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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बीआर. गवई ने शुक्रवार को रिटायर्ड जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी के लिए सामान्य विदाई समारोह आयोजित नहीं करने के ‘सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन' (एससीबीए) के फैसले की निंदा की। उन्होंने जस्टिस त्रिवेदी और जस्टस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की सदस्यता वाली औपचारिक बेंच की अध्यक्षता करते हुए कहा, "मुझे खुले तौर पर इसकी निंदा करनी चाहिए, क्योंकि मैं स्पष्ट रूप से बोलने में विश्वास करता हूं...एसोसिएशन को ऐसा रुख नहीं अपनाना चाहिए था।"

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने एससीबीए अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और उपाध्यक्ष रचना श्रीवास्तव की कार्यवाही के दौरान उपस्थिति के लिए प्रशंसा की। बार निकाय ने शाम को न्यायमूर्ति त्रिवेदी के लिए सामान्य (विदाई) समारोह आयोजित नहीं किया था। चीफ जस्टिस ने कहा कि वह कपिल सिब्बल और रचना श्रीवास्तव के आभारी हैं, वे दोनों यहां मौजूद हैं। लेकिन एसोसिएशन ने जो रुख अपनाया है, वह उसकी खुले तौर पर निंदा करते हैं। ऐसे मौके पर एसोसिएशन को ऐसा रुख नहीं अपनाना चाहिए था।

सीजेआई ने कहा कि निकाय द्वारा पारित किये गये प्रस्ताव के बावजूद वे यहां आए इसलिए वह सिब्बल और श्रीवास्तव की मौजूदगी के लिए खुले दिल से उनकी सराहना करते हैं। इससे इस बात की पुष्टि होती है कि वह एक बहुत अच्छी न्यायाधीश हैं। उन्होंने कहा कि न्यायाधीश कई तरह के होते हैं, लेकिन यह ऐसा कारण नहीं होना चाहिए जिससे उन्हें विदाई सम्मान न दिया जाए, जो उनको दिया जाना चाहिए था।

अच्छी परंपराएं हमेशा जारी रहनी चाहिए

वहीं न्यायमूर्ति मसीह ने कहा कि अजीब बात है, जैसा कि प्रधान न्यायाधीश ने पहले ही व्यक्त किया है, मुझे खेद है, लेकिन मुझे कहना होगा कि परंपराओं का पालन किया जाना चाहिए और उनका सम्मान किया जाना चाहिए। मुझे यकीन है कि अच्छी परंपराएं हमेशा जारी रहनी चाहिए।

सीजेआई गवई ने अपने संबोधन में जस्टिस त्रिवेदी की जिला न्यायपालिका से सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचने और कड़ी मेहनत और समर्पण के साथ न्याय करने के लिए सराहना की। सीजेआई ने कहा कि जस्टिस त्रिवेदी को हमेशा निष्पक्षता, दृढ़ता, सावधानी, कड़ी मेहनत, निष्ठा, समर्पण, ईमानदारी के लिए याद किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट जस्टिस त्रिवेदी की ईमानदारी और निष्पक्षता का समर्थन करता है।

रिटायर्ड जजों को एससीबीए देता है विदाई

परंपरा के अनुसार, एससीबीए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के लिए विदाई समारोह आयोजित करता है। लेकिन न्यायमूर्ति त्रिवेदी के मामले में एक असाधारण निर्णय लिया गया, जो संभवतः बार निकाय से संबद्ध वकीलों के खिलाफ किए गए कुछ फैसलों की वजह से हुआ।

जस्टिस बेला त्रिवेदी को क्यों नहीं मिली विदाई?

नियमों के पालन में कठोर मानी जाने वाली जस्टिस त्रिवेदी ने जाली वकालतनामा का इस्तेमाल कर शीर्ष अदालत में कथित तौर पर फर्जी याचिका दायर करने के संबंध में कुछ वकीलों के खिलाफ सीबीआई जांच का आदेश दिया था। उन्होंने वकीलों के प्रति दया दिखाये जाने के बार के पदाधिकारियों के कई अनुरोध को खारिज कर दिया था।

हाल ही में जस्टिस त्रिवेदी ने एक याचिका दायर करने में कथित कदाचार के लिए कुछ वकीलों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने का आह्वान किया था और बाद में उनकी माफी स्वीकार करने से मना कर दिया था। सुनवाई के दौरान उन्होंने इस बात पर दुख जताया था कि कुछ बार पदाधिकारी उन पर साथी वकीलों के खिलाफ कठोर आदेश पारित न करने का दबाव बना रहे थे।

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