ताज़ा खबरें
वक्फ विधेयक को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी डीएमके: सीएम स्टालिन
'वक्फ संशोधन बिल सिर्फ साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए': सोनिया गांधी
लोकसभा से पास हुआ वक्फ बिल: पक्ष में 288, विरोध में पड़े 232 वोट

नई दिल्ली: धंसते जोशीमठ मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने दखल देने से साफ इंकार कर दिया है। साथ ही कोर्ट ने इस मामले में उत्तराखंड हाई कोर्ट का रुख करने को कहा। इस मामले पर सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस जे बी पारदीवाला की बेंच सुनवाई की। इस मामले में ज्योतिष्पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। कोर्ट ने कहा कि मामले की हाईकोर्ट सुनवाई कर रहा है। ऐसे में पहले सिद्धांत में हाईकोर्ट को सुनवाई करने देनी चाहिए।

सीजेआई ने याचिकाकर्ता से कहा कि जब हाईकोर्ट सुनवाई कर रहा है तो आप वहां जाकर अपनी बात क्यों नहीं रखते। जो भी याचिकाकर्ता मांग रहे हैं वो हाईकोर्ट सुनवाई कर रहा है, ऐसे में कार्रवाई की ओवरलैप की जरूरत नहीं है। याचिकाकर्ता पुनर्वास और मुआवजे की मांग हाईकोर्ट में रख सकता है। हम उन्हें हाईकोर्ट में चल रहे मामले में अर्जी दाखिल करने की अनुमति देते हैं। याचिका में प्रभावित लोगों के पुनर्वास के साथ उनको आर्थिक मदद मुहैया कराने का भी आदेश देने का आग्रह कोर्ट से किया गया है।

नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (आईएसआरओ) ने एक दिन पहले ही रिपोर्ट दी थी कि उत्तराखंड के जोशीमठ में केवल 12 दिनों में 5.4 सेमी का धंसाव देखा गया है। इसके बाद राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने सरकारी संस्थानों को मीडिया के साथ बातचीत करने और सोशल मीडिया पर डेटा साझा करने से रोक दिया है। एनडीएमए की ओर से कहा गया है कि संगठनों की डेटा की "अपनी व्याख्या" भ्रम पैदा कर रही है।

एनडीएमए ने कहा- लोगों में पैदा हो रहा है भ्रम

एनडीएमए ने अपने पत्र में कहा है कि 12 जनवरी को केंद्रीय गृह मंत्री की अध्‍यक्षता में आयोजित बैठक में इस मुद्दे को लेकर प्रकाश डाला गया था। इसमें कहा गया, "यह देखा गया है कि विभिन्न सरकारी संस्थान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विषय वस्तु से जुड़ा डेटा जारी कर रहे हैं और साथ ही स्थिति की अपनी व्याख्या के साथ मीडिया के साथ बातचीत कर रहे हैं। यह न केवल प्रभावित निवासियों बल्कि देश के नागरिकों के बीच भी भ्रम पैदा कर रहा है।"

नई दिल्ली: उत्तराखंड के जोशीमठ में भू-धंसाव से बुरी तरह प्रभावित होटलों को गिराने की कार्रवाई मंगलवार को नहीं हो पायी। स्थानीय लोगों और होटल मालिकों की तरफ से सरकार की इस कार्रवाई का लगातार विरोध किया जा रहा है। होटल संचालकों की तरफ से मुआवजे की मांग सरकार से की जा रही है। विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने फैसला किया है कि बुलडोजर का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। विध्वंस मैन्युअल रूप से किया जाएगा। जानकारी के अनुसार प्रशासन वन टाइम सेटलमेंट प्लान पर काम कर रही है। सरकार ने मकानों को गिराने के लिए उचित योजना बनाने के लिए सीबीआरआई की एक टीम बुलायी है। अब तक कुल 731 घरों में दरारें आ गई हैं।

गौरतलब है कि राज्य सरकार ने सोमवार को ‘माउंट व्यू' और ‘मालारी इन' होटलों को गिराने का फैसला किया था। जिनमें हाल में बड़ी दरार आ गयीं और दोनों एक-दूसरे की ओर झुक गये हैं। इससे आसपास की इमारतों को खतरा पैदा हो गया है। इलाके में अवरोधक लगा दिये गये हैं और इन होटल तथा आसपास के मकानों में बिजली आपूर्ति रोक दी गयी है, जिससे करीब 500 घर बिजली के अभाव का सामना कर रहे हैं।

नई दिल्ली: उत्तराखंड का मशहूर कस्बा जोशीमठ लगातार धंसता जा रहा है, जिस वजह से यहां के ज्यादातर घर और इमारतों में दरारें आ गई है। ऐसे में अब दरार आ चुकी इन इमारतों और घरों को तोड़ने का फैसला लिया गया है। ताजा जानकारी के मुताबिक अधिकारियों ने कहा है कि उत्तराखंड के धंसते जोशीमठ में जिन इमारतों में दरारें आ गई हैं और बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं, उन्हें आज से ध्वस्त कर दिया जाएगा। जोशीमठ को तीन जोन में बांटा गया है, 'डेंजर', 'बफर' और 'कंप्लीटली सेफ।'

अधिकारियों ने बताया कि जोशीमठ में 600 से अधिक इमारतों में दरारें आ गई हैं। जो सबसे अधिक क्षतिग्रस्त हैं उन्हें ध्वस्त कर दिया जाएगा। जोशीमठ और आसपास के क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एनडीटीवी को बताया कि लगभग 4,000 लोगों को सुरक्षित क्षेत्रों में स्थानांतरित कर दिया गया है। उन्होंने कहा, "ऐसा लगता है कि जोशीमठ का 30 फीसदी हिस्सा प्रभावित है। एक विशेषज्ञ समिति द्वारा एक रिपोर्ट तैयार की जा रही है और इसे प्रधानमंत्री कार्यालय को सौंपा जाएगा।"

  • देश
  • प्रदेश
  • आलेख