देहरादून: उत्तराखंड हाई कोर्ट ने आज (बुधवार) नौ बागी कांग्रेस विधायकों द्वारा प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद राज्य विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल के उनकी सदस्यता समाप्त करने के निर्णय को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई स्थगित कर दी। नैनीताल स्थित उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अदालत द्वारा कल हरीश रावत की राष्ट्रपति शासन को चुनौती देने वाली याचिका पर दिये गये अंतरिम आदेश में बागी विधायकों को राज्य विधानसभा में होने वाले शक्ति परीक्षण में अयोग्य होने के बावजूद मतदान का अधिकार देकर पहले ही राहत दी जा चुकी है। उच्च न्यायालय ने उन्हें यह भी बताया कि हालांकि उन्हें सदन में शक्ति परीक्षण में मतदान करने की अनुमति दी गयी है लेकिन उनके द्वारा डाले गये मतों की स्थिति बाकी विधायकों के बराबर नहीं होगी। इससे पहले, नौ बागी कांग्रेस विधायकों में से छह ने न्यायालय में एक अपील दायर करते हुए विधानसभा अध्यक्ष कुंजवाल के निर्णय की वैधता को इस आधार पर चुनौती दी कि प्रदेश में अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लागू होने और उसके चलते विधानसभा के निलंबित हो जाने के बाद भी अध्यक्ष ने उनकी सदस्यता समाप्त कर दी।
गौरतलब है कि विधानसभा अध्यक्ष ने राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद उसी दिन दल-बदल कानून के तहत नौ बागी कांग्रेस विधायकों की सदस्यता समाप्त कर दी थी।