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गुवाहाटी: असम के दीमा हसाओ जिले के उमरंगसो क्षेत्र में कल एक कोयला खदान में फंसे 9 लोगों को बचाने के लिए भारतीय सेना, असम राइफल्स, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ की टीमें और अन्य एजेंसियां ​​बचाव अभियान में लगी हुई हैं। भारतीय सेना ने असम के दीमा हसाओ जिले के उमरांगशु इलाके में फंसे मजदूरों को बचाने के लिए एक रिलीफ टास्क फोर्स की तैनाती की है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने फंसे हुए मजदूरों को बचाने के लिए सेना से सहायता मांगी।

एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने कहा, "भारतीय सेना ने असम के दीमा हसाओ जिले के सुदूर औद्योगिक शहर उमरंगशु में फंसे खनिकों को बचाने के लिए एक राहत कार्य बल तैनात किया है। टास्क फोर्स गोताखोरों, सैपर्स और अन्य आवश्यक चीजों से लैस है।

अधिकारी ने कहा, "राहत टास्क फोर्स में गोताखोरों, सैपर्स और अन्य संबंधित कर्मियों जैसे विशेषज्ञ शामिल हैं, जिनके पास आवश्यक उपकरण हैं।

बराक घाटी (असम): बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों को लेकर भारत में भी कई जगहों पर लोग विरोध जता रहे हैं। इस बीच असम की बराक घाटी के होटलों ने यह घोषणा की है कि जब तक बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों समुदायों के लोगों पर हमले बंद नहीं हो जाते, तब तक वे किसी भी बांग्लादेशी नागरिक को अपनी सेवाएं मुहैया नहीं कराएंगे। बराक घाटी में कछार, श्रीभूमि (पूर्व में करीमगंज) और हैलाकांडी के तीन जिले शामिल हैं और यह घाटी बांग्लादेश के सिलहट क्षेत्र के साथ 129 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करती है।

बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के विरोध में फैसला

बराक घाटी होटल और रेस्तरां एसोसिएशन के अध्यक्ष बाबुल राय ने शुक्रवार (6 दिसंबर 2024) को संवाददाताओं से कहा, "बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की स्थिति चिंताजनक है। हम इसे किसी भी तरह से स्वीकार नहीं कर सकते, इसलिए हमने फैसला किया है कि जब तक स्थिति में सुधार नहीं होता और हिंदुओं पर अत्याचार बंद नहीं हो जाते, तब तक हम पड़ोसी मुल्क के किसी भी नागरिक को अपने यहां नहीं रखेंगे।"

नई दिल्ली: केंद्र ने सोमवार को असम को भारत से अलग करने के उद्देश्य से काम करना जारी रखने और जबरन वसूली और हिंसा के लिए अन्य उग्रवादी समूहों के साथ संबंध बनाए रखने के लिए यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) पर प्रतिबंध पांच साल के लिए बढ़ा दिया।

'उल्फा ने असम को भारत से अलग करने की घोषणा की'

यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) को पहली बार 1990 में प्रतिबंधित संगठन घोषित किया गया था और तब से प्रतिबंध को समय-समय पर बढ़ाया जाता रहा है। एक अधिसूचना में, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि उल्फा, अपने सभी गुटों, शाखाओं और अग्रणी संगठनों के साथ, ऐसी गतिविधियों में शामिल रहा है जो भारत की संप्रभुता और अखंडता के लिए हानिकारक हैं। इसमें कहा गया है कि उल्फा ने असम को भारत से अलग करने के अपने उद्देश्य की घोषणा की है, अपने संगठन के लिए धन की धमकी और जबरन वसूली जारी रखी है, और जबरन वसूली और हिंसा के लिए अन्य उग्रवादी समूहों के साथ संबंध बनाए रखा है।

गुवाहटी: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने प्रतिबंधित उल्फा (आई) के प्रमुख परेश बरुआ से शांति की अपील की। सीएम ने कहा कि राज्य आने वाले 10 सालों में शक्तिशाली राज्य बनने की ओर अग्रसर है। पहले आंदोलन, बाढ़ और उग्रवाद की खातिर असम जाना जाता था। मगर अब देश के सबसे तेजी से बढ़ते और निवेश के अनुकूल राज्यों में इसकी गिनती होती है।

सीएम सरमा ने कहा कि 15 अगस्त को पूरे राज्य में बम लगाना गहरी चिंता का विषय है। ये प्रदेश में चल रहे विकास और प्रगति को प्रभावित कर सकतें हैं। मगर हमें यकीन है अगर राज्य में शांति बनी रही और युवाओं में सहयोग और उत्साह रहा तो अगले 10 वर्षों में असम एक शक्तिशाली राज्य बन जाएगा। उन्होंने उल्फा (आई) प्रमुख से अपील की है कि वह ऐसी किसी गतिविधि में शामिल न हों जिससे युवाओं का भविष्य खतरे में पड़े।

प्रतिबंधित उल्फा (आई) ने दावा किया था कि उसने स्वतंत्रता दिवस पर असम में सिलसिलेवार विस्फोट करने की खातिर 24 जगहों पर बम लगाए थे। हालांकि पुलिस को आठ स्थानों से बम मिले थे।

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