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चेन्नई: तमिलनाडु में विधानसभा अध्यक्ष पी धनपाल द्वारा कुछ मुद्दों को उठाने की अनुमति नहीं दिये जाने के बाद द्रमुक और डीएमडीके समेत विपक्षी दलों के विधायकों ने आज सदन से वॉकआउट किया। प्रश्न काल खत्म होने के तुरंत बाद डीएमके विधायक दुरई मुरगन ने कुछ मुद्दे उठाने चाहे लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने यह कहते हुए उसकी अनुमति नहीं दी कि मुद्दे पर उनका ध्यान है और वह बाद में इस मुद्दे को उठा सकते हैं। इसके बाद डीएमडीके और वाम दलों के विधायक भी द्रमुक के पक्ष में आ गये और वे भी विधानसभा अध्यक्ष से संबंधित विषय पर चर्चा की मांग करने लगे। विपक्षी विधायकों को खड़े होकर धनपाल से बहस करते हुए देखा गया वहीं विधानसभा अध्यक्ष आज उस मुद्दे पर चर्चा नहीं कराने के अपने रख पर कायम रहे।

चेन्नई: राजीव गांधी हत्या मामले में सात दोषियों में से एक ए जी पेरारीवलन ने अपने पिता के स्वास्थ्य के आधार पर एक महीने पैरोल की मांग की है। पेरारीवलन की मां अरपुथामल ने पीटीआई से कहा, ‘‘हाल में मैंने जेल अधिकारियों, मुख्यमंत्री प्रकोष्ठ को आवेदन दिया है और पेरारीवलन ने भी जेल अधिकारियों को आवेदन देकर एक महीने पैरोल की मांग की है।’’ 44 वर्षीय पेरारीवलन मई 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद से ही जेल में बंद है। अरपुथामल ने कहा कि उनके 74 वर्षीय पति और पेरारीवलन के पिता कुछ समय से बीमार हैं।

चेन्नई: सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बेपरवाह मद्रास हाई कोर्ट के जज सीएस कर्णन ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के दो जजों के खिलाफ एससी/एसटी (अत्याचार निवारण अधिनियम) की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करने के ‘‘आदेश’’ जारी करेंगे अगर उन्हें कोई न्यायिक कार्य नहीं दिया गया। न्यायमूर्ति कर्णन ने कहा कि अब भी उनके पास न्यायिक शक्तियां हैं। उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि वह चेन्नई के पुलिस आयुक्त को ‘‘स्वत: संज्ञान न्यायिक आदेश’’ जारी कर उच्चतम न्यायालय के दोनों न्यायाधीशों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने को कहेंगे। न्यायमूर्ति कर्णन ने बार बार कहा कि वह ‘जाति भेदभाव’ के पीड़ित हैं। उन्होंने कहा, ‘‘अगर मेरे जन्मसिद्ध अधिकार को खत्म कर दिया जाए तो मैं किसी ऐसे देश में चला जाऊंगा जहां इस तरह के भेदभाव नहीं हैं।’’ उन्होंने मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय किशन कौल के खिलाफ भी कई आरोप लगाए।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से कहा कि वह विवादास्पद न्यायाधीश न्यायमूर्ति सीएस करनन को कोई न्यायिक कार्य न दें जिनका कलकत्ता हाईकोर्ट में तबादला हुआ है । शीर्ष अदालत ने यह आदेश मद्रास उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार के आवेदन पर दिया जो मुख्य न्यायाधीश के निजी सचिव भी हैं। उन्होंने न्यायमूर्ति करनन को कोई न्यायिक कार्य करने से रोकने का आदेश मांगा। सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता केके वेणुगोपाल द्वारा दायर आवेदन का उल्लेख किया जिसमें कहा गया है कि न्यायमूर्ति करनन ने तबादला आदेश मिलने पर, स्वत: संज्ञान से अपने तबादले के खिलाफ आदेश पारित करने का फैसला किया और मामले को के लिए सूचीबद्ध किया।

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