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नई दिल्ली: राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण ने एक बिल्डर की याचिका को खारिज करते हुए कहा है कि राष्ट्रीय राजधानी में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को सुनिश्चित करना चाहिए कि वे वायु प्रदूषण नहीं फैलाये। बिल्डर ने प्रदूषण फैलाने के कारण उस पर लगाये गये जुर्माने को चुनौती दी थी। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अगुवाई वाली पीठ ने दक्षिणी दिल्ली के एक बिल्डर की याचिका को खारिज कर दिया। बिल्डर ने उस पर लगाये गये 50 हजार रुपये के जुर्माने के खिलाफ याचिका दायर की थी जो खुले में रेत एवं अन्य निर्माण सामग्री रखे जाने के कारण उस पर लगाया गया था। पीठ ने कहा, ‘यह निर्विवाद है कि धूल वह मुख्य तत्व है जो दिल्ली की हवा को प्रदूषित करती है..अपने पूरे अनुरोध में याचिकाकर्ता ने कहीं भी यह घोषणा नहीं की है कि वह वह इस तरह की सभी वस्तुएं भंडार कर रहा था जिससे धूल पैदा होती है। यदि इस तरह के सामान को न्यायाधिकरण के निर्देशों के अनुसार वैज्ञानिक ढंग से भंडारण नहीं किया जाता है तो इनसे वायु प्रदूषण फैलना तय है।’

उसने कहा, ‘कोई भी काम करने वाले दिल्ली के प्रत्येक निवासी का यह सुनिश्चित करना दायित्व बन जाता है कि वे वायु प्रदूषण न पैदा करें जिससे वायु गुणवत्ता प्रभावित होती है तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है।’

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