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लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि केन्द्रीय वित्तमंत्री के बजट में गरीबों, महिलाओं, किसानों, नौजवानों और मध्यम वर्ग के लोगों को राहत के नाम पर कुछ मिला नहीं, कर्ज और राष्ट्रीय सम्पत्ति बेचकर सत्ता सुख भोगने का जुगाड़ करने की साजिश को अवश्य परवान चढ़ाया गया है। यह बजट दिशाहीन और निराशाजनक है। डबल इंजन की यूपी सरकार को भी एक तरह से झटका दिया गया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या इस बजट से 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बन सकेगी?

पूर्व मुख्यमंत्री भाजपा सरकार ने इस बजट के माध्यम से कई राज्यों में होने वाले आगामी चुनावों के लिए थोथे वादों का पिटारा खोला है और कारपोरेट घरानों को देश-प्रदेश का भाग्य नियंता बनाया गया है। रेल, रोड, पुल, बीमा, बंदरगाह, एयरपोर्ट और बैंक तक को बेचने की तैयारी है। 100 सैनिक स्कूल खुलेंगे उनमें भी एनजीओ का सहयोग लेने की बात है। प्रच्छन्नरूप से आरएसएस को इसमें भागीदार बनाने का यह षडयंत्र है।

लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा सरकार किसानों के दुःख दर्द का एहसास अभी भी नहीं कर रही है। उसे झूठे भुलावों में फंसाये रखना चाहती है। किसानों की राय के बिना थोपे गए कृषि कानूनों पर अभी भी भाजपा सरकार हठधर्मी दिख रही है, जबकि किसानों के पक्ष में उमड़ा जनभावना का अभूतपूर्व सैलाब दर्शाता हैं, उनसे आम जनता कितना दुःखी है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, भाजपा की प्राथमिकता में किसान और खेती नहीं, उद्योगपति और बड़े पूंजीघराने रहे हैं। किसानों को बदनाम करने के प्रपंचों से किसान इसीलिए बहुत आहत हैं। भाजपा ने नोटबंदी, जीएसटी, श्रमकानून और कृषि कानून लाकर खरबपतियों को ही फायदा पहुंचाने वाले नियम बनाए हैं। आम जनता को तो भाजपा ने बस सताया ही है।

उन्होंने कहा, किसान वैसे भी भाजपा सरकार के कार्यकाल में चौतरफा मार का शिकार है। खेतों में बुवाई कर रहे मक्का किसानों पर मंहगाई की मार है। मक्का बीज के दाम 470 रूपये तक बढ़ गए है। इससे मक्का की बुवाई का रकबा घट सकता है।

लखनऊ: दिल्ली-गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों के प्रदर्शन स्थल से करीब 150 किलोमीटर दूर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले की पुलिस ने कहा है कि वो जिले के किसानों को बिजनौर से बाहर जाने से रोकेगी। पुलिस अधिकारियों ने किसानों को सख्त चेतावनी दी है कि अगर कोई किसान नेता राकेश टिकैत के नेतृत्व में गाजीपुर में होने वाले विरोध में शामिल होने के लिए बिजनौर से बाहर जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

बिजनौर जिले की सीमा पर पत्रकारों द्वारा शूट किए गए विजुअल्स में साफ दिख रहा है कि  पुलिस ने वहां बैरिकेड्स लगा रखे हैं और सड़क पर आने-जानेवाली गाड़ियों का जांच पुलिस के जवान कर रहे हैं। बिजनौर के पुलिस प्रमुख डॉ. धर्मवीर सिंह ने मीडिया को दिए बयान में कहा, "गाजीपुर-दिल्ली बॉर्डर स्थित विरोध स्थल पर धारा 144 और कोविड प्रोटोकॉल लागू हैं, वहां धरना स्थल को 'गैरकानूनी' घोषित किया जा चुका है। ऐसे में अगर कोई किसान उस स्थल की ओर ट्रैक्टर, चार पहिया या दो पहिया वाहन से जाता है, तो हम उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे।

बागपत: दिल्ली की घटना के बाद बागपत में पुलिस प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 40 दिन से चल रहे धरने को जबरन खत्म करा दिया। आरोप है कि पुलिस कर्मियों ने दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर एक साइड पर बैठे सैकड़ों किसानों से मौके से खदेड़ते हुए टैंट तक उखाड़ फेंक दिए और लाठियां भी फटकारी। मौके पर तनाव को देखते हुए पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है। बड़ौत में कृषि कानूनों के विरोध में करीब 40 दिन पूर्व खाप चौधरी सुरेन्द्र सिंह के नेतृत्व में धरने की शुरुआत हुई थी। बाद में सुरेन्द्र सिंह धरने से अलग-थलग हो गए थे।

सुरेन्द्र सिंह के हटने के बाद दूसरे खापों के चौधरियों ने बेमियादी धरने का नेतृत्व संभाला। धीरे-धीरे कई किसान संगठनों के साथ खाप चौधरी सुरेन्द्र सिंह दुबारा से धरनास्थल पर लौट आए। गत दिवस गणतंत्र दिवस पर बड़ौत धरनास्थल से सैकड़ों किसान ट्रैक्टर रैली में गए थे। दिल्ली की घटना के बाद बुधवार दोपहर तक अधिकांश किसान दिल्ली से अपने-अपने गांव और बेमियादी धरनास्थल पर लौट आए थे।

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