ताज़ा खबरें
एसआईआर के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन आजादी की दूसरी लड़ाई: खड़गे
जेडीयू से बाहर निकाले जाने पर अनंत सिंह बोले- बनाऊंगा अपनी पार्टी
रामलीला मैदान की रैली से पहले राहुल बोले- बीजेपी का दिल से धन्यवाद

रामपुर: यूपी के पूर्व कैबिनेट मंत्री और समाजवादी पार्टी के सीनियर नेता आजम खान के जौहर विश्वविद्यालय पर बुलडोजर चलने वाला है। रामपुर विकास प्राधिकरण ने ध्वस्तीकरण का आदेश दिया है। रामपुर में आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी में बने 38 भवनों को अवैध निर्माण की श्रेणी में माना गया और ध्वस्तीकरण के आदेश दिए गए हैं।

8 जुलाई को विश्वविद्यालय प्रबंधन ने दाखिल किया था जवाब

रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि जिले में अवैध निर्माण के खिलाफ लगातार एक्शन लिया जा रहा है। इसी के तहत मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण की जांच क्षेत्रीय अवर अभियंता की रिपोर्ट के आधार पर शुरू की गई। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए गए। विश्वविद्यालय प्रशासन ने 8 जुलाई को अपना जवाब दाखिल किया, जबकि 15 जुलाई को व्यक्तिगत सुनवाई भी हुई, जिसमें विश्वविद्यालय और विकास प्राधिकरण दोनों पक्षों के अधिकारी और अधिवक्ता उपस्थित रहे।

लखनऊ: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण के खुलासे के बाद गठित एसआईटी आज अंतिम जांच रिपोर्ट सरकार को सौंप सकती है। खबरों के अनुसार, लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत के नेतृत्व में गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच दल ने अपनी रिपोर्ट लगभग तैयार कर ली है। सूत्रों के अनुसार, अंतिम रिपोर्ट में चढ़ावा चोरी के मामले में कुछ और लोगों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।

कुछ और लोगों की भूमिका सामने आने की चर्चा

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले का खुलासा होने के बाद चौतरफा सवाल खड़े होने पर राज्य सरकार ने 13 जून को मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था और 15 जून से जांच शुरू हुई थी। सरकार ने एसआईटी को 15 जुलाई तक अंतिम रिपोर्ट सौंपने का समय दिया था। लिहाजा अंतिम रिपोर्ट सौंपने का आज आखिरी दिन है।

एसआईटी की 23 जून को सौंपी गई प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में 40 दिनों के दौरान 70 बार चढ़ावा चोरी, दान राशि की गणना में अनियमितता और गणना तथा बैंक कर्मियों की मिलीभगत की बात सामने आई थी।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के लखनऊ, मथुरा, सीतापुर और बाराबंकी सहित कई स्थानों पर मंगलवार को समाजवादी पार्टी (एसपी) के संस्थापक मुलायम सिंह यादव और पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधने वाले विवादास्पद पोस्टर दिखाई देने पर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। एसपी ने बीजेपी और सहयोगियों पर सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काने का आरोप लगाया है।

पोस्टरों में मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव को मुस्लिम समुदाय से जुड़ी टोपी पहने हुए दिखाया गया है और नारा लिखा गया है, ‘दिल में बाबर, मुंह में राम’। पोस्टर लगाने वालों की पहचान का पता नहीं चल सका है। यह घटनाक्रम अयोध्या में राम मंदिर दान निधि के कथित गबन को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच आया है। विपक्ष ने हाल के हफ्तों में बार-बार यह मुद्दा उठाया है। राजनीतिकविश्लेषण सेवा

सीतापुर में एसपी कार्यकर्ताओं ने इन पोस्टरों को हटा दिया है। एसपी सांसद आनंद भदौरिया ने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर एक होर्डिंग हटा दी और इस घटना को ‘कायरतापूर्ण कृत्य’ करार दिया।

अयोध्या: फैजाबाद बार एसोसिएशन के वकीलों ने सोमवार को कहा कि वे राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट के पूर्व सदस्यों अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए अदालत का रुख करेंगे। बार एसोसिएशन के वकीलों का दावा है कि उन्होंने दो जुलाई को राम जन्मभूमि थाने में शिकायत दी थी, लेकिन पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं की।

पुलिस के रवैये से नाराजगी

फैजाबाद बार एसोसिएशन के सदस्य आफताब खान ने कहा, ‘‘हमने राय, मिश्रा और राव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए पुलिस को दो सप्ताह का समय दिया था। सोमवार को फैजाबाद बार एसोसिएशन का एक प्रतिनिधिमंडल प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग को लेकर थाने गया था। वहां अधिकारियों ने हमें बताया कि प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है और शिकायत को उच्च अधिकारियों को भेज दिया गया है।’’

  • देश
  • प्रदेश
  • आलेख