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नई दिल्ली/ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश के तिरप जिले में उग्रवादियों द्वारा ‌विधायक तिरोंग अबो समेत 11 लोगों की हत्या पर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इस जघन्य अपराध के लिए जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। गृह मंत्री ने ट्वीट कर कहा कि यह घटना पूर्वोत्तर में शांति भंग करने का ‘क्रूर’ प्रयास है। उन्होंने कहा, अरुणाचल प्रदेश के विधायक तिरोंग अबो जी, उनके परिवार तथा अन्य की हत्या से हैरान और दुखी हूं।

घटना पर शोक जताते हुए मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा कि हमलावरों को मार गिराया जाएगा। उन्होंने कहा, हमलावरों को मार गिराने के लिए कार्रवाई जल्द शुरू की जाएगी। घटना की निंदा करते हुए मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड पी संगमा ने इस मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के हस्तक्षेप की मांग की है।

गुवाहाटी: अरुणाचल प्रदेश के तिराप जिले में उग्रवादियों ने नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) विधायक तिरोंग अबो सहित 11 लोगों की हत्या कर दी। तिरोंग अबो मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा की पार्टी के विधायक थे। घटना में विधायक तिरोंग अबो के बेटे की भी मौत हो गई। एनएससीएन उग्रवादियों ने घात लगाकर घटना को अंजाम दिया। बताया जा रहा है कि 2 की हालत गंभीर है। मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराद संगमा ने घटना पर दुख जताया है और प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से हमले के लिए जिम्मेदार समूह के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा।

उन्होंने ट्वीट किया, "एनपीपी अपने नेता और विधायक तिरोंग अबोह (अरुणाचल प्रदेश) और उनके परिवार की मौत की खबर सुनकर स्तब्ध और शोक में है। हम इस कायरतापूर्ण हमले की कड़ी निंदा करते हैं और गृह मंत्री व पीएमओ से अपील करते हैं कि वे हमले में शामिल समूह के खिलाफ कार्रवाई करें।" पुलिस सूत्रों ने बताया कि उग्रवादियों ने तिरोंग अबो को पहले भी जान से मारने की धमकी दी थी। अबो एनपीपी से विधानसभा चुनाव लड़ रहे थे। इससे पहले वह कांग्रेस से विधायक चुने गए थे। पुलिस के अनुसार विधायक तिरोंग अबो तीन गाड़ियों के काफिले के साथ जा रहे थे। इनमें से एक कार उनका बेटा चला रहा था, जो काफिले की पहली गाड़ी थी।

इटानगर: अरुणाचल प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को उस वक्त जोर का झटका लगा, जब दो मंत्रियों और 12 विधायकों सहित कुल 15 नेताओं ने मंगलवार को पार्टी छोड़कर नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) में शामिल होने का एलान कर दिया। राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा द्वारा पार्टी के राज्य महासचिव जारपुम गामलिन, गृहमंत्री कुमार वाई, पर्यटन मंत्री जारकर गामलिन और कई विधायकों को टिकट नहीं देने के बाद बड़े पैमाने पर पार्टी छोड़ने का यह कदम सामने आया है।

राज्य की 60 विधानसभा सीटों में से 54 के लिए प्रत्याशियों के नामों पर भाजपा के संसदीय बोर्ड ने रविवार को मुहर लगाई। राज्य में 11 अप्रैल को लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव भी हो रहे हैं। सोमवार को जारपुम गामलिन ने भाजपा की अरुणाचल इकाई के अध्यक्ष तापिर गाओ को अपना इस्तीफा भेजा। वह सोमवार सुबह से ही गुवाहाटी में हैं, जहां मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने उनसे मुलाकात की। एनपीपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “जारपुम, जारकर, कुमार वाई और भाजपा के 12 मौजूदा विधायकों ने एनपीपी महासचिव थामस संगमा से मंगलवार को मुलाकात की और एनपीपी में शामिल होने का फैसला किया।

नई दिल्ली: राज्य सरकार द्वारा छह गैर-अरुणाचल प्रदेश अनुसूचित जनजाति समुदायों को स्थायी निवास प्रमाणपत्र (पीआरसी) देने के कदम पर भड़की हिंसा के तीसरे दिन सोमवार को भी कर्फ्यू जारी है। इटानगर कैपिटल कॉम्प्लेक्स के डिप्टी कमिश्नर प्रिंस धवन ने आईएएनएस को बताया, "हमने कर्फ्यू को बुधवार की सुबह नौ बजे तक बढ़ा दिया है, ताकि मौजूदा स्थिति को शांत किया जा सके।" उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि स्थिति जल्द ही सामान्य हो जाएगी। वहीं, नाहरलागुन में गोली लगने से एक व्यक्ति की मौत हो गई।

विपक्षी नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी), पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (पीपीए) और कांग्रेस ने सर्वदलीय बैठक में शामिल न होने का फैसला किया है। एनपीपी से विधायक मुतुचू मीठी ने मीडिया को बताया, "सर्वदलीय बैठक में भाग लेने का क्या मतलब है, जब मुख्यमंत्री (पेमा खांडू) ने नामसई और चांगलांग जिलों में छह गैर-अरुणाचल प्रदेश अनुसूचित जनजाति समुदायों को पीआरसी देने के खिलाफ हमारी आवाज सुनने से इनकार कर दिया था।" राज्य कांग्रेस प्रमुख संजय टेकम ने आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में अस्थिर स्थिति के बावजूद खांडू 'तुच्छ राजनीति करने में लगे हैं।'

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