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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने 'भड़काऊ' गाने के मामले में कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी के खिलाफ गुजरात पुलिस की ओर से दर्ज की गई एफआईआर को रद्द कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी लोकतंत्र का अभिन्न अंग है। ऐसे ही नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना अदालत का कर्तव्य है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह सुनिश्चित करना भी अदालत का कर्तव्य है कि संविधान और संविधान के आदर्शों का उल्लंघन न हो। कोर्ट ने कहा कि कविता, नाटक, फिल्म, व्यंग्य, कला सहित साहित्य मनुष्य के जीवन को अधिक सार्थक बनाता है। पुलिस को लोगों की बुनियादी अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए।

'सेहतमंद समाज में बोलने की आजादी का सम्मान होना चाहिए'

न्यायमूर्ति अभय एस ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि भले ही बड़ी संख्या में लोग किसी दूसरे के विचारों को पसंद न करते हों, लेकिन विचारों को व्यक्त करने के व्यक्ति के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए और उसकी रक्षा की जानी चाहिए। सेहतमंद समाज में बोलने की आजादी का सम्मान होना चाहिए।

नई दिल्ली: लोकसभा में इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स बिल 2025 पर चर्चा के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने बिल के प्रावधानों पर विस्तार से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि भारत में आने के लिए वैध पासपोर्ट, वैध वीजा अनिवार्य होगा। बिना कागजात के भारत में प्रवेश करने पर कानून सम्मत तरीके से सख्त कार्रवाई की जाएगी। गृह मंत्री ने सख्ती से कहा, जाली दस्तावेजों के लिए कड़ी सजा के प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने कहा कि वीजा की अवधि खत्म होने पर भी देश में रहने वालों को ट्रैक किया जाएगा।

सरकार के पास दस्तावेजों की जांच का पूरा अधिकार है

शाह ने विपक्ष को आड़े हाथों लिया और कहा कि जिस तरह के सवाल पूछे गए हैं, उनसे काफी हैरानी होती है। उन्होंने कहा कि देश की जनता ने भाजपा को वोट दिया। हमने बहुमत की सरकार बनाई है। ऐसे में सरकार के पास विदेशी लोगों की घुसपैठ, भारत आने वाले लोगों के पास वैध कागजात हैं या नहीं, इसकी जांच करने का पूरा अधिकार है।

नई दिल्ली: विपक्षी पार्टियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। इस मुलाकात में विपक्षी नेताओं ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को बोलने नहीं देने का आरोप लगाते हुए अपनी नाराजगी व्यक्त की। लोकसभा में कांग्रेस के उप-नेता गौरव गोगोई ने कहा कि इंडिया गठबंधन, जिसमें कांग्रेस, सपा, टीएमसी, डीएमके, केरल कांग्रेस, राजद, आईयूएमएल, आरएलपी और एमडीएमके के सांसद मौजूद रहे आज शून्य काल के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिले।

गौरव गोगोई ने कहा कि 'हमने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपा, जिसमें कई पार्टियों के नेताओं के हस्ताक्षर हैं। इनमें आरएसपी और शिवेसना यूबीटी भी शामिल हैं। हमने लोकसभा अध्यक्ष के सामने अपनी चिंता जाहिर की कि किस तरह से सत्ताधारी दल नियमों और परंपराओं का उल्लंघन कर रहा है।' कांग्रेस सांसद ने कहा कि 'लोकसभा अध्यक्ष ने नियम संख्या 349 का हवाला दिया, लेकिन उन्होंने किस घटना को लेकर ये हवाला दिया, ये स्पष्ट नहीं है। अब लोकसभा अध्यक्ष के बयान का राजनीतिकरण किया जा रहा है।'

नई दिल्ली: नाबालिग लड़की के साथ रेप की कोशिश से जुड़े एक मामले में आए इलाहाबाद हाई कोर्ट के विवादित फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। जजों ने फैसले को असंवेदनशील कहा। सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए यह सुनवाई शुरू की है। कोर्ट ने मामले से जुड़े पक्षों, यूपी सरकार और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।

17 मार्च को आए इस फैसले में हाई कोर्ट ने कहा था कि पीड़िता को खींच कर पुलिया के नीचे ले जाना, उसके ब्रेस्ट को पकड़ना और पजामे की डोरी को तोड़ना रेप की कोशिश नहीं कहलाएगा। 11 साल की लड़की के साथ हुई इस घटना के बारे में हाई कोर्ट के जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा का निष्कर्ष था कि यह महिला की गरिमा पर आघात का मामला है। इसे रेप या रेप का प्रयास नहीं कह सकते। जस्टिस मिश्रा ने मामले में 2 आरोपियों पर लगी आईपीसी की धारा 376 (बलात्कार), 18 (अपराध की कोशिश) और पॉक्सो एक्ट की धारा हटा दी थी। उन्होंने 354-बी (महिला को निर्वस्त्र करने के मकसद से बलप्रयोग) और पॉक्सो एक्ट की धारा 9 (गंभीर यौन हमला) के तहत मुकदमा चलाने को कहा था।

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