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ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा है कि रेलवे लाइन के तवांग पहुंचने से चीन को मुहतोड़ जवाब मिलेगा। केंद्रीय रेल राज्य मंत्री, सुरेश अंगड़ी ने मंत्रालय और रेलवे के अधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री पेमा खांडू से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान, अरुणाचल प्रदेश में चल रही और प्रस्तावित रेलवे लाइनों को फास्ट ट्रैक करने पर दोनों के बीच चर्चा हुई। खांडू ने जोर देकर कहा कि प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न इस राज्य के लिए कनेक्टिविटी ही एकमात्र अड़चन है। उन्होंने राज्य में रेलवे कनेक्टिविटी प्रदान करने में मंत्रालय से विशेष ध्यान देने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश, विशेष रुप से तवांग जिला, जो सबसे ज्यादा विवादित है। रेलवे द्वारा यहां लाइन बिछाने के बाद चीन को यह एक मुंहतोड़ जवाब होगा। साथ ही उन्होंने मंत्रालय से सेला टनल पर काम में तेजी लाने के लिए आग्रह किया है, जो तवांग जिले से भालुकपोंग तक जाती है। नाहरलागुन और गुवाहाटी के बीच शुरू की गई शताब्दी एक्सप्रेस के बारे में बात करते हुए, खांडू ने कहा कि यात्रियों में इसके लिए सबसे अधिक मांग है। हालांकि, उन्होंने नाहरलागुन से ट्रेन के प्रस्थान समय को बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया।

नई दिल्ली: अरुणाचल प्रदेश के चगलगाम में एक नदी के ऊपर चीन द्वारा पुल बनाए जाने को लेकर बुधवार को भाजपा सांसद तापिर गाओ ने कहा कि मैकमोहन रेखा चगलगाम से करीब 100 किलोमीटर की दूरी पर है। ऐसे में अगर चाइना चगलगाम से 25 किलोमीटर की दूरी पर भी पुल का निर्माण करता है तो इसका मतलब है कि वह हमारी सीमा से 60-70 किलोमीटर अंदर घुस चुका है।

सांसद तापिर गाओ ने कहा कि मैं इसके लिए सेना पर या उस इलाके में गश्त करने वाली टीमों पर उंगली नहीं उठा रहा हूं, क्योंकि उन इलाकों में पेट्रोलिंग करने के लिए सड़कें ही नहीं हैं तो सुरक्षा बल वहां का जायजा कैसे लेंगे। सरकार पर भरोसा जताते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि मुझे सरकार पर विश्वास है। मैं चाहता हूं कि सरकार इस मामले का संज्ञान ले। मैं खुद भी इस पर काम करूंगा।

नई दिल्ली: सेना, वायु सेना और पर्वतारोहियों के एक दल ने अरुणाचल प्रदेश में एएन-32 विमान के मलबे वाली जगह पर जाने के लिए बुधवार को उड़ान भरी। यह दल इस हादसे में यात्रियों के जीवित बचे होने की संभावनाओं का पता लगाने के लिए गया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। वायुसेना के एमआई-17 हेलीकॉप्टर ने मंगलवार को एएन-32 विमान का मलबा पहाड़ी इलाके के घने जंगल में देखा था। इस विमान के लापता होने के आठ दिनों बाद इसका मलबा देखा गया था। इसमें कुल 13 लोग सवार थे। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि यह बचाव दल हादसे में लोगों के जीवित होने के बारे में जानकारी जुटायेगा।

रूस निर्मित एएन-32 विमान असम के जोरहाट से तीन जून को चीन की सीमा के निकट मेनचुका एडवांस्ड लैंडिग ग्राउंड जा रहा था। उसके उड़ान भरने के 33 मिनट में ही दोपहर एक बजे संपर्क टूट गया। विमान के लापता होने के बाद वायु सेना ने व्यापक तलाश अभियान शुरू कर दिया और गत मंगलवार को विमान का मलबा लिपो क्षेत्र के उत्तर में करीब 12,000 फुट की ऊंचाई पर देखा गया।

नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना ने मंगलवार को कहा कि आठ दिन पहले अरुणाचल प्रदेश में लापता हुए विमान एएन 32 का मलबा तलाशी दल ने देखा है। असम को जोरहाट से उड़ान भरने के कुछ वक्त बाद ही यह विमान गायब हो गया था। इसमें कुल 13 लोग सवार थे। रूसी मूल के एएन-32 विमान का संपर्क असम से जोरहाट से अरुणाचल प्रदेश के मेचुका एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड के लिए उड़ान भरने के बाद तीन जून की दोपहर को टूट गया था। विमान के हिस्से, जो लापता हुए एएन-32 के माने जा रहे हैं, विमान के उड़ान मार्ग से 15-20 किलोमीटर उत्तर में अरुणाचल प्रदेश में मिले हैं। तीन जून को लापता हुए इस विमान को तलाशने के अभियान में भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर भी शामिल थे।

वायुसेना का विमान एएक-32 3 जून को उस वक्त अचानक लापता हो गया जब जोरहाट हवाई अड्डे से उड़ान भरी थी। इसका मलबा अरूणाचल प्रदेश के लिपो में मिला है। इस विमान को ढूंढ़ने में लगातार वायुसेना कर्मी लगे हुए थे। हालांकि, अभी इसे वैरिफाई किया जा रहा है। रूस निर्मित विमान ने अरुणाचल प्रदेश के शि-योमि जिले के मेचुका एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड के लिए असम के जोरहाट से उड़ान भरी थी।

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