है।

पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता के वकील का कहना है कि कैदी की मां को 17 अक्टूबर, 2024 को एक वकील ने बताया कि उनके बेटे/कैदी जयंतन की 16 अक्टूबर को पुलिस अधिकारी प्रशांत पांडियन ने पिटाई की और वह गंभीर रूप से घायल हो गया। सूचना देने वाले वकील ने याचिकाकर्ता को बताया कि उनका बेटा बेहोश था और उसे इलाज के लिए अस्पताल नहीं ले जाया गया।

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