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देहरादून: एक तरफ भगवान केदारनाथ की यात्रा में लाखों श्रद्धालु आ रहे हैं तो दूसरी तरफ उसी केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह का एक वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें एक महिला केदारनाथ के शिवलिंग पर नोट उड़ाते दिख रही है। हैरानी की बात ये भी है कि इस दौरान वहां मौजूद पंडित पूजा भी संपन्न करा रहा है और बैकग्राउंड में गाना बज रहा है- क्या कभी अम्बर से सूर्य बिछड़ता है।
पूरे मामल का वीडियो वायरल होने पर हड़कंप मच गया है। जिसके बाद रूद्रप्रयाग पुलिस की ओर से मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अधीक्षक विशाखा अशोक भदाणे के मुताबिक, श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की ओर से मिली तहरीर के आधार पर श्रद्धालुओं की कथित रूप से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वालों के खिलाफ कोतवाली सोनप्रयाग में अलग-अलग धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
दूसरी तरफ बीकेटीसी के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने गर्भगृह में पंडितों की मौजूदगी में हुई इस घटना पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की और अधिकारियों से सफाई भी मांगी।
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देहरादून: उत्तराखंड के उत्तरकाशी में हिंदू संगठनों द्वारा होने वाले महापंचायत के मामले को लेकर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने सरकार को प्रदेश में कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार पर सख़्त टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी हाल में क़ानून व्यवस्था बिगड़नी नहीं चाहिए।
हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य के सभी हिस्सों में कानून व्यवस्था बनाए रखी जाए। अदालत ने मुसलमानों की दुकानों में तोड़फोड़ करने के संदर्भ में कहा कि किसी की भी व्यक्ति की जान या माल का नुकसान न हो।
उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस ने कहा, "हम सोशल मीडिया पर आरोपों और प्रत्यारोपों के साथ भड़कना नहीं चाहेंगे। या टेलीविजन और सोशल मीडिया पर बहस नहीं करेंगे।"
कोर्ट को उत्तराखंड पुलिस ने बताया कि उत्तरकाशी में महापंचायत की इजाज़त नहीं दी गई है। साथ ही इलाके में धारा 144 भी लगाई गई है।
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नई दिल्ली: उत्तराखंड के उत्तरकाशी में कल (15 जून) होने जा रही हिंदू महापंचायत के खिलाफ सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने मना कर दिया है। हिंदू संगठनों ने लव जिहाद और लैंड जिहाद के खिलाफ उत्तरकाशी के पुरोला में यह महापंचायत बुलाई है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से मना करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट में अपनी बात रखनी चाहिए।
याचिकाकर्ता एसोसिएशन फ़ॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स की तरफ से वकील शाहरुख आलम ने मामला सुप्रीम कोर्ट में रखा। उन्होंने जजों से कहा कि एक समुदाय को जगह खाली करने के लिए धमकाया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार को भड़काऊ भाषण पर कार्रवाई का आदेश दिया हुआ है। इसलिए, कार्यक्रम पर रोक लगनी चाहिए।
कानून-व्यवस्था प्रशासन का कमः सुप्रीम कोर्ट
जस्टिस विक्रम नाथ और अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की अवकाशकालीन बेंच सुनवाई को तैयार नहीं हुई। जस्टिस नाथ ने कहा, "कानून-व्यवस्था देखना प्रशासन का काम है।
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हरिद्वार: उत्तराखंड में हरिद्वार के मंदिरों में ड्रेस कोड लागू कर दिया गया है। अब यहां के मंदिरों में वेस्टर्न कपड़े पहन कर जाने पर रोक लग गई है। ऐसे में अब पुरुष, महिलाएं और लड़कियां छोटे या वेस्टर्न कपड़े पहनकर यहां के मंदिरों में दर्शन नहीं कर पाएंगे। इस बात की पुष्टि करने के लिए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और महानिर्वाणी के सचिव महंत रविंद्र पुरी ने की है।
महंत रविंद्र पुरी ने बताया कि भारतीय संस्कृति में अंग प्रदर्शन को अच्छा नहीं माना गया है, जिसके चलते दक्षिण भारत के मंदिरों में पहले से ही ड्रेस कोड यानी शॉर्ट कपड़े पहनकर जाने पर रोक है। इसी धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हरिद्वार के मंदिरों में भी आने वाली बहन, बेटियों, माताओं से अपील की गई है कि मंदिर में मनोरंजन नहीं, आत्म रंजन के लिए आते हैं, इसलिए छोटे कपड़े पहनकर दर्शन करने न आएं। उन्होंने आगे कहा, भारतीय परंपरा में शरीर का 80 प्रतिशत भाग ढका होना चाहिए, जिसके चलते यह अपील की गई है कि मंदिरों में आने वाले युवक और युवतियां 80 प्रतिशत कपड़ों में दर्शन करने आएं और यदि वह शॉर्ट कपड़े पहनकर मंदिर में आएंगे तो उन्हें एंट्री नहीं दी जाएगी।
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