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नई दिल्ली: कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर नीति निर्धारण में समन्वय की कमी का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि क्या बजट के आंकड़ें पेश किए जाने के तुरंत बाद उनमें संशोधन किया जाएगा क्योंकि बजट के कुछ ही दिन बाद सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) की नयी शृंखला जारी की जानी है। कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 का बजट कल यानी रविवार को पेश किया जाएगा।

बजट से पहले जयराम रमेश ने उठाए गंभीर सवाल

रमेश ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, राज्य सरकारें आशंकाग्रस्त होकर प्रतीक्षा कर रही होंगी कि उनके लिए इसमें क्या है क्योंकि वित्त मंत्री 16वें वित्त आयोग की सिफारिशें लागू करने की घोषणा करने वाली हैं। उन्होंने कहा कि वित्त आयोग एक ऐसा निकाय है जिसकी स्थापना संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत हर पांच वर्षों में (या उससे पहले) की जाती है ताकि वह केंद्र द्वारा एकत्र किए गए कर राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी, इस हिस्सेदारी का राज्यों के बीच वितरण और पांच वर्षों की अवधि के लिए विशेष अनुदानों की सिफारिश कर सके।

नई दिल्ली: सोना और चांदी की कीमतों में शुक्रवार को भारी गिरावट दर्ज की गई। लगातार तेज उछाल के बाद निवेशकों की मुनाफावसूली के चलते कीमती धातुओं के भाव अचानक टूट गए। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर खुलते ही सोना और चांदी दोनों लाल निशान में कारोबार करते दिखे।

सबसे बड़ी गिरावट चांदी की कीमतों में देखने को मिली। एमसीएक्स पर चांदी का वायदा भाव करीब 24,000 रुपये तक टूट गया और 5 मार्च की एक्सपायरी वाली चांदी 23,993 रुपये गिरकर 3,75,900 रुपये प्रति किलो पर आ गई।

गौरतलब है कि गुरुवार को चांदी ने ऐतिहासिक तेजी दिखाते हुए पहली बार 4 लाख रुपये प्रति किलो का स्तर पार किया था। कारोबार के अंत में इसका भाव 3,99,893 रुपये प्रति किलो पर बंद हुआ था। वहीं, चांदी का लाइफ टाइम हाई स्तर 4,20,048 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया था, जहां से एक ही दिन में करीब 44,148 रुपये की बड़ी गिरावट देखने को मिली।

नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र और आर्थिक सर्वेक्षण को लेकर विपक्षी दलों के नेताओं ने सरकार से आम जनता के हितों पर ध्यान देने की मांग की है।

समाजवादी पार्टी और बीजू जनता दल के सांसदों ने कहा कि बजट और सर्वे केवल आंकड़ों तक सीमित न रहें, बल्कि जमीन पर लोगों को मिलने वाले लाभों की सच्ची तस्वीर सामने आए।

समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद डिंपल यादव ने कहा कि बजट में इस बात को प्रमुखता से दिखाया जाना चाहिए कि आम लोगों को कौन-कौन सी सुविधाएं मिल रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह सराहनीय है कि देश की एक महिला वित्त मंत्री बजट पेश कर रही हैं, लेकिन इससे ज्यादा जरूरी यह है कि जनता को वास्तविक लाभ क्या मिल रहा है। डिंपल ने सवाल उठाया कि पिछले बजटों में किए गए वादे कितने पूरे हुए हैं और उन योजनाओं का असर लोगों की जिंदगी में कितना दिख रहा है।

समाजवादी पार्टी के ही सांसद जियाउर रहमान बर्क ने भी इसी तरह की बात दोहराई। उन्होंने कहा कि महिला वित्त मंत्री द्वारा बजट पेश किया जाना खुशी की बात है, लेकिन असली मुद्दा बजट की सामग्री है।

नई दिल्ली: संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण (इकोनॉमिक सर्वे) में देश की तरक्की की संभावनाओं को लेकर सावधानी भरी उम्मीद जताई गई है। अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2027 में देश की रियल जीडीपी ग्रोथ 6.8 से 7.2 प्रतिशत रह सकती है। फिर भी, आर्थिक सर्वे को ध्यान से देखने पर पता चलता है कि इसकी मुख्य चिंता घरेलू अर्थव्यवस्था की स्थिति नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक हालात में बढ़ती अनिश्चितताएं हैं, जो भारत पर लगातार असर डाल रही हैं।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में जो आर्थिक सर्वे पेश किया, उसमें बार-बार बाहरी जोखिमों, वैश्विक कारोबार की अड़चनों, और वित्तीय अस्थिरता पर ज़ोर देते हुए भारत की आर्थिक दिशा को ज़्यादातर अंतरराष्ट्रीय घटनाओं के नज़रिए से देखा गया।

सर्वे में कहा गया, "वैश्विक अनिश्चितता के बीच संभावना स्थिर वृद्धि वाली है, जिसके लिए निराशावादी होने के बजाए सावधानी बरतने की ज़रूरत है।" यही बात सर्वे के मुख्य भाव को बताती है। हालांकि सर्वे में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2027 एडजस्टमेंट यानी चीज़ों को दुरुस्त करने का साल होगा

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