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नई दिल्ली: उत्तराखंड के जोशीमठ में हर बीतते दिन के साथ संकट गहराता जा रहा है। शहर के एक बड़े हिस्से में स्थित कई घरों में अब दरारें बड़ी होती दिख रही हैं। राज्य सरकार ने एहतियातन कई परिवारों को शिफ्ट कर दिया है। मौजूदा स्थिति को लेकर राज्य सरकार ने एक बयान भी जारी किया है। जिसमें कहा गया है कि हम हर स्थिति से निपटने को तैयार हैं। मामले की गंभीरता को समझते हुए बचाव दल को पहले से ही स्टैंडबाय में रखा गया है। साथ ही कहा गया है कि इस संकट को लेकर केंद्र सरकार भी विशेष योजना पर काम कर रही है।

उधर, राज्य सरकार से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को कहा कि जोशीमठ को एक भूस्खलन-धंसाव क्षेत्र घोषित किया गया है और इस 'धंसता शहर' में क्षतिग्रस्त घरों में रहने वाले 60 से अधिक परिवारों को अस्थायी राहत केंद्रों में ले जाया गया है। कम से कम 90 और परिवारों को निकाला जाना है। गढ़वाल के आयुक्त सुशील कुमार ने कहा कि स्थानीय प्रशासन ने शहर में चार-पांच स्थानों पर राहत केंद्र स्थापित किए हैं। इस बीच, चमोली के डीएम ने नुकसान का आकलन करने के लिए घर-घर जाकर लोगों से राहत केंद्रों में जाने की अपील की।

ध्यान हो कि शनिवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी जोशीमठ के प्रभावित इलाकों का दौरा किया था। इस दौरे के बाद धामी ने लौटने के बाद यहां अधिकारियों के साथ बैठक की और राहत कार्यों में तेजी लाने के लिए नियमों में ढील देने को कहा। उन्होंने कहा कि उन्हें जोशीमठ में जल निकासी उपचार और सीवेज सिस्टम से संबंधित कार्य के लिए लंबी प्रक्रियात्मक जटिलताओं में न फंसने और सीधे उनसे मंजूरी लेने के लिए कहा गया था।

मामले की गंभीरता को समझते हुए प्रधान सचिव डॉ. पीके मिश्रा ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में कैबिनेट सचिव और भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्यों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा की। इस समीक्षा बैठक में जोशीमठ के जिला पदाधिकारी भी वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से उपस्थित रहे। उत्तराखंड के वरिष्ठ अधिकारियों को भी वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से समीक्षा में शामिल हुए।

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