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रांची: झारखंड में विधानसभा के बुलाए गए विशेष सत्र में ओबीसी और अन्य वर्गों का आरक्षण बढ़ाने का प्रस्ताव शुक्रवार को पारित कर दिया गया है। नई आरक्षण नीति के तहत ओबीसी कोटे को 14 से बढ़ाकर 27 फ़ीसदी तक किया गया है। वही, अनुसूचित जनजाति का कोटा 26 से 28 और अनुसूचित जाति का कोटा 10 से 12 फ़ीसदी तक किया गया है। बता दें, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार ने इसको लेकर झारखंड के लोगों से वादा किया था।
राज्य में कुल आरक्षण बढ़कर 77 फ़ीसदी तक पहुंच गया, जो कि देश में सबसे अधिक है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधेयक को सदन में पेश किया था। कुछ संशोधन प्रस्तावों के अतिरिक्त इस विधेयक को सभी दलों का समर्थन मिला। हालांकि, बीजेपी विधायक और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री भानुप्रताप शाही ने कहा कि हम विधेयक का समर्थन करने आए हैं, लेकिन इस पर चर्चा होनी चाहिए। स्पीकर रवींद्रनाथ महतो ने उनको कहा कि आपने कोई संशोधन प्रस्ताव नहीं डाला। आपके इतने बड़े दल से केवल रामचंद्र चंद्रवंशी ने संशोधन प्रस्ताव डाला।
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रांची: ऐसे समय जब अवैध खनन मामले में झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन, प्रवर्तन निदेशालय के 'निशाने' पर हैं, उनकी पार्टी वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए दो अहम वादों को पूरा करने की तैयारी में जुटी है। शुक्रवार को झारखंड विधानसभा के विशेष सत्र में दो ऐतिहासिक बिलों को मंजूरी दिए जाने की संभावना है। इसमें से पहला बिल, 1932 के भूमि रिकॉर्ड का उपयोग करके इसके स्थानीय निवासियों का निर्धारण करने और दूसरा अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए रोजगार और नौकरियों में आरक्षण 14 फीसदी से बढ़ाकर 27 फीसदी किए जाने से संबंधित है। बिलों को राजनीतिक रूप से इतना संवेदनशील माना जा रहा है कि इस बात की संभावना बेहद कम है कि विपक्ष इसका विरोध करेगा। हालांकि स्थायी निवासी के रिकॉर्ड्स में बदलाव किए जा सकते हैं।
यही नहीं, बीजेपी, जिस पर विपक्षियों को टारगेट करने के लिए ईडी जैसी सरकारी एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया जा रहा है, को दरकिनार करने के लिए राज्य सरकार पहले ही यह कह चुकी है कि राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह केंद्र पर निर्भर होगा कि नया कोटा सिस्टम अदालतों की लड़ाई में उलझकर न रह जाए।
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रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने फिर से समन जारी किया है। ईडी ने सोरेन को 17 नवंबर को रांची स्थित कार्यालय में पेश होने के लिए समन जारी किया है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध खनन मामले में इससे पहले भी समन जारी करके पूछताछ के लिए बुलाया था। ईडी ने सोरेन को 3 नवंबर को पेश होने के लिए कहा था। बता दें कि सोरेन 3 नवंबर को ईडी के मुख्यालय नहीं पहुंचे थे। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से बताया गया था कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक सीएम को रायपुर में आदिवासी नृत्य महोत्सव में हिस्सा लेना है इसलिए वे ईडी ऑफिस नहीं आ सकेंगे।
ईडी ने हेमंत सोरेन को 3 नवंबर को पेश होने के लिए समन जारी किया था। इसके बाद सोरेन ने ईडी को एक पत्र लिखा था। मुख्यमंत्री ने एजेंसी से 3 हफ्ते का वक्त मांगा था। मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा था कि उनके कुछ पूर्व निर्धारित कार्यक्रम हैं, उन्हें लेकर व्यस्तता है। इसलिए उन्हें 3 हफ्ते का समय चाहिए।
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नई दिल्ली: माइनिंग लीज और मनी लॉन्ड्रिंग मामले मे झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन को बड़ी राहत मिली है। हेमंत सोरेन के खिलाफ हाईकोर्ट के फैसला रद्द कर दिया गया है। सोरेन और राज्य सरकार की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि झारखंड हाईकोर्ट में सोरेन के खिलाफ याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। इससे पहले झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बड़ी राहत मिली थी। शेल कंपनियों के जरिए मनी लांड्रिंग के आरोप पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी। कोर्ट ने हाईकोर्ट में याचिका के सुनवाई योग्य होने पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता या ईडी सोरेन के खिलाफ पहली नजर में केस स्थापित नहीं कर पाए।
कोर्ट ने ईडी पर बड़े सवाल उठाए और कहा, आपके पास सोरेन के खिलाफ इतने सबूत हैं तो कार्रवाई करिए। पीआईएल याचिकाकर्ता के कंधे पर बंदूक क्यों चला रहे हैं? यदि आपके पास इतने अधिक ठोस सबूत हैं, तो आपको कोर्ट के आदेश की आवश्यकता क्यों है? पहली नजर में सामग्री होनी चाहिए।
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