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नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में सपा और बीएसपी के बीच सीटों का जिस तरह से बंटवारा हुआ है उसको देखकर ऐसा लग रहा है कि बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने सीटों के बंटवारे में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से बाजी मार ली है। शायद इस हालात को सपा के सबसे वरिष्ठ नेता मुलायम सिंह यादव भांप गए हैं। यही वजह है कि वह टिकटों की बांटने की बात कह रहे हैं। दरअसल सपा के खाते में कई सीटें ऐसी आ गई हैं जहां पर उसका प्रदर्शन बहुत ही खराब रहा है।

सबसे पहले बात करते हैं उत्तर प्रदेश की कानपुर सीट की तो यहां पर भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी सांसद हैं। साल 2014 के लोकसभा में जोशी को 474712 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर कांग्रेस को 251766 वोट, बीएसपी को 53218 और सपा को सबसे कम 25723 वोट मिले थे। अब अगर दोनों ही पार्टियों को वोटों को मिला दें तो भी वह भाजपा के मुकाबले नहीं ठहर रहे हैं। दोनों ही पार्टियां अभी तक इस सीट पर कभी चुनाव नहीं जीत पाई हैं। इसी तरह सपा के हिस्से में सबसे कठिन सीट वाराणसी आई है।

जहां पर साल 2014 के लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी यहां पर रिकॉर्ड वोटों से जीते थे। उनको 581022 वोट मिले थे। आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल यहां पर दूसरे नंबर रहे उनको 209238 मिले थे। कांग्रेस तीसरे नंबर पर थी उसे वोट 75614 मिले थे। जबकि बीएसपी (60579) और समाजवादी पार्टी (45,291) क्रमश: चौथे और पांचवे नंबर थी। इस सीट पर भी दोनों पार्टियों ने कभी जीत नहीं दर्ज नहीं की है।

भाजपा के गढ़ लखनऊ जहां से केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह सांसद हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव सपा यहां पर पांचवे नंबर थी और बीएसपी चौथे नंबर थी। इस सीट पर न तो सपा और न ही बीएसपी ने कभी जीत दर्ज कर पाई हैं।

बात करें पश्चिमी उत्तर प्रदेश की गाजियाबाद सीट पर तो यहां से केंद्रीय मंत्री वीके सिंह सांसद हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में सपा यहां पर पांचवे नंबर पर और बीएसपी चौथे नंबर पर थी। बात करें हरदोई संसदीय सीट की तो यहां पर भाजपा से अंशुल वर्मा सांसद हैं। बहुजन समाज पार्टी यहां पर दूसरे नंबर थी जबकि सपा तीसरे नंबर पर थी। यह सीट भी सपा के ही खाते में गई है। हालांकि दोनों ही पार्टियों को मिले वोटों को जोड़ दें तो भाजपा यहां काफी पीछे हो जाती है।

इसी तरह बाराबंकी सीट से भाजपा की प्रियंका सिंह रावत सांसद हैं, साल 2014 के चुनाव में कांग्रेस यहां पर दूसरे नंबर पर थी। जबकि बीएसपी चौथे और समाजवादी पार्टी पांचवें नंबर थी। दोनों पार्टियों के वोटों को मिला दें तो भी वह भाजपा से काफी पीछे रहेंगी। बांदा सीट पर भी भाजपा का कब्जा है लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में बीएसपी यहां पर दूसरे नंबर थी और सपा तीसरे नंबर पर दोनों ही पार्टियों के वोटों को मिला दें तो भाजपा से आगे जाते दिखाई दे रही हैं।

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