लखनऊ: हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक शादीशुदा युगल का उत्पीड़न न करने का आदेश अमेठी पुलिस को दिया है। युगल की तीन साल पहले शादी हो चुकी है व उनके एक बच्चा भी है। इसके साथ ही न्यायालय ने युगल की याचिका पर राज्य सरकार से जवाब तलब भी किया है। मामले की अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद होगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति रितुराज अवस्थी और न्यायमूर्ति सरोज यादव की खंडपीठ ने चांदनी और उसके पति की याचिका पर दिये। याचियों का कहना था कि उन्होंने अपनी मर्जी से तीन साल पहले विवाह कर लिया था और उनके डेढ़ साल का एक बच्चा भी है। वे शांतिपूर्वक अपना जीवन गुजार रहे हैं। हालांकि चांदनी का परिवार उनके रिश्ते के विरुद्ध था इसलिए उसके पति के विरुद्ध अपहरण की धाराओं में एफआईआर अमेठी के कमरौली थाने में दर्ज करा दी गई।
याचियों के अधिवक्ता ने न्यायालय के समक्ष दलील दी कि उन्हें इतने समय बाद हाईकोर्ट के समक्ष इसलिए आना पड़ा क्योंकि उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश, 2020 के लागू होने के बाद से पुलिस उन्हें लगातार परेशान कर रही है। न्यायालय ने मामले के सभी तथ्यों पर गौर करने के बाद अमेठी पुलिस को आदेश दिया कि अगली सुनवाई तक याचियों को कमरौली थाने में दर्ज उक्त एफआईआर के आधार पर परेशान न किया जाए। इसके साथ ही न्यायालय ने राज्य सरकार को जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय भी दिया है।