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कोलकाता: पश्चिम बंगाल में बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने चौंकाने वाला बयान दिया है। इसके साथ ही उन्होंने बीजेपी के 'सबका साथ, सबका विकास' नारे को भी बदलने की जरूरत बताई। शुभेंदु अधिकारी ने कहा, हमें सबका साथ, सबके विकास की बात करने की जरूरत नहीं है। हम तय करेंगे कि जो हमारे साथ है, हम उसका साथ दें। इतना ही नहीं शुभेंदु ने कहा, हम जीतेंगे और हिंदुओं को बचाएंगे। खास बात ये है कि शुभेंदु अधिकारी जिस सबका साथ, सबका विकास को बंद करने की बात कह रहे हैं, वह नारा सबसे पहले पीएम मोदी ने ही दिया था।

उपचुनाव में हार की बताई वजह

शुभेंदु अधिकारी ने एक कार्यक्रम में जय श्री राम का नारा लगाते हुए कहा, सबका साथ, सबका विकास बंद करो। इतना ही नहीं उन्होंने अल्पसंख्यक मोर्चे को भी बंद करने की बात कही। अधिकारी ने कहा, हम संविधान को बचाएंगे। बंगाल में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने उपचुनाव में बीजेपी की हार की भी वजह बताई। उन्होंने दावा किया कि उपचुनाव में हजारों लोग अपना वोट नहीं डाल सके।

कोलकाता: कलकत्ता हाई कोर्ट ने मंगलवार (16 जुलाई) को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को राज्यपाल सीवी आनंद बोस के खिलाफ कोई भी 'अपमानजनक या गलत' बयान देने से रोक दिया। दरअसल, बीते 28 जून को बोस ने कलकत्ता हाई कोर्ट में मुख्यमंत्री के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। बता दें कि, सीएम ने कहा था कि महिलाओं ने उनसे शिकायत की थी कि वे राजभवन जाने से डरती हैं।

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार, बीते 2 मई को राज्यपाल के घर में एक संविदा महिला कर्मचारी ने सीवी आनंद बोस पर उसके साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया था, जिसके बाद कोलकाता पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी। इस मामले पर बोलते हुए ममता बनर्जी ने दावा किया कि महिलाओं ने उन्हें बताया कि "वे हाल ही में वहां हुई घटनाओं के कारण राजभवन जाने से डरती हैं।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार (15 जुलाई) को कलकत्ता हाईकोर्ट से कहा कि राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों के उनके बयान में कुछ भी अपमानजनक नहीं था।

नई दिल्ली: सीबीआई के कथित दुरुपयोग को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई योग्य माना। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की दलील को अस्वीकार कर दिया और याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया। याचिका में पश्चिम बंगाल सरकार ने आरोप लगाया है कि राज्य के अधीन आने वाले मामलों में एक तरफा रूप से सीबीआई को भेजकर केंद्र सरकार हस्तक्षेप करता है।

बंगाल सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत केंद्र के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। बंगाल सरकार ने दायर अर्जी में कहा है कि उसने सीबीआई को केस दर्ज करने के लिए दी गई सहमति 16 नवंबर, 2018 को वापस ले ली थी। ऐसे में सीबीआई को पश्चिम बंगाल के मामलों में एफआईआर दर्ज करने का अधिकार नहीं है फिर भी वह लगातार अलग-अलग मामलों में केस दर्ज कर जांच और गिरफ्तारी कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस दलील को भी ठुकरा दिया, जिसमें कहा गया था कि राज्य सरकार की याचिका में अहम तथ्यों को छुपाया गया है, ऐसे में यह सुनने योग्य नहीं है।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (8 जुलाई 2024) पश्चिम बंगाल की ममता सरकार को बड़ा झटका दिया। सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में संदेशखाली में महिलाओं के यौन शोषण-जमीन हथियाने और राशन घोटाले से जुड़े सभी मामलों में सीबीआई जांच का आदेश दिया था।

हाईकोर्ट ने दिए है सीबीआई जांच के आदेश

कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार के रवैये पर भी सवाल उठाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार किसी शख्स को बचाने की कोशिश क्यों कर रही है!

दरअसल, संदेशखाली में टीएमसी से निष्कासित नेता शाहजहां शेख पर यौन उत्पीड़न और जमीन हड़पने के आरोप लगे थे। इस मामले में विपक्ष ने ममता सरकार पर जमकर निशाना साधा था। हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं।

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