ताज़ा खबरें
बीड मस्जिद विस्फोट मामले में गिरफ्तार दोनों आरोपियों पर लगा यूएपीए
वक्फ बिल को मिली राष्ट्रपति की मंजूरी, मुस्लिम संगठन कर रहे हैं विरोध
ट्रंप का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण,भारत के हित सर्वोपरि रखे सरकार:आनंद शर्मा
बीजेपी सरकार अर्थव्यवस्था के इस दोहरे दुष्चक्र के लिए दोषी: अखिलेश

वाशिंगटन: डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर से व्यापारिक नीतियों को लेकर सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने भारत, इजरायल और वियतनाम जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक भागीदारों के साथ नई टैरिफ नीति के तहत बातचीत शुरू कर दी है। बीते 2 अप्रैल 2025 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत, इजरायल और वियतनाम पर नए आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने की घोषणा की, जो 9 अप्रैल से प्रभावी होंगे।

डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के मुताबिक भारत पर 26%, वियतनाम पर 46% और इजरायल पर 17% टैरिफ लगाने की घोषणा की गई है। ट्रंप का तर्क है कि यह नीति रेसिप्रोकाल ट्रेड के सिद्धांत पर आधारित है, जहां जितना अमेरिका किसी देश से आयात करता है, उसके बराबर या उससे कम निर्यात होना चाहिए।

भारत समेत तीन देशों से बात कर रहे हैं ट्रंप

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार भारत, इजरायल और वियतनाम देशों के प्रतिनिधियों के साथ अमेरिका सक्रिय व्यापार वार्ता कर रहा है। ट्रंप चाहते हैं कि समयसीमा से पहले कोई समझौता हो जाए ताकि टैरिफ टल सके।

ट्रंप के ट्रुथ सोशल पोस्ट के मुताबिक, वियतनाम की कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव ने कहा है कि अगर अमेरिका से समझौता होता है तो वे अपने टैरिफ को शून्य तक कम करने को तैयार हैं। यह संकेत है कि वियतनाम सौदे को लेकर लचीला रुख अपना सकता है।

टैरिफ पर भारत की स्थिति

भारत के लिए यह टैरिफ विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण है क्योंकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। 26 फीसदी इम्पोर्ट टैक्स से भारतीय उद्योगों पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है, खासकर टेक्सटाइल, आईटी और फार्मा जैसे क्षेत्रों में। इजरायल की बात करें तो इजरायली अधिकारियों ने पहले ही चिंता जताई है कि अमेरिकी टैरिफ इजरायली कंपनियों की प्रतिस्पर्धा क्षमता को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे कुछ कंपनियां अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शुरू करने की सोच सकती हैं।

ट्रंप की 'डील मेकिंग' रणनीति

डोनाल्ड ट्रंप हमेशा से डील मेकर की छवि को आगे रखते आए हैं। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि हर देश हमें कॉल कर रहा है। यही हमारी खूबसूरती है, हम खुद को ड्राइवर की सीट पर रखते हैं। उनका मानना है कि टैरिफ एक दबाव का हथियार है, जिससे देशों को बातचीत की मेज तक लाया जा सकता है।

टैरिफ या टेक्नोलॉजी पर दिया टिकटोक उदाहरण

डोनाल्ड ट्रंप ने टिकटोक का उदाहरण देते हुए कहा कि चीन जैसे देश भी टैरिफ के बदले समझौता करने को तैयार हो सकते हैं। यह रणनीति सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और तकनीकी कंपनियों तक भी इसका दायरा है। इसके अलावा ट्रंप के बेटे एरिक ट्रंप ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट किया कि जो देश सबसे पहले बातचीत करेगा वो जीतेगा, जो आखिरी में करेगा, वह हारेगा, यह बयान स्पष्ट करता है कि अमेरिका की ओर से एक साफ संदेश है: जल्दी समझौता करो या नुकसान झेलो।

चीन और कनाडा की प्रतिक्रिया

जहां कुछ देश बातचीत की तैयारी में हैं, वहीं चीन और कनाडा ने साफ कह दिया है कि वे अमेरिकी टैरिफ पर जवाबी हमला करेंगे। इससे संभावित व्यापार युद्ध का माहौल बन सकता है।

  • देश
  • प्रदेश
  • आलेख