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(जलीस अहसन) दुनिया भर में फैलती जा रही कोरोनावायरस महामारी की दहशत के बीच तबलीग़ी जमात ने भारत में आग में घी डालने का काम किया है। इसकी जहालत भरी एक हरकत से देश भर में दर्जन भर से ज़्यादा कोरोनावायरस के हाट स्पाट पैदा हो गए हैं। जमात के प्रमुख, मौलाना मुहम्मद साद को हालांकि इसका कोई पछतावा या एहसास नहीं है। इस घटना के बाद कहीं छिपे हुए साद ने बड़ी ढीटाई से जारी बयान में कहा, कोई भी आज़ाब आए तो मस्जिदों की तरफ दौड़ो। मस्जिदों में जमा होने से बीमारी फैलेगी, यह बातिल (गलत) ख्याल है और अगर मर भी जाएं, तो इससे बेहतर मरने की जगह कोई हो नहीं सकती।
ऐसी जहालत भरी बात वह उस वक़्त कर रहे हैं जबकि कोरोनावायरस के आज़ाब से बचाने के लिए इस्लाम के दो सबसे बड़े धर्म स्थलों मक्का और मदीना को बंद कर दिया गया है। मक्का में उमरा (तीर्थ यात्रा) बंद करने के साथ ही सउदी सरकार ने दुनिया भर के मुसलमानों से कहा है कि वे इस साल जुलाई को होने वाले हज के लिए फ्लाइट और होटलों की बुकिंग अभी नहीं कराएं। यानी, उसने साफ संकेत दे दिया है कि कोरोनावायरस के चलते इस साल हज भी शायद नहीं हो।
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(आशु सक्सेना) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'मिनी इंडिया' यानि दिल्ली में चुनावी बिगूल बज चुका है। नामांकन दाखिल करने की प्रकिया समाप्त हो चुकी है। राजनीतिक दलों ने अपने स्टार प्रचारकों की सूची भी जारी कर दी है। लेकिन केंद्र की सत्तारूढ़ पर काबिज दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के स्टार प्रचारक पीएम मोदी का चुनावी कार्यक्रम अभी तक जारी नही किया गया है। 2014 में पिछली बार केंद्र की सत्ता पर काबिज होने से पहले हुए विधानसभा चुनावों खासकर मध्य प्रदेश, झारखंड़ और राजस्थान के चुनाव में भाजपा ने पार्टी के पीएम उम्मीदवार मोदी को स्टार प्रचार के तौर पर पेश किया था। इन चुनावों में पार्टी को अभूतपूर्व सफलता मिली थी। तीनों राज्यों में भाजपा का परचम लहराया था। तब से लेकर हाल में सम्पन्न झारखंड़ विधानसभा चुनाव तक पीएम मोदी ने भाजपा के स्टार प्रचारक की भूमिका अदा की है।
आपको याद दिला दूं कि दिल्ली विधान सभा के पिछले चुनाव में पीएम मोदी ने राजधानी दिल्ली को 'मिनी इंडिया' बताया था और कहा था कि 'मिनी इंडिया' का संदेश पूरे देश में जाता है। उस वक्त पीएम मोदी ने अपने करीब सात महीने के रिर्पोट कार्ड पर जनादेश मांगा था।
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(आशु सक्सेना): लोकसभा चुनाव के बाद महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा के स्टार प्रचारक पीएम मोदी ने पूरी ताकत झौंक दी है। दरअसल, 2014 में पीएम बनने के बाद मोदी ने विधानसभा चुनाव में जिस अंदाज में चुनाव प्रचार करना शुरू किया है, ऐसा चुनाव प्रचार पूर्व के किसी भी प्रधानमंत्री ने नही किया है। लिहाजा हार जीत का श्रेय भी पीएम मोदी को ही जाता है। लोकसभा चुनाव में भाजपा को जबरदस्त बहुमत हासिल हुआ है। उसके बाद यह चुनाव मोदी की पहली अग्नि परीक्षा हैं। महाराष्ट्र में विधानसभा के साथ सतारा लोकसभा का उपचुनाव भी होना है।
इस सीट पर उपचुनाव एनसीपी के सांसद के भाजपा में शामिल होने के चलते हो रहा है। इस लिहाज से यह पीएम मोदी का इम्तिहान भी है। आपको याद दिला दें कि पीएम मोदी के पहले कार्यकाल में हुए अधिकांश उपचुनावों में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था। महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ भाजपा-शिवसेना गठबंधन के सामने एक बार फिर कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन की चुनौती है। 2014 का चुनाव जहां कांग्रेस-एनसीपी ने आमने सामने लड़ा था। वहीं दूसरी और भाजपा और शिवसेना के बीच छोटे भाई और बड़े भाई के विवाद चलते सीटों का बंटवारा नही हुआ था। लिहाजा दोनों दल एक दूसरे के खिलाफ ताल ठौक रहे थे।
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(आशु सक्सेना): बिहार के समस्तीपुर (सुरक्षित) संसदीय क्षेत्र की जनता ने अपने रहनुमाओं को सिर-आंखों पर बिठाया है, तो कई बार गिरा भी दिया है। जिन जनप्रतिनिधियों ने इलाके को नजरअंदाज किया, जनता ने उनकी मिट्टी पलीद कर दी। समस्तीपुर (सुरक्षित) लोकसभा पुराने रोसड़ा (सुरक्षित) संसदीय क्षेत्र का ही बदला नाम है। 2009 में इस सीट पर केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामविलास पासवान चुनाव हार गये थे। यहां का प्रतिनिधित्व जदयू के महेश्वर हजारी ने किया था।
2014 का लोकसभा चुनाव रामविलास पासवान के छोटे भाई रामचंद्र पासवान ने एनडीए प्रत्याशी के तौर में जीता था। 2019 में लोजपा के रामचंद्र पासवान ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। 17 वीं लोकसभा के पहले सत्र के दौरान उन्हें अचानक हार्ट अटैक हुआ और बाद में दिल्ली के राम मनोहर अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई। लिहाजा इस सीट पर उपचुनाव हो रहा है। इस उपचुनाव में परिस्थिति पिछली बार की ही तरह है। महागठबंधन के कांग्रेस प्रत्याशी और एनडीए घटक लोजपा के बीच सीधा मुकाबला है। समस्तीपुर से लोजपा के दिवंगत सांसद रामचंद्र पासवान के बेटे प्रिंस राज पार्टी ने चुनाव मैदान उतारा हैं। जबकि उनके सामने महागठबंधन के पुराने प्रत्याशी कांग्रेस के डॉ. अशोक कुमार ही हैं।
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