ताज़ा खबरें
एसआईआर के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन आजादी की दूसरी लड़ाई: खड़गे
जेडीयू से बाहर निकाले जाने पर अनंत सिंह बोले- बनाऊंगा अपनी पार्टी
रामलीला मैदान की रैली से पहले राहुल बोले- बीजेपी का दिल से धन्यवाद

(आशु सक्सेना) 2019 के लोकसभा चुनाव में पहले से ज्यादा बहूमत हासिल करके दूसरी बार सत्ता पर काबिज होते ही मोदी सरकार ने भाजपा के विवादित चुनावी वादों को तेजी से अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया था। मई 2019 को सत्ता पर काबिज होने के बाद संसद सत्र के दौरान 5 अगस्त 2019 को मोदी सरकार ने पार्टी के सबसे पुराने चुनावी वादे जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधानों को निरस्त कर दिया और सूबे के राज्य के दर्जे को खत्म करते हुए दो केंद्रशासित प्रदेशों में उसे विभाजित कर दिया।

संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान मोदी सरकार ने हिंदू मुसलिम धुव्रीकरण को धार देने के इरादे से 11 दिसंबर 2019 को नागरिक संशोधन विधेयक (सीएए) को मंजूरी दे दी। इस बीच भाजपा के सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे राम मंदिर के पक्ष में 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला साल उपलब्धियों के लिहाज से पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने में सफल नज़र आ रहा था।

(धर्मपाल धनखड़) केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन जोर पकड़ता जा रहा है। सरकार और आंदोलनकारी किसानों के बीच बातचीत के दस दौर हो चुके हैं, लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ। इस मामले में शुरू से ही केंद्र सरकार की नीति किसानों बिना कुछ दिये ही आंदोलन खत्म करवाने की रही है। आंदोलन को खत्म करवाने के सरकार तमाम हथकंडे अब तक नाकाम रहे हैं। किसानों ने कृषि कानूनों को डेढ़ साल के लिए स्थगित किये जाने की सरकार की आखिरी पेशकश को भी ठुकरा दिया।

किसान तीनों कानूनों की वापसी से कम पर किसी भी तरह मानने को तैयार नहीं हैं। वहीं सरकार भी स्पष्ट कर चुकी है कि वो किसी भी सूरत में कानून वापस नहीं लेगी।दिल्ली के बॉर्डर पर धरना दे रहे किसान गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में ट्रैक्टर परेड करने को लेकर भी अड़े हुए हैं। अंततः पुलिस ने किसानों को ट्रैक्टर परेड निकालने की इजाजत दे दी है और उसका रास्ता भी निर्धारित कर दिया है। अब किसान गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड की तैयारियों में लग गये हैं। 

(आशु सक्सेना): 2020 को एक मनहूस साल के तौर पर सदियों तक याद किया जाएगा। इस साल की शुरूआत वैश्विक महामारी कोविड़ 19 के साथ संघर्ष से हुई। इस महामारी पर काबू पाने के लिए दुनिया भर के देशों ने लाॅकडाउन जैसे सख्त फैसले किये, जिसके चलते लोगों को अपने घर में सिमट कर रहने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस वैश्विक महामारी ने जहां दुनिया भर के देशों की अर्थ व्यवस्था को बूरी तरह प्रभावित किया है, वहीं दुनिया भर का राजनीतिक परिदृश्य भी बदलने लगा है। लाजमी है कि इन दोनों ही मोर्चो पर भारत में भी संघर्ष जारी है। 

आज़ाद भारत में बीते साल की शुरूआत देशभर में सांप्रदायिक तनाव के बीच नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ आंदोलन से हुई, वहीं इस मनहूस साल का अंत दिल्ली की सीमाओं पर 26 नवंबर से शुरू हुए किसान आंदोलन के साथ हुआ है। साल के आखिरी दिन मोदी सरकार ने किसानों की दो मांगे मान ली हैं। लेकिन किसान संगठनों की मुख्य मांग पर गतिरोध बरकरार है।

(धर्मपाल धनखड़) हरियाणा की भाजपा-जेजेपी गठबंधन सरकार में एक बार फिर विरोधाभासी सुर सामने आने लगे हैं। विगत 10 सितंबर को पीपली में किसानों पर हुए पुलिसिया लाठीचार्ज को लेकर गृहमंत्री अनिल विज और उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के विरोधाभासी बयान सामने आये हैं। किसान हाल ही केंद्र सरकार की ओर से पारित किये गये कृषि संबंधी अध्यादेशों का विरोध कर रहे थे। इस मामले में सांसद धर्मवीर सिंह, बृजेंद्र सिंह, प्रदेश के कई मंत्रियों और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ ने भी लाठी चार्ज की निंदा की और किसानों के साथ बातचीत करने का सुझाव दिया। 

गौरतलब है कि प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ ने लाठीचार्ज से प्रदेश की आम जनता में व्याप्त रोष को देखते हुए आनन-फानन में किसानों से बातचीत के लिए भाजपा सांसदों की 'संवाद कमेटी' के गठन की घोषणा कर दी। प्रदेश में पहली बार ऐसा हुआ है कि इस तरह के मसले पर मुख्यमंत्री की बजाय सत्तारूढ़ पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष कमेटी का गठन करें। 

  • देश
  • प्रदेश
  • आलेख