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श्रीनगर: जम्मू और कश्मीर में सरकार गठन को लेकर बनी असमंजस की स्थिति रविवार को भी स्पष्ट नहीं हो सकी। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने रविवार को पार्टी विधायकों, सांसदों और अन्य नेताओं के साथ बैठक ली। हालांकि सरकार जल्द बनाने को लेकर महबूबा के रुख में कोई बदलाव नहीं देखा गया। पीडीपी अध्यक्ष का साफ कहना है कि जब तक उन्हें भाजपा से यह आश्वासन नहीं मिल जाता कि उनके पिता की विचारधारा का अनुसरण किया जाएगा, तब तक सरकार का गठन संभव नहीं है। महबूबा के पिता और दिवंगत मुफ्ती मोहम्मद सईद के नेतृत्व वाली सरकार में भाजपा भी शामिल थी। पीडीपी सूत्रों के मुताबिक, चार घंटे से अधिक चली बैठक में पार्टी अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें अपने गठबंधन सहयोगी भाजपा से पूरा भरोसा चाहिए कि दिवंगत सईद की राज्य में समान विकास और शांति की विचारधार पर अमल किया जाएगा।

श्रीनगर: दुबई से भारत लौटने के तुरंत बाद आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट का समर्थक होने के संदेह में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से गिरफ्तार किया गया 23 वर्षीय युवक जम्मू एवं कश्मीर के गांदेरबल जिले का वासी है। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। श्रीनगर में एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि दो अन्य संदिग्धों के साथ हिरासत में लिए जाने के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपा गया अजहर उल इस्लाम गांदेरबल जिले के प्रेंग गांव का रहने वाला है। उसके पिता का नाम अब्दुल सत्तार शेख है। पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि अजहर एक होटल में वेटर की नौकरी करने के लिए 2015 में दुबई गया था।

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में सरकार गठन पर कायम रहस्य के बीच दिवंगत मुफ्ती मोहम्मद सईद के परिवार ने यहां मुख्यमंत्री का आधिकारिक आवास खाली कर दिया है। इस कदम से यह सवाल पैदा होने लगे हैं कि सईद की बेटी और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती सरकार बनाने को लेकर क्या फैसला करने वाली हैं। दिवंगत नेता के निधन के 11 दिनों बाद उनकी पत्नी और महबूबा की मां बेगम गुलशन 18 जनवरी को जम्मू सिटी स्थित वजारत रोड पर बने बंगले में गई थीं और परिवार का सारा सामान वहां से ले आयीं। पीडीपी प्रवक्ता और पूर्व मंत्री नईम अख्तर ने बताया, मुफ्ती साहब मुख्यमंत्री रहे नहीं, तो जन व्यवहार की सर्वश्रेष्ठ परंपरा का पालन करते हुए 18 जनवरी को उनका परिवार अपना सारा सामान उस मकान से लेकर चला गया। उन्होंने कहा, इसमें कुछ भी राजनीतिक नहीं है। यह एक आम चलन है। मुफ्ती साहब ने हमेशा इसकी वकालत की थी।

श्रीनगर: हुर्रियत कांफ्रेंस के कट्टरपंथी धड़े के नेता सैयद अली शाह गिलानी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को चिट्ठी लिखकर गिलगिट-बल्टिस्तान के पाकिस्तान में विलय के प्रस्तावित कदम का विरोध किया। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह का कोई भी कदम बहुत बुरा साबित होगा। उन्होंने चिट्ठी में लिखा, 'पाकिस्तान में गिलगिट-बल्टिस्तान का विलय जम्मू-कश्मीर की विवादित स्थिति के लिए बहुत बुरा होगा और इस कदम से इस क्षेत्र के विवादित दर्जे पर असर पड़ेगा।' हुर्रियत नेता ने गिलगिट-बल्टिस्तान को जम्मू-कश्मीर का अभिन्न हिस्सा बताते हुए कहा कि पाकिस्तान-चीन आर्थिक गलियारे से निश्चित तौर पर क्षेत्र की आर्थिक दशा बेहतर होगी लेकिन इस उद्देश्य के लिए इसका पाकिस्तान में विलय करना जरूरी नहीं है।

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