लखनऊ: एमपीएमएलए कोर्ट के विशेष जज पवन कुमार राय ने अरशद उर्फ मोहसिन रजा के एक आपराधिक मामले में पुलिस के गवाहों के हाजिर नहीं होने पर सख्त रुख अख्तियार किया है। अभियुक्त मोहसिन रजा भाजपा सरकार में मंत्री हैं।
उन्होंने इस संदर्भ में पुलिस कमिश्नर के साथ ही पुलिस महानिदेशक को भी पत्र जारी किया है। कहा है कि इस मामले में एसआई प्रदीप कौशिक व कांसटेबिल सुरेद्र की गवाही होनी है। पिछली कई तारीख से इनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट व सीआरपीसी की धारा 350 की नोटिस भी जारी है। बावजूद इसके संबधित थाने द्वारा इनका पता-ठिकाना मालूम नहीं किया जा सका है। यह अत्यन्त आपत्तिजनक है। लिहाजा 20 फरवरी तक इन गवाहों की वर्तमान नियुक्ति अथवा सेवानिवृति की दशा में इनका स्थाई व वर्तमान पता वगैरह अनिवार्य रूप से भेजना सुनिश्चित कराएं। बुधवार को अदालत में इस मामले की सुनवाई के दौरान अभियुक्त मोहसिन रजा अदालत में उपस्थित थे।
ये है पूरा मामला
चार अगस्त, 1989 को ट्रक ड्राइवर लल्लन ने थाना वजीरगंज में इस मामले की एफआईआर दर्ज कराई थी। जिसके मुताबिक वह ट्रक लेकर नबीउल्लाह रोड से बड़े छत्ते पुल की तरफ मुड़ा। इतने में उधर से अकबर उर्फ सज्जू व अरशद उर्फ मोहसिन रजा साईकिल चलाते हुए ट्रक के सामने आ गए। उसने ट्रक में तुरंत ब्रेक लगाया। इन दोनों ने ट्रक के सामने अपनी साईकिल खड़ी कर दी और गाली देने लगे। उसे रुकने को कहा। उसने आगे बढ़ाकर ट्रक साइड में लगा दी। इन्होंने नीचे उतरने को कहा। वह नीचे उतरा। इसके बाद अकबर व अरशद उसे लात-घुसों से मारने लगे। वह छुड़कार भागने लगा।
इन लोगों ने दौड़ाकर पकड़ लिया। फिर से उसे मारने लगे। वह किसी तरह जान बचाकर भागा। तब इन दोंनो ने ईट उठाकर उसकी पीठ पर दे मारा। लेकिन वह भागता रहा। इन्होंने उसे जानमाल की धमकी दी और अपनी साईकिल उठाकर चले गए। चार अगस्त, 1990 को पुलिस ने इस मामले में अकबर उर्फ सज्जू व अरशद उर्फ मोहसिन रजा के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। 27 जुलाई, 2018 को इस मामले में मोहसिन रजा पर आरोप तय हुआ था।