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शिलांग: मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स जिले में एक अवैध रैटहोल खदान में अचानक पानी भर जाने से खनिकों के अंदर फंस जाने की घटना को पूरे एक माह हो गए हैं। अब तक के बचाव संबंधी प्रयासों के लगातार विफल होने के कारण यह उम्मीद बेहद क्षीण हो चुकी है कि इन खनिकों को सही सलामत बाहर निकाला जा सकेगा। खदानों में अपने काम के लिए महारथ रखने वाले वैज्ञानिकों की एक शीर्ष टीम बचाव अभियान को गति देने के लिए रविवार को ईस्ट जयंतिया हिल्स जिला पहुंची। इस बचाव अभियान को देश का सबसे लंबा चलने वाला बचाव अभियान बताया जा रहा है।
बचाव अभियान के प्रवक्ता आर सुस्नगी ने बताया कि हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय भू-भौतिकीय अनुसंधान संस्थान, वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (एनजीआईआर-सीएसआईआर) और ग्रैविटी एंड मैग्नेटिक ग्रुप के विशेषज्ञों की एक टीम बचाव स्थल पहुंच गई है। उन्होंने कहा, इसके अलावा ‘ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रेडार’ (जीपीआर) और चेन्नई स्थित ‘रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल’ (आरओवी) की एक टीम भी बचाव मिशन में मदद के लिए पहुंची है।
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नई दिल्ली: मेघालय सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले में एक गैरकानूनी कोयला खदान में 13 दिसंबर से फंसे श्रमिकों को बचाने के लिये नौसेना ने पांच रिमोट चालित वाहनों को काम में लगाया है। न्यायमूर्ति ए के सीकरी और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ को राज्य सरकार ने बताया कि इस गैरकानूनी खदान से अभी तक एक करोड़ लीटर पानी बाहर निकाला गया है परंतु पास की नदियों से इसमें हो रहा रिसाव बचाव अभियान में बाधायें पैदा कर रहा है।
पीठ ने राज्य सरकार के वकील से जानना चाहा कि क्या इस तरह की गैरकानूनी खनन गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों के खिलाफ कोई कार्रवाई की गयी है। राज्य सरकार के वकील ने न्यायालय को बताया कि गैरकानूनी खदान चलाने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया है। केन्द्र की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि खदान में फंसे श्रमिकों को बचाने के लिये हरसंभव कदम उठाये जा रहे हैं और भारतीय वायु सेना ने जरूरी उपकरणों और आदमियों को पहुंचाने के लिये विमान तथा हेलीकाप्टर तैनात किये हैं।
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शिलांग: पिछले 24 दिनों से मेघालय के पूर्वी जयंती पर्वतीय जिले के एक कोयला खदान में फंसे 15 श्रमिकों को निकालने के काम में शनिवार को प्रगति हुई। इस दौरान उच्च क्षमता वाले दो पंपों ने मुख्य शाफ्ट से पानी निकालने का काम शुरू कर दिया है। अधिकारियों ने बताया कि किर्लोस्कर ब्रदर्स लिमिटेड द्वारा राज्य सरकार को श्रमिकों के बाहर निकालने के काम में मदद की पेशकश के 10 दिन बाद से पंप ने कार्य करना शुरू कर दिया। लेकिन पंप सिर्फ एक घंटे ही काम कर पाया जिसकी वजह से नौसेना के गोताखोर पानी के भीतर थाह लेने के लिए नहीं जा सके।
इस अभियान के प्रवक्ता आर सुंगसी ने कहा कि शनिवार दोपहर करीब तीन बजकर 30 मिनट पर किर्लोस्कर ब्रदर्स लिमिटेड की एक टीम मुख्य शाफ्ट से पानी निकालने का काम शुरु करने में सक्षम रही। यहीं खनिक फंसे हुए हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि पंप सिर्फ एक घंटे ही चल पाया जिससे नौसेना के गोताखोर पानी का अंदाजा लगाने नीचे नहीं जा पाए। भारतीय नौसेना और एनडीआरएफ के गोताखोर अब भी तलाश और बचाव के काम में कुछ खास काम नहीं कर पाए हैं। पानी का स्तर अब भी 100 फुट से ज्यादा है।
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नई दिल्ली: केन्द्र ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि मेघालय में 13 दिसंबर से एक गैरकानूनी कोयला खदान में फंसे 15 खनिकों के बचाव कार्य में परेशानियां आ रही हैं क्योंकि 355 फुट गहरी खदान का कोई खाका नहीं है। न्यायमूर्ति ए के सीकरी और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ को सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि यह गैरकानूनी खदान एक नदी के किनारे स्थित है और इससे हो रहा पानी का रिसाव बचाव अभियान में बाधा पैदा कर रहा है। तुषार मेहता ने तेजी से बचाव कार्य के लिये अब तक उठाये गये कदमों से पीठ को अवगत कराया।
पीठ ने केन्द्र और दूसरे प्राधिकारों को सात जनवरी को स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया जिसमे बचाव के लिये उठाये गये कदमों की जानकारी देनी होगी। इससे पहले, बृहस्पतिवार को शीर्ष अदालत ने इस खदान में फंसे 15 खनिकों को बचाने के काम पर असंतोष व्यक्त करते हुये कहा था कि उन्हें बचाने के लिए “शीघ्र, तत्काल एवं प्रभावी’’ अभियान चलाने की जरूरत है क्योंकि यह जिंदगी और मौत का सवाल है। लगभग तीन हफ्ते से खदान फंसे लोगों के लिए “प्रत्येक मिनट कीमती” है।
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