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कोलकाता: सहनशीलता को वक्त की जरूरत बताते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज (रविवार) कहा कि कोई भी धर्म असहनशील बनना नहीं सिखाता और सभी का सम्मान करने के संदेश के साथ हिंदू धर्म एक ‘‘सार्वभौम धर्म’’ के तौर पर विकसित हुआ है । ममता ने कहा, ‘‘हमें बड़ी सोच वाला होना चाहिए । किसी धर्म ने असहनशील बनना नहीं सिखाया है । हिंदू धर्म अपनी व्यापकता एवं सभी धर्मों के लोगों का सम्मान करने के संदेश के साथ एक सार्वभौम धर्म है ।’’ मुख्यमंत्री ने ‘भारत सेवाश्रम संघ’ के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘भारत की संस्कृति जाति, धर्म एवं वर्ग से परे जाकर विविधता में एकता का संदेश देती है ।’’

कोलकाता: एक स्थानीय अदालत ने कामदुनी गैंगरेप और हत्या मामले में शनिवार को छह दोषियों को सजा सुनाई। इनमें से तीन को फांसी, जबकि अन्य तीन को उम्रकैद की सजा दी गई है। गौरतलब है कि कामदुनी में 21 वर्ष की एक कॉलेज छात्रा के साथ जून, 2013 में दरिंदगी से बलात्कार के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अदालत ने पहले ही दो आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया था। 28 जनवरी को अतिरिक्त नगर और सत्र न्यायाधीश संचिता कार ने खचाखच भरी अदालत में सैफुल अली, अंसार अली और अमीनुल अली को सामूहिक बलात्कार और हत्या का दोषी ठहराया था। तीनों को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 डी (सामूहिक बलात्कार), 302 (हत्या) और 120 बी (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी ठहराया गया।

कोलकाता: एक स्थानीय अदालत ने कामदुनी गैंगरेप और हत्या मामले में गुरुवार को छह व्यक्तियों को दोषी ठहराया। इस मामले में 21 वर्ष की एक कॉलेज छात्रा के साथ जून 2013 में दरिंदगी से बलात्कार करने के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। मामले में दो अन्य आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया। अतिरिक्त नगर और सत्र न्यायाधीश संचिता कार ने खचाखच भरी अदालत में सैफुल अली, अंसार अली और अमीनुल अली को सामूहिक बलात्कार और हत्या का दोषी ठहराया। तीनों को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 डी (सामूहिक बलात्कार), 302 (हत्या) और 120 बी (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी ठहराया गया। न्यायाधीश ने इमानुल इस्लाम, अमीनुल इस्लाम और भोला नास्कर को धारा 376 (डी) (सामूहिक बलात्कार), 120 बी (आपराधिक साजिश) और 201 (साक्ष्यों को मिटाना) के तहत दोषी पाया।

कोलकाता: जाने-माने गीतकार एवं पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने कहा है कि कुछ हिंदू समूह अब मुस्लिम कट्टरपंथियों की तरह बर्ताव कर रहे हैं और यदि इस प्रकार के तत्वों को छोड़ दिया जाए तो भारतीय समाज हमेशा सहिष्णु रहा है। अख्तर ने मंगलवार रात यहां एक साहित्य समारोह में कहा, ‘मैंने 1975 में मंदिर में एक हास्य दृश्य दिखाया था। मैं आज ऐसा नहीं करूंगा लेकिन 1975 में भी मैं मस्जिद में ऐसा दृश्य नहीं दिखाता क्योंकि वहां असहिष्णुता थी। अब दूसरा पक्ष उसकी तरह व्यवहार कर रहा है।’ उन्होंने असहिष्णुता पर एक परिचर्चा में कहा, ‘अब वे इस जमात में शामिल हो रहे हैं, यह त्रासदीपूर्ण है। हिंदू मत कहिए। यह गलत नुमांइदगी है। ये कुछ हिंदू समूह हैं।’

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