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लंदन: संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीबी) में सोमवार (24 फरवरी) को यूक्रेन से रूसी सैनिकों की तत्काल वापसी का प्रस्ताव पास कर दिया गया। यूक्रेन के लिहाज से यह एक अच्छी खबर जरूर है, लेकिन इस बार पास हुआ प्रस्ताव यूक्रेन को कम होते समर्थन को भी दर्शाता है। दरअसल, इस प्रस्ताव को 93 देशों का समर्थन मिला, जबकि 18 देशों ने इसका विरोध किया और 65 देशों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। यानि करीब 83 देश तीन साल से युद्ध झेल रहे यूक्रेन के साथ खड़े नहीं हैं।

भारत ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया

अमेरिका ने यह प्रस्ताव पेश किया था, जिसे यूरोपिय देशों द्वारा सुझाए गए संशोधनों के साथ पारित कर दिया गया। प्रस्ताव में युद्ध को पूरी तरह खत्म करने के लिए शांतिपूर्ण समाधान का आह्वान किया गया है। प्रस्ताव ऐसे दिन पेश किया गया, जब इस युद्ध को शुरू हुए पूरे 3 साल हो चुके हैं। दरअसल, रूस ने 24 फरवरी 2022 को ही यूक्रेन के खिलाफ जंग का एलान किया था। शुरुआत में तो रूस को तेजी से सफलता मिली, लेकिन बाद में यूक्रेन ने उसे अच्छी टक्कर दी। यूक्रेन को इस युद्ध में अमेरिका और कई यूरोपिय देशों का सपोर्ट मिल रहा है।

वाशिंगटन: अमेरिका द्वारा लगातार ऐसे बायन दिए जा रहा हैं और कदम उठाए जा रहे हैं, जिसका असर सीधे तौर पर भारत पर पड़ा रह है। अब अमेरिका ने एक और बड़ा कदम उठाया है। अमेरिका ने चार भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया है। इन कंपनियों को ईरान से संबंध की सजा दी गई है।

ईरान से संबंधों की दी सजा

दरअसल अमेरिका ने ईरान को कमजोर करने के लिए उसके पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्रीज से जुड़ी 16 कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं। इस सूची में यह चार भारतीय कंपनियां भी शामिल हैं। अमेरिकी वित्त विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि जिन भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं, उनमें कॉसमॉस लाइन्स इंक, बीएसएम मरीन एलएलपी, ऑस्टिनशिप मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड और फ्लक्स मैरीटाइम एलएलपी शामिल हैं।

अमेरिका द्वारा भारतीय कंपनियों पर लगाए प्रतिबंध पर अब तक भारत की ओर से कोई कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। भारत के ईरान और अमेरिका दोनों बेहतर संबंध हैं।

लंदन: संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सोमवार को यूक्रेन के एक प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिसमें तीन साल पहले हुए रूस के आक्रमण के बाद से सभी रूसी सैनिकों की तत्काल यूक्रेन से वापसी की मांग की गई थी। इस प्रस्ताव के पक्ष में 93 देशों ने मतदान किया, जबकि 18 देशों ने इसका विरोध किया।

बता दें कि इस बैठक में भारत सहित 65 देशों ने मतदान में भाग नहीं लिया। हालांकि, यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, लेकिन इसे वैश्विक समुदाय का रुख और जनमत का एक महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है।

यूएन महासचिव गुटेरेस ने सभी देशों से सहयोग की अपील की

यह प्रस्ताव रूस-यूक्रेन युद्ध की तीसरी वर्षगांठ पर पेश किया गया था। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस अवसर पर कहा कि यूक्रेन में जारी युद्ध न केवल यूरोप की शांति और सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि यह संयुक्त राष्ट्र की नींव और सिद्धांतों के लिए भी एक गंभीर चुनौती है। उन्होंने युद्ध को जल्द समाप्त करने के लिए सभी देशों से सहयोग की अपील की।

ओटावा: अमेरिका के व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे राष्ट्रपति कार्यकाल की शुरुआत के साथ ही अमेरिका और कनाडा के संबंध लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप के दोस्त और सहयोगी टेस्ला के मालिक एलन मस्क उनका हर फैसले में साथ देते हैं। कनाडा को संयुक्त राज्य अमेरिका का हिस्सा बनाने के ट्रंप के एलान का भी मस्क ने समर्थन किया था। अब कनाडा में एलन मस्क के खिलाफ विरोध शुरू हो गया है।

अमेरिका के ट्रंप प्रशासन पर गंभीर आरोप

उल्लेखनीय है कि अरबपति एलन मस्क के पास तीन देशों की राष्ट्रीयता है। इनमें संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और दक्षिण अफ्रीका शामिल है। वहीं, कनाडा में एनडीपी सांसद चार्ली एंगस ने संसद में मांग की है कि प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो एलन मस्क की दोहरी नागरिकता और कनाडाई पासपोर्ट को रद्द करें। अपनी इस मांग को लेकर सरकार पर दबाव बनाने के लिए सांसद एंगस ने एक इलेक्ट्रॉनिक याचिका शुरू की है, जिसमें सरकार से जल्द से जल्द ऐसा करने का आह्वान किया गया है।

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