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इंदौर: डाउन सिंड्रोम से पीड़ित दो वर्षीय अनाथ बच्चे को गोद लेने के बाद देश के सबसे कम उम्र के अविवाहित पिता के रूप में मशहूर आदित्य तिवारी शादी के बंधन में बंध गये हैं। यह शादी भी लीक से हटकर होने के चलते चर्चा में है। तिवारी (28) पुणे में एक अंतरराष्ट्रीय निवेश बैंक में नौकरी करते हैं। उन्होंने गृहनगर इंदौर में 16 जुलाई को अपनी बचपन की दोस्त अर्पिता से शादी रचायी। तिवारी ने सोमवार को बताया, ‘मैंने जान-पहचान के चंद ही लोगों को अपनी शादी में बुलाया था। लेकिन मेरी शादी के मौके पर अनाथालयों व झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले बच्चों, वृद्धाश्रमों में रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांग जनों और एड्स पीड़ितों तक भोजन पहुंचाया। इस अवसर पर मैंने इंदौर के चिड़ियाघर के एक बाघ को गोद लेकर उसके खाने का खर्च उठाने की जिम्मेदारी लेना भी मंजूर किया।’ युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने बताया कि उन्होंने डाउन सिंड्रोम और दिल में छेद होने की बीमारी से पीड़ित बिन्नी (02) को करीब डेढ़ वर्ष की लंबी जद्दोजहद के बाद इसी साल एक जनवरी को गोद लिया, जब वह स्थानीय अनाथालय में पल रहा था। उसके माता-पिता ने उसकी बीमारी के कारण उसे लावारिस छोड़ दिया था। उन्होंने बताया, ‘जब मैंने सितंबर 2014 में बिन्नी को गोद लेने का फैसला किया, तब नियम यह था कि अगर कोई अविवाहित शख्स किसी बच्चे को कानूनी तौर पर गोद लेना चाहता है, तो उसकी उम्र कम से कम 30 साल होनी चाहिये। बाद में सरकार ने नियम में बदलाव किया और यह उम्र घटाकर 25 साल कर दी गयी।
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भोपाल: मध्य प्रदेश में डेढ़ सप्ताह के दौरान हुई भारी बारिश से कई जिलों में बाढ़ में आ गई है और जनजीवन भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बाढ़ से 35 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि नौ अब भी लापता हैं। मौसम विभाग के अनुसार, एक जून से 16 जुलाई तक राज्य के 33 जिलों में सामान्य से अधिक, 14 जिलों में सामान्य तथा चार जिलों में कम वर्षा दर्ज की गई। आधिकारिक बयान के मुताबिक, बीते डेढ़ पखवाड़े में हुई बारिश का राज्य के कई हिस्सों पर प्रतिकूल पड़ा है। राज्य के 51 जिलों में से 23 जिले बाढ़ की जद में हैं, जहां तीन लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। विस्थापित लोगों के लिए 27 राहत शिविर बनाए गए हैं, जिनमें आठ हजार से ज्यादा लोग शरण लिए हुए हैं। बाढ़ से सबसे ज्यादा राजधानी भोपाल में 8० हजार लोग प्रभावित हुए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ से अब तक 35 लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे अधिक पन्ना और जबलपुर जिले में सात-सात लोगों की मौत हुई है, वहीं राजधानी में पांच लोग बाढ़ का शिकार बने। इसके अलावा बाढ़ में बहे नौ लोग अब भी लापता हैं। इनमें पांच युवक रीवा जिले के हैं जो पूर्वा फॉल पर पिकनिक मनाने गए थे और अचानक पानी का बहाव तेज होने से वे बह गए थे। वर्षा और बाढ़ से 2487 मकान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के 51 जिलों में से 33 जिले - जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, मण्डला, नरसिंहपुर, सागर, दमोह, पन्ना, टीकमगढ़, छतरपुर, सीधी, सतना, इंदौर, अलीराजपुर, खण्डवा, उज्जैन, मंदसौर, रतलाम, देवास, शाजापुर, मुरैना, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़, होशंगाबाद, हरदा और बैतूल में सामान्य से अधिक बारिश हुई है।
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भोपाल: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल सहित अनेक भागों में पिछले कुछ दिन से हो रही लगातार तेज बारिश से कई निचले स्थानों पर बाढ़ की स्थिति बन गई है और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बारिश और बाढ़ से प्रदेश में 11 लोगों की मौत हुई है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज यहां संवाददताओं को बताया कि प्रदेश में पिछले तीन-चार दिन से हो रही लगातार तेज बारिश और बाढ़ से आठ लोगों की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि दो लोगों की मौत भोपाल में तथा टीकमगढ़, रीवा, झाबुआ, बैतूल, रायसेन और पन्ना जिले में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है। पुलिस ने बताया कि इसके अलावा भोपाल की शाहपुर झील के पास एक नाले में बाइक सहित बहने से सौरभ कटियार (21) नामक युवक की आज दोपहर मौत हो गई। इससे पहले मंडला और सिंगरौली जिले में नाले के पानी के तेज बहाव में बहने से दो लोगों की मौत की सूचना मिली थी। मुख्यमंत्री ने बताया कि होशंगाबाद में नर्मदा नदी खतरे के निशान से उपर बह रही है। उन्होंने बताया कि बाढ़ से लोगों को राहत पहुंचाने के लिये प्रदेश स्तरीय सहायता केन्द्र शुरू किया गया है। कोई भी बाढ़ पीड़ित व्यक्ति फोन नं 1079 के जरिये इस केन्द्र से संपर्क कर सकता है। चौहान ने बताया कि भोपाल के निकट हलाली बांध पर कल होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक स्थगित कर दी गई है। उन्होंने मंत्रियों को बाढ़ प्रभावित इलाकों में जाकर राहत कार्यों का जायजा लेने के निर्देश दिये हैं।
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भोपाल: प्रदेश के कई इलाकों में कई दिनों से हो रही बारिश के कारण कई नादियां उफान पर हैं। नर्मदा, पार्वती, चंबल, केन, तवा, तमस और सुनार नदियां उफान पर हैं। इससे कई मार्गों पर आवागमन प्रभावित हो गया है। प्रदेश में बारिश का सबसे ज़्यादा असर सतना जिले में देखने को मिल रहा है, जिले के निचले इलकों में पानी घुसने से बाढ़ जैसे हालात हो गए हैं। बाढ़ की वजह से कई गांवों का संपर्क टूट गया है। अधिकांश बस्तियों में पानी भर गया है। सतना में पानी में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए और उन तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। आलम यह है कि बस्तियों और गांव में नाव चल रही है और मदद के लिए सेना भी बुलाई गई है। सतना जिले में तीन दिनों में हुई बारिश ने यहां के जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। बाढ़ नियंत्रण अधिकारी और होमगार्ड की कमांडेंट मधुराजे तिवारी ने शुक्रवार को बताया कि जिले के तिजेला, कुपालपुर, उचवा टोला सहित कई गांव में पानी भर गया है। बीते दो दिनों में इन गांवों से एक हजार लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। तिवारी के अनुसार, जिले की स्थिति में सुधार आ रहा है, लेकिन अब भी कई बस्तियों और गांव में पानी भरा हुआ है, यहां फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के साथ खाद्य सामग्री व पीने का पानी पहुंचाने के लिए नाव का सहारा लिया जा रहा है। गांव व बस्ती में भरे पानी में नाव ही घरों तक पहुंचने का साधन है। उन्होंने बताया कि जिले में राहत और बचाव कार्य के लिए जबलपुर से सेना बुलाई गई है।
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