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अयोध्या: अयोध्या के राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के न्यासी मंडल की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक जुटी, जिसमें राम मंदिर के भविष्य के प्रबंधन और व्यवस्थाओं को लेकर कई बड़े फैसलों पर मुहर लगी।

बैठक में बताया गया कि मुख्य कार्यकारी अधिकारी के चयन के लिए गठित समिति को बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं। समिति ने चयन प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक माह का अतिरिक्त समय मांगा, जिसे न्यासी मंडल ने स्वीकार कर लिया। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए इस अवधि में प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हों, इसके लिए एक सचिव नियुक्त करने की भी मंजूरी दी गई।

न्यास ने बताया कि चढ़ावा राशि की गणना में कथित अनियमितताओं की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) की अंतिम रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है। इसी कारण इस विषय पर विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी। बैठक में इस मामले से संबंधित उच्चतम न्यायालय में लंबित याचिकाओं और न्यायालय के आदेशों का भी संज्ञान लिया गया।

नई दिल्ली: अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं से मिले दान में कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मामले में अदालत ने साफ संकेत दिया है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और पेशेवर तरीके से होनी चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से विशेष जांच टीम (एसआईटी) के पुनर्गठन पर आवश्यक निर्देश लेने को कहा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए और जांच अपने तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचनी चाहिए।

'अनुभवी अधिकारी के नेतृत्व में हो जांच': सुप्रीम कोर्ट

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ अयोध्या राम मंदिर में मिले दान के कथित गबन की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। अदालत ने इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी से जांच की स्थिति रिपोर्ट मांगी थी। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि आदेश के अनुपालन में स्थिति रिपोर्ट दाखिल कर दी गई है।

लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय पर प्रस्तावित कार्रवाई को लेकर बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक प्रतिशोध के तहत विश्वविद्यालय को निशाना बना रही है और यह कार्रवाई हजारों छात्रों के भविष्य तथा शिक्षा व्यवस्था पर सीधा प्रहार है। उन्होंने छात्रों और अभिभावकों को भरोसा दिलाया कि समाजवादी पार्टी इस लड़ाई में उनके साथ खड़ी है।

अखिलेश यादव ने रविवार को जारी बयान में कहा कि जौहर विश्वविद्यालय को बचाने के लिए चल रही मुहिम में समाजवादी पार्टी पूरी मजबूती के साथ छात्रों और उनके अभिभावकों के साथ है। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार बदले की राजनीति के तहत विश्वविद्यालय को अपनी संकीर्ण सोच का शिकार बनाने का प्रयास कर रही है। अखिलेश यादव ने कहा कि इस फैसले के खिलाफ पार्टी का प्रत्येक कार्यकर्ता, समर्थक और नेता छात्रों के साथ खड़ा है।

लखनऊ: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बीजेपी पर शिक्षा को 'सांप्रदायिक' नजरिये से देखने का बृहस्पतिवार को आरोप लगाया। उन्होंने मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय परिसर में कई इमारतों को ध्वस्त करने के प्रशासन के फैसले पर सवाल उठाते हुए उसे 'निंदनीय' करार दिया।

बीजेपी को शिक्षा में भी सांप्रदायिकता नजर आती है:अखिलेश

अखिलेश यादव ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “बीजेपी को शिक्षा में भी सांप्रदायिकता नजर आती है। शिक्षा, शिक्षक, शिक्षार्थी और शिक्षा के बाद मिलने वाली नौकरी बीजेपी के एजेंडे में है ही नहीं।” उन्होंने लिखा, “बीजेपी अपने अपंजीकृत संगी-साथियों के अवैध भवनों को कब ढहाएगी? जब संगी-साथी ही अपंजीकृत हैं, तो उनके भवनों, कार्यालयों और संस्थानों को कैसे वैध माना जा सकता है। निंदनीय!” अखिलेश यादव की यह टिप्पणी जेल में बंद सपा नेता आजम खान की ओर से स्थापित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय परिसर की 38 इमारतों को ध्वस्त करने के रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) के आदेश के एक दिन बाद आई है।

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