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नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने 26 वर्ष पहले घर छोड़ने के लिए मजबूर कश्मीरी पंडितों के अपने घरों को वापस नहीं लौटने का दोष कश्मीरी पंडितों के सिर पर ही मढ़ दिया। फारूक अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा, ‘उन्हें इस बात का अहसास करना होगा कि कोई भीख का कटोरा लेकर उनके सामने आकर यह नहीं कहेगा कि आओ और हमारे साथ रहो। उन्हें कदम उठाना होगा।’ राज्य से विस्थापित कश्मीरी पंडितों की कई पीढ़ियों के दर्द की दास्तां और अपने पड़ोसी मुसलमानों के साथ सुकून की जिंदगी बसर करने की उनकी चाह को समेटती एक किताब के विमोचन के मौके पर अब्दुल्ला ने यह बात कही।

श्रीनगर: पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने उम्मीद जतायी कि भारत और पाकिस्तान के बीच सुलह प्रक्रिया को पुनर्जीवित करने से क्षेत्र में शांति और स्थायित्व सुनिश्चित करने के प्रयास में एक नयी दिशा मिलेगी। ईरान और पश्चिम के बीच मेल-मिलाप का स्वागत करते हुये महबूबा ने कहा कि तेहरान का विश्व शक्तियों के साथ ऐतिहासिक परमाणु समझौते से यह स्पष्ट हो गया है कि कार्य और सुलह की प्रक्रिया का कोई विकल्प नहीं है। महबूबा अपने पिता मुफ्ती सईद के निधन के बाद जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री हो सकती हैं। उन्होंने यहां पर एक बयान में बताया, ‘सौभाग्य से विश्व शक्तियों और ईरान के बीच हालिया सहमति नयी दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच नयी सहमति से मेल खाती है और हमें उम्मीद है कि सुलह को पुनर्जीवित करने की प्रक्रिया क्षेत्र में शांति और स्थायित्व को सुनिश्चित करने के प्रयास के लक्ष्य की ओर एक नयी दिशा होगी।’

श्रीनगर: भाजपा के साथ अपना गठबंधन जारी रखने के बडे संकेत देते हुए पीडीपी ने कहा कि पार्टी के कोर ग्रुप ने अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती को जम्मू कश्मीर से सरकार गठित करने के बारे में अंतिम निर्णय करने के लिए अधिकृत किया है। पीडीपी नेता नईम अख्तर ने पाटी के कोर ग्रुप की पांच घंटे तक चली बैठक के बाद बताया, सरकार गठन के बारे में पार्टी महसूस करती है कि हमारे लिये गठबंधन एजेडा पवित्र दस्तावेज है तथा सईद (मुफ्ती मोहम्मद) के तहत काफी प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि कोर ग्रुप ने पार्टी अध्यक्ष महबूबा को अधिकृत किया है कि वह जो चाहे निर्णय कर सकती हैं (सरकार गठन के बारे में)। अख्तर ने कहा कि पीडीपी ने भाजपा के साथ सरकार गठन के लिए कोई शर्त नहीं रखी है किन्तु उन्होंने इसके लिए कोई समयसीमा तय नहीं की है।

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में भाजपा के साथ सरकार बनाने के नेशनल कान्फ्रेंस की तरफ से रजामंदी जताने के फारूक अब्दुल्ला के बयान के एक दिन बाद उनके बेटे उमर अब्दुल्ला ने आज (रविवार) भगवा पार्टी के साथ किसी तरह के तालमेल की गुंजाइश को यह कहते हुए खारिज कर दी कि उनकी पार्टी ‘सत्ता की भूखी नहीं है’ और ‘विचारधारा के साथ समझौता’ नहीं करेगी। उमर ने फेसबुक पर अपने आधिकारिक पन्ने पर कहा, ‘नेशनल कान्फ्रेंस सत्ता की भूखी नहीं है और ऐसी राजनीतिक सत्ता में उसकी रूचि नहीं है जो विचारधारात्मक समझौता कर के मिलती हो। हमने एक साल पहले भाजपा के साथ गठबंधन की संभावना छोड़ दी थी और ऐसा करने की वजह नहीं बदली है।’ उमर नेशनल कान्फ्रेंस के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा कि फारूक अब्दुल्ला एक काल्पनिक स्थिति पर आधारित एक काल्पनिक सवाल का जवाब दे रहे थे और उन्होंने कभी नहीं कहा था कि पार्टी भाजपा की हिमायत करेगी।

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