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नई दिल्ली: उत्तराखंड के जोशीमठ में जमीन धंसने की घटना को देखते हुए प्रशासन हरकत में है। सैटेलाइट सर्वेक्षण के बाद जोशीमठ से 600 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करवाया गया है। गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया को बताया कि हमारी जानकारी के अनुसार 600 घरों को खाली करा लिया गया है और लगभग 4,000 लोगों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया है। अधिकारी ने कहा कि सेना और आईटीबीपी प्रतिष्ठानों के निचले हिस्सों में भी दरारें देखी गईं, हालात को देखते हुए पर्याप्त सुरक्षा उपाय अपनाए जा रहे हैं।
चमोली जिले के डीएम हिमांशु खुराना ने बताया कि हालात की गंभीरता को देखते हुए इस धार्मिक शहर की सभी खतरनाक इमारतों पर लाल रंग से 'X' का चिन्ह अंकित किया जा रहा है। जिला प्रशासन की ओर से इन इमारतों को रहने के लिहाज से असुरक्षित घोषित किए जाने के बाद इसके निवासियों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जा रहा है। चमोली के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट हिमांशु खुराना ने सोमवार को मीडिया से कहा, "आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत, हमने उन असुरक्षित क्षेत्रों को चिह्नित किया है जो रहने के लिहाज से अनुपयुक्त हैं।
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नई दिल्ली: उत्तराखंड के जोशीमठ में हर बीतते दिन के साथ संकट गहराता जा रहा है। शहर के एक बड़े हिस्से में स्थित कई घरों में अब दरारें बड़ी होती दिख रही हैं। राज्य सरकार ने एहतियातन कई परिवारों को शिफ्ट कर दिया है। मौजूदा स्थिति को लेकर राज्य सरकार ने एक बयान भी जारी किया है। जिसमें कहा गया है कि हम हर स्थिति से निपटने को तैयार हैं। मामले की गंभीरता को समझते हुए बचाव दल को पहले से ही स्टैंडबाय में रखा गया है। साथ ही कहा गया है कि इस संकट को लेकर केंद्र सरकार भी विशेष योजना पर काम कर रही है।
उधर, राज्य सरकार से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को कहा कि जोशीमठ को एक भूस्खलन-धंसाव क्षेत्र घोषित किया गया है और इस 'धंसता शहर' में क्षतिग्रस्त घरों में रहने वाले 60 से अधिक परिवारों को अस्थायी राहत केंद्रों में ले जाया गया है। कम से कम 90 और परिवारों को निकाला जाना है। गढ़वाल के आयुक्त सुशील कुमार ने कहा कि स्थानीय प्रशासन ने शहर में चार-पांच स्थानों पर राहत केंद्र स्थापित किए हैं। इस बीच, चमोली के डीएम ने नुकसान का आकलन करने के लिए घर-घर जाकर लोगों से राहत केंद्रों में जाने की अपील की।
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देहरादून: उत्तराखंड के जोशीमठ में जमीन के घंसने और कई घरों-इमारतों में दरारें पड़ने के बीच राज्य सरकार स्थिति पर नजर जमाए हुए है। जोशीमठ में भूमि धंसने को लेकर शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें डीजीपी, अपर मुख्य सचिव, अपर सचिव और आपदा अधिकारी मौजूद थे। जोशीमठ से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से गढ़वाल आयुक्त और जिलाधिकारी भी बैठक से जुड़े। इस बीच, उत्तराखंड सरकार ने जोशीमठ के भूमि धसान प्रभावित 600 परिवारों को किराया देने का फैसला लिया है। 4000 रुपए प्रति माह का मानदेय 6 माह तक प्रभावित परिवारों को मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को सचिवालय में जोशीमठ में हो रहे भू-धसाव से संबंधित बैठक में आयुक्त गढ़वाल मण्डल, सचिव आपदा प्रबंधन एवं जिलाधिकारी चमोली से हालात पर ग्राउंड रिपोर्ट लेकर अतिशीघ्र सुरक्षित स्थान पर एक बड़ा अस्थायी पुनर्वास केंद्र बनाने व डेंजर जोन को तत्काल खाली करवाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सेक्टर और जोनल वॉर योजना बनाने एवं अविलंब आपदा कंट्रोल रूम एक्टिवेट करने के लिए निर्देश जारी किए गए हैं।
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नई दिल्ली: उत्तराखंड के हल्द्वानी के बनभूलपुरा में रेलवे की 78 एकड़ जमीन से 4000 परिवारों को बेदखल करने के उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत के इस आदेश के बाद 4000 परिवारों के आशियानों को फिलहाल नहीं उजाड़ा जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस भेजते हुए उत्तराखंड सरकार ओर रेलवे से इस मामले पर जवाब भी मांगा है। कोर्ट ने कहा कि रातों रात आप 50 हजार लोगों को नहीं हटा सकते। यह एक मानवीय मामला है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें कोई व्यावहारिक समाधान ढूंढना होगा। समाधान का यह सही तरीका नहीं है। जमीन की प्रकृति, अधिकारों की प्रकृति, मालिकाना हक की प्रकृति आदि से उत्पन्न होने वाले कई कोण हैं, जिनकी जांच होनी चाहिए। इन्हें हटाने के लिए केवल एक सप्ताह का समय काफी कम है। पहले उनके पुनर्वास पर विचार होना चाहिए। बता दें कि जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस अभय एस. ओक की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी। अब अगली सुनवाई सात फरवरी को होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उत्तराखंड सरकार का स्टैंड क्या है इस मामले में?
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