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नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि अगर पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष लंबा चलता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतों के चलते भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं।

आरबीआई की मौद्रिक नीति की मासिक बैठक 5 जून को होगी

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी भारत की महंगाई नियंत्रण नीति के लिए चुनौती बन रही है, जिसके चलते भारतीय रिजर्व बैंक को नीतिगत कदम उठाने पड़ सकते हैं। आरबीआई की अगली मौद्रिक नीति बैठक 5 जून को होने वाली है, जिसमें ब्याज दरों पर फैसला लिया जाएगा। फिलहाल आर्थिक विकास को समर्थन देने के लिए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। गवर्नर ने संकेत दिया कि अगर पश्चिम एशिया संकट जारी रहता है, तो खुदरा ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी 'सिर्फ समय की बात' हो सकती है। इससे परिवहन लागत और महंगाई दोनों बढ़ने की आशंका है।

नई दिल्ली: देशभर में एलपीजी गैस की कीमतों को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। 1 मई 2026 से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर (19 किलो) के दाम में 993 रुपये की भारी बढ़ोतरी कर दी गई है। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 3000 रुपये के पार पहुंच गई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि घरेलू रसोई गैस (14.2 किलो) के दाम में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकारी तेल कंपनियों द्वारा जारी नए रेट के मुताबिक, दिल्ली में 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत अब 3071.50 रुपये हो गई है, जो 1 अप्रैल को 2078.50 रुपये थी। एक महीने में ही 993 रुपये की सीधी बढ़ोतरी हुई है। यह बढ़ोतरी पश्चिम बंगाल और असम समेत कई राज्यों के चुनाव खत्म होने के तुरंत बाद लागू की गई है।

होटल-रेस्टोरेंट और स्ट्रीट फूड पर असर

कमर्शियल सिलेंडर महंगा होने का सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट और स्ट्रीट फूड कारोबार पर पड़ेगा। गैस की लागत बढ़ने से खाने-पीने की चीजों की कीमतों में भी इजाफा होने की संभावना है।  बाहर खाना महंगा हो सकता है।

अबू धाबी: संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने मंगलवार को बड़ा एलान करते हुए तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक और इसके व्यापक समूह 'ओपेक प्लस' को छोड़ने का ऐलान कर दिया। यह फैसला एक मई से प्रभावी होगा। यह निर्णय ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा संकट और क्षेत्रीय मतभेदों के बीच लिया गया है। यूएई का यह कदम पिछले काफी समय से चर्चा में था, क्योंकि यूएई उत्पादन प्रतिबंधों के कारण असहज महसूस कर रहा था और पड़ोसी देश सऊदी अरब के साथ उसके संबंधों में भी खटास आ रही थी।

यूएई ने यह घोषणा अपनी सरकारी समाचार एजेंसी 'वाम' (डब्ल्यूएएम) के माध्यम से की। इसमें कहा गया, ''यह निर्णय यूएई के दीर्घकालिक रणनीतिक और आर्थिक नजरिये तथा बदलते ऊर्जा परिदृश्य को दर्शाता है, जिसमें घरेलू ऊर्जा उत्पादन में तेज निवेश शामिल है। यह वैश्विक ऊर्जा बाजारों में एक जिम्मेदार, विश्वसनीय और भविष्योन्मुखी भूमिका के लिए इसकी प्रतिबद्धता को भी पुष्ट करता है।''

नई दिल्ली: थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित महंगाई दर मार्च में बढ़कर 3.88 प्रतिशत हो गई है, जो कि फरवरी में 2.13 प्रतिशत थी। यह जानकारी वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा बुधवार को दी गई। मार्च में थोक महंगाई दर में वृद्धि मुख्य रूप से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस, गैर-खाद्य वस्तुओं, बुनियादी धातुओं के विनिर्माण और खाद्य पदार्थों आदि की कीमतों में उछाल के कारण हुई है।

आंकड़ों के मुताबिक, ईंधन और ऊर्जा की कीमतों में मार्च में फरवरी के मुकाबले 4.13 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। खनिज तेल की कीमतों में मार्च में पिछले महीने के मुकाबले 8.77 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। बिजली की कीमत में मार्च में 5.07 प्रतिशत की कमी देखने को मिली।

मंत्रालय ने बताया कि 22 विनिर्माण समूह में से 16 की कीमतों में मार्च में बढ़ोतरी देखी गई है। वहीं, छह में गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, थोक खाद्य महंगाई दर मार्च में 1.85 प्रतिशत पर रही है। यह फरवरी में भी इस स्तर पर थी।

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