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काहिरा: मिस्र ने गाजा से फलस्तीनी आबादी को हटाने और क्षेत्र पर नियंत्रण करने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्ताव के खिलाफ अरब देशों का एक आपात सम्मेलन स्थगित कर दिया है। मिस्र के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि सम्मेलन अब चार मार्च को होगा, जो पहले 27 फरवरी को होना था। ट्रंप के प्रस्ताव से पश्चिम एशिया क्षेत्र में हलचल मच गई है।

ट्रंप के सुझाव से मिस्र नाराज

फलस्तीनियों और अरब देशों ने गाजा की आबादी को विस्थापित करने के किसी भी कदम को खारिज कर दिया है, जबकि इजराइल ने इसका स्वागत किया है। मानवाधिकार समूहों का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करके लोगों को विस्थापित होने पर मजबूर करने के समान होगा। ट्रंप का सुझाव है कि फलस्तीनियों को मिस्र और जॉर्डन में बसाया जा सकता है। हालांकि, दोनों देशों ने इस विचार को सिरे से खारिज कर दिया है। मिस्र ने कहा है कि इस प्रस्ताव से इजराइल के साथ लगभग 50 वर्ष पुराना उसका समझौता खतरे में पड़ जाएगा।

वाशिंगटन: अमेरिका और रूस के प्रतिनिधिमंडल ने रूस-यूक्रेन युद्ध का समाधान निकालने के लिए यूक्रेन की मौजूदगी के बिना मंगलवार को रियाद में एक बैठक की। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिकी-रूस वार्ता में शामिल पक्षों ने यूक्रेन में शांति स्थापित करने, आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक उच्च स्तरीय टीम बनाने पर सहमति जताई है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भी इस दौरान मौजूद रहे।

रुबियो ने बताया कि दूतावास में कर्मचारियों की संख्या बहाल करने पर भी सहमति बनी है। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों में की गई कार्रवाइयों ने दोनों देशों के राजनयिक मिशनों की संचालन क्षमता को कम कर दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा, "हमें ऐसे जीवंत राजनयिक मिशनों की जरुरत होगी जो इस प्रक्रिया को जारी रखने के लिए कार्य करने में सक्षम हों।" रूबियो ने कहा कि केवल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही 'युद्ध (यूक्रेन में) को खत्म करने में सक्षम हैं।

क्रेमलिन के विदेश मामलों के सलाहकार यूरी उशाकोव ने कहा कि रियाद में अमेरिका-रूस वार्ता 'सकारात्मक' प्रगति के साथ संपन्न हुई।

वाशिंगटन: भारत और अमेरिका का रिश्ता राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में कैसा रहेगा? इस सवाल पर सबकी नजरें टिकी हैं। ताजा घटनाक्रम में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक सवाल के जवाब में कहा, वे भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बहुत सम्मान करते हैं। साथ ही ट्रंप ने इस सवाल का भी जवाब दिया कि क्या अमेरिका ने भारतीय मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए 21 मिलियन डॉलर की फंडिंग रोकने का फैसला लिया। ट्रंप ने इस पर हैरानी जताते हुए कहा, हम भारत को 21 मिलियन डॉलर क्यों देंगे? उनके पास बहुत ज्यादा पैसा है। वे अमेरिका पर दुनिया में सबसे ज्यादा कर लगाने वाले देशों में से एक हैं।

अमेरिकी उद्योग के लिए भारत में संभावनाओं पर अधिक टैरिफ का जिक्र

राष्ट्रपति ट्रंप ने मतदाताओं को प्रोत्साहित करने के लिए पैसों के इस्तेमाल पर कहा कि उन्हें लगता है कि अमेरिकी चुनाव में 500 मिलियन डॉलर का इस्तेमाल किया गया। उन्हें लगता है कि यहां के मतदाताओं का उत्साह इसका प्रमाण है और भारत में पैसे भेजने की बात हैरान करने वाली है।

नई दिल्ली: कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी ने मार्च 2015 में आखिरी बार भारत का दौरा किया था। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी 2024 में अपना दूसरा कतर का दौरा किया, तो उन्होंने अमीर को भारत का राजकीय दौरा करने के लिए आमंत्रित किया था। कतर के अमीर के साथ एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आया है, जिसमें मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और व्यापारिक नेता शामिल हैं। आने वाले गणमान्य व्यक्तियों में कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री भी शामिल हैं। विदेश मंत्रालय (एमईए) के सचिव (कांसुलर, पासपोर्ट और वीजा) अरुण कुमार चटर्जी ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि आज सुबह राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी ने अमीर का औपचारिक स्वागत किया। राष्ट्रपति (मुर्मू) आज शाम को भी अमीर और उनके प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करेंगी और उनके सम्मान में एक रात्रिभोज का आयोजन भी करेंगी। पीएम मोदी ने अमीर के साथ हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय वार्ता की। इस दौरान भारत-कतर के बीच ऐतिहासिक व्यापार, लोगों के आपसी संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की।

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