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रांची: राजद सुप्रीमो और चारा घोटाले के अभियुक्त लालू प्रसाद को गुरुवार को बड़ा झटका लगा है। झारखंड हाईकोर्ट ने सीबीआई कोर्ट से मामला स्थानांतरित करने का उनका आग्रह ठुकरा दिया और याचिका खारिज कर दी। जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि मामले को स्थानांतरित करने के लिए दिया गया आधार तर्कपूर्ण नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में भी इस याचिका में कोई मेरिट नहीं है। हालांकि अदालत ने लालू को छूट दी कि यदि वह चाहते हैं कि गवाह सुनील कुमार की फिर से गवाही कराई जाए, तो वह सीबीआई कोर्ट से इसका आग्रह कर सकते हैं। उनके आग्रह पर सीबीआई कोर्ट विचार करेगी। लालू प्रसाद ने सीबीआई के विशेष जज शिवपाल सिंह की अदालत पर अविश्वास जताया था और कहा था कि इस कोर्ट से उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है। जज पर आरोप लगाया था कि वह उनके गवाह के साथ सही तरीके से पेश नहीं आ रहे हैं। गवाह से जाति पूछने के बाद उन्हें कोर्ट से बाहर कर दिया। डीजी रैंक के अधिकारी सुनील कुमार की पहले गवाही नहीं ली और जब गवाही लेने से मना किया गया, तो उन्होंने कोर्ट का गवाह बनाकर गवाही दर्ज कराई।

नई दिल्ली: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जमशेदपुर के महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कालेज अस्पताल में एक महीने में 52 बच्चों की मौत के मामले में झारखंड सरकार से 6 हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है। झारखंड के मुख्य सचिव को जारी हुए नोटिस के मुताबिक आयोग ने मीडिया रिपोर्टों के आधार पर ये पहल की है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 52 बच्चों की मौत 30 दिन के भीतर हुई। अस्पताल के सुपरिटेंडेंट ने मौतों की वजह कुपोषण बताई है। महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कालेज अस्पताल के सुपरिंटेंडेंट भारतेन्दु भूषण ने दावा किया है कि सबसे ज़्यादा मौतें कुपोषण की वजह से हुई हैं. उनके मुताबिक ज्यादातर बच्चे ग्रामीण इलाकों से थे। फिलहाल इन मौतों की जांच की जा रही है। जांचकर्ता डा. मुर्मु भी कहते हैं कुपोषण के कारण ही सबसे ज़्यादा बच्चों ती मौंतें हुई हैं। वो कहते हैं कि ग्रामीण इलाकों में गर्भवती महिलाएं ज़्यादा जागरूक नहीं होती हैं, पोष्टिक भोजन समय पर नहीं लेती हैं जिसका होने वाले बच्चों की सेहत पर बहुत बुरा इसर पड़ता है। इससे पहले गोरखपुर और छत्तीसगढ़ में हुई बच्चों की मौतों से राज्यों के भीतर स्वास्थ्य सेवाओं के मौजूदा बुनियादी ढांचे पर बड़े सवाल उठे थे।

रांची: राजद सुप्रीमो और चारा घोटाले के अभियुक्त लालू प्रसाद के सीबीआई के जज शिवपाल सिंह की अदालत से मामला स्थानांतरित करने की याचिका पर सुनवाई पूरी करने के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। शुक्रवार को जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की अदालत में करीब डेढ़ घंटे तक सुनवाई हुई और इसमें लालू और सीबीआई की ओर से पक्ष रखे गए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया। लालू प्रसाद की ओर से बहस करते हुए अधिवक्ता प्रभात कुमार ने अदालत ने को बताया कि विशेष जज शिवपाल सिंह लालू प्रसाद और उनके गवाहों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं कर रहे हैं। एक गवाह ने समय से पहले गवाही देनी चाही, तो उसका बयान दर्ज नहीं किया गया। नाम, पता पूछने के बाद गवाह की जाति भी पूछी गयी। गवाह ने जब कहा कि वह अनुसूचित जाति से है, तो कोर्ट ने उस दस्तावेज को फाड़ दिया, जिसमें गवाह के बारे में नोट किया गया था। इसके बाद गवाह को चले जाने का आदेश जज ने दिया। अदालत को बताया गया कि लालू की ओपन हार्ट सर्जरी हुई है।

रांची: झारखंड में सोमवार को एक दर्दनाक खबर सामने आई. मात्र 50 रुपये कम पड़ने पर राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (रिम्स) के लैब स्टाफ ने एक बच्चे का टेस्ट करने से इनकार कर दिया। सही समय पर टेस्ट न होने से श्याम की मौत हो गई। दरअसल सीटी स्कैन के लिए 1350 रुपये की जरूरत थी। संतोष के पास केवल 1300 रुपये थे। उसने लैब स्टॉफ से स्कैन करने का अनुरोध किया लेकिन उन्होंने श्याम का टेस्ट करने से इनकार कर दिया। अस्पताल प्रबंधन से बच्चे के पिता ने काफी मिन्नतें की लेकिन लैब स्टाफ का दिल नहीं पसीजा। झारखंड पुलिस के मुताबिक, सिर में चोट के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बच्चे के पिता संतोष कुमार ने बताया कि डॉक्टरों ने सीटी स्कैन कराने के लिए कहा था। सीटी स्कैन के लिए 1350 रुपये की जरूरत थी। संतोष के पास केवल 1300 रुपये थे। उसने लैब स्टॉफ से स्कैन करने का अनुरोध किया लेकिन उन्होंने श्याम का टेस्ट करने से इनकार कर दिया। बाद में जांच के अभाव में बच्चे की मौत हो गई। इसी तरह से मिलता-जुलता एक मामला रविवार को गुमला जिले में भी प्रकाश में आया था जिसमें नवजात और प्रसूता की मौत हो गई थी।

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