ताज़ा खबरें
वक्फ विधेयक को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी डीएमके: सीएम स्टालिन
'वक्फ संशोधन बिल सिर्फ साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए': सोनिया गांधी
लोकसभा से पास हुआ वक्फ बिल: पक्ष में 288, विरोध में पड़े 232 वोट

गुवाहाटी: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को उम्मीद जताई कि जल्द ही पूरे असम से सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (आफस्पा) को हटा लिया जाएगा, क्योंकि बेहतर कानून-व्यवस्था और उग्रवादी संगठनों के साथ शांति समझौते के कारण पहले ही राज्य से इसे आंशिक रूप से हटा दिया गया है।

सुरक्षा स्थितियों में सुधार के मद्देनजर केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर राज्यों में आफस्पा के तहत आने वाले अशांत क्षेत्रों को धीरे-धीरे घटाना शुरू किया है। केंद्रीय गृह मंत्री असम के दो दिवसीय दौरे पर हैं।

असम पुलिस को मंगलवार को ‘प्रेसीडेंट्स कलर’ (राष्ट्रपति के ध्वज) से सम्मानित करने के बाद उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के प्रयासों के कारण अधिकतर उग्रवादी संगठनों ने शांति समझौता किया है और ‘‘वह दिन भी अब दूर नहीं जब पूरा राज्य उग्रवाद और हिंसा से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम को 23 जिलों से पूरी तरह और एक जिले से आंशिक रूप से हटा दिया गया है। मुझे विश्वास है कि पूरे राज्य से इसे जल्द ही हटा दिया जाएगा।’’

गुवाहाटी: केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने कहा कि 100 प्रतिशत गणना सुनिश्चित करने के लिए जनगणना प्रक्रिया का डिजिटलीकरण किया गया है। इससे उम्मीद है कि अगली जनगणना में शत प्रतिशत गणना होगी। वह कामरूप जिले के मुख्यालय अमिनगांव में जनगणना संचालन निदेशालय (असम) के भवन का उद्घाटन करने के बाद सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कई पहलुओं के चलते जनगणना जरूरी है। आबादी को लेकर संवेदनशील असम जैसे राज्यों के लिए तो यह और भी अहम है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि अगली ई-जनगणना अगले 25 वर्षों की नीतियों को आकार देगी। इससे जुड़ा साफ्टवेयर लान्च होने के बाद मैं और मेरा परिवार सबसे पहले आनलाइन विवरण भरेंगे।

केंद्रीय गृह मंत्री ने यह भी बताया कि जन्म और मृत्यु रजिस्टर को जनगणना से जोड़ा जाएगा। साल 2024 तक हर जन्म और मृत्यु का पंजीकरण होगा यानी हमारी जनगणना अपने आप अपडेट हो जाएगी।

गुवाहाटी: गौहाटी हाई कोर्ट की फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल बेंच ने संकेत दिए हैं कि जब एक बार ट्रिब्यूनल ने किसी को भारतीय घोषित कर दिया है, तो उसी व्यक्ति को दूसरी बार उसके सामने लाने पर गैर-भारतीय घोषित नहीं किया जा सकता है। कोर्ट की यह टिप्पणी असम में इस कारण महत्वपूर्ण है, क्योंकि वहां ऐसे कई मामले देखे गए हैं, जहां भारतीय घोषित किए गए व्यक्ति को दो या उससे अधिक बार राष्ट्रीयता साबित करने के लिए नोटिस भेजे गए हैं।

राष्ट्रीयता से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति की नागरिकता के संबंध में ट्रिब्यूनल की राय "रेस ज्यूडिकाटा" (पूर्व निर्णीत मामला) के रूप में काम करेगी- जिसका अर्थ है कि मामला पहले ही तय हो चुका है और उसे फिर से अदालत में नहीं लाया जा सकता है।

इस सप्ताह की शुरुआत में नागरिकता पर कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए, जस्टिस एन कोटिस्वर सिंह और जस्टिस नानी तागिया की बेंच ने कहा कि हालांकि "रेस ज्यूडिकाटा" का सिद्धांत "सार्वजनिक नीति पर आधारित है।"

नई दिल्ली: असम पुलिस ने ओएनजीसी में नौकरी दिलाने का झांसा देकर कई लोगों को ठगने वाले एक ठग को गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया। राणा पोगाग नाम के शख्स को उसके मंगेतर जुनमोनी राभा द्वारा गिरफ्तार किया गया। जुनमोनी राभा नौगांव के एक थाने में महिला सब इंस्पेक्टर के तौर पर तैनात है। पोगाग ने झूठा दावा किया था कि वह असम में ओएनजीसी में काम करता है। इस आधार पर कंपनी में नौकरी दिलाने के नाम पर वह लोगों से पैसे मांगता था। पुलिस के मुताबिक, पोगाग ने कथित तौर पर लोगों से करोड़ों रुपये ठग लिए थे।

आरोपी ने नौगांव जिले में कार्यरत सब-इंस्पेक्टर जुनमोनी राभा से सामने भी अपने आपको जनसंपर्क अधिकारी बताया था। जिसके बाद पिछले साल अक्टूबर में दोनों की सगाई हुई थी। इस साल नवंबर में दोनों शादी करने वाले थे। लेकिन जब महिला आधिकारी को पता चला कि वो एक ठग है तो उसने अपने मंगेतर के ही खिलाफ केस दर्ज करवाया।

  • देश
  • प्रदेश
  • आलेख