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नई दिल्ली: जेएनयू छात्रसंघ ने कहा है कि 207 फुट ऊंचा झंडा सिर्फ विश्वविद्यालयों के परिसर में नहीं, बल्कि नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय के ऊपर भी फहराया जाना चाहिए। जेएनएसयू की ओर से बयान जारी कर आरएसएस मुख्यालय पर तिरंगा फहराने की मांग उस वक्त की गई जब सभी 46 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की मानव संसाधन विकास मंत्री स्मति ईरानी के साथ बैठक में 207 फुट ऊंचा तिरंगा फहराए जाने को लेकर सहमति बनी। छात्र संघ की उपाध्यक्ष शहला राशिद शोरा ने कहा, 'हैरानी की बात है कि जेएनयू को कैसे राष्ट्र विरोधी बताया जा रहा है, जबकि यहां प्रशासनिक ब्लॉक में दशकों से झंडा है। परंतु राष्ट्रवाद सिर्फ विश्वविद्यालयों में नहीं चाहिए, बल्कि आरएसएस मुख्यालय से भगवा झंडा हटाकर तिरंगाए फहराए जाने की जरूरत है।'
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नई दिल्ली: केंद्रीय श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से ईएसआईसी स्वास्थ्य योजना से संबद्ध 1127.87 करोड़ रुपये बकाये का भुगतान करने को कहा है। श्रम मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) लाभार्थियों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराती है। चूंकि स्वास्थ्य राज्य का विषय है, अत: यह सुविधा संबद्ध राज्य सरकारों द्वारा उपलब्ध कराई जाती है। इसमें कहा गया है, 'हालांकि दिल्ली में ईएसआई लाभार्थियों के लिये स्वास्थ्य मामलों का प्रशासन ईएसआईसी ने दिल्ली प्रशासन से 1 अप्रैल 1962 को अपने जिम्मे ले लिया था और उस समय हुए एमओयू के तहत यह सहमति बनी थी कि दिल्ली सरकार स्वास्थ्य सुविधा पर कुल खर्च का आठवां हिस्सा वहन करेगी।'
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नई दिल्ली: सैकड़ों की संख्या में वकीलों ने शुक्रवार को देश की राजधानी की सड़कों पर मार्च किया। इसका आह्वान वकील विक्रम सिंह चौहान ने किया था। गौरतब है कि जेएनयू मामले में द्रेशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार छात्र नेता कन्हैया कुमार के समर्थकों और पत्रकारों पर इस सप्ताह हुए हमले में मामले में विक्रम और उसके कुछ वकील साथियों का नाम सुर्खियों में रहा है। चौहान ने फेसबुक पर वकीलों से उस शांति मार्च (पीस मार्च) से जुड़ने की अपील की थी जो उसके अनुसार, वकीलों की छवि खराब करने के लिए मीडिया के एक वर्ग की ओर से चलाया जा रहा है। चौहान ने गुरुवार को दिल्ली पुलिस के उस आदेश की अनदेखी की थी जिसमें उसे कन्हैया के मामले की पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई के दौरान हुई हिंसा के बारे में पूछताछ के लिए तलब किया गया था।जेएनयू परिसर में हुए एक कार्यक्रम में देश विरोधी कमेंट के मामले में कन्हैया पर देशद्रोह का आरोप लगाया गया है।
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नई दिल्ली: दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत परिसर में बुधवार को जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार पर हमले में उनके शरीर पर बाहरी चोटें आई थीं। देशद्रोह के आरोप में तिहाड़ जेल में बंद कन्हैया की मेडिकल जांच की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। इस बीच, दिल्ली पुलिस के आयुक्त बीएस बस्सी ने इन आरोपों को नकारा है। एक पुलिस सूत्र ने बताया कि मेडिकल रिपोर्ट में कहा गया है कि कन्हैया के बाएं पांव और नाक पर कई जगह चोटें थीं। इसके अलावा उनके बाएं अंगूठे में भी दर्द था। इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए पुलिस आयुक्त बस्सी ने कहा, ‘मेरे अधिकारियों ने मुझसे कहा है कि (कन्हैया पर हमले के) आरोप गलत हैं। इस मामले पर इससे ज्यादा बोलना ठीक नहीं रहेगा क्योंकि मामला उच्चतम न्यायालय में लंबित है।’ बुधवार को पुलिस हिरासत खत्म होने के बाद कन्हैया को अदालत में पेश किया गया था जहां कुछ वकीलों ने उन पर और पत्रकारों सहित अन्य लोगों पर हमला कर दिया था। इस घटना के बाद पुलिस की निष्क्रियता को लेकर पुलिस आयुक्त की खूब आलोचना हुई थी।
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