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नई दिल्ली: दिल्ली मेट्रो ट्रेनों के और अधिक फेरे बढ़ाने से हाथ खड़े कर दिए हैं। दिल्ली मेट्रो के मुताबिक अब और फेरे बढ़ाना संभव नहीं है, क्योंकि इसमें बहुत अधिक लागत आएगी। दिल्ली मेट्रो ने अपना यह पक्ष सुप्रीम कोर्ट में रखा रहा है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) के मुताबिक हर स्टेशन पर दो से तीन मिनट में एक ट्रेन की फ्रीक्वेंसी है। इससे ज्यादा फ्रीक्वेंसी नहीं की जा सकती क्योंकि इससे पूरे सिस्टम पर फर्क पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सुनवाई में मेट्रो से पूछा था कि क्या और जल्दी फेरे लगाए जा सकते हैं। मेट्रो में अभी औसतन 24-26 लाख लोग प्रतिदिन यात्रा करते हैं। दिल्ली मेट्रो ने सर्वोच्च अदालय को बताया है कि लोगों को परेशानी न हो इसलिए मेट्रो में डिब्बों की संख्या बढ़ाई जाएगी।

4 कोच वाली ट्रेनें छह और छह कोच वाली ट्रेंने आठ कोच की जाएंगी। डीएमआरसी ने सम-विषम फॉर्मूले के दौरान मेट्रो सेवा का संचालन फुल फ्रीक्वेंसी पर किया था। मेट्रो ने ऑड-इवन के हटने के बाद सिर्फ तीन ट्रेनों की कटौती की है। ...

मेट्रो में 2017 तक 45 लाख से अधिक यात्री करेंगे सफर 

दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन अपनी सेवाओं का और विस्तार करेगी और 2017 तक 45 लाख से अधिक यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाएगी। मेट्रो ने सम-विषय (ऑड-इवन) योजना के दौरान रोजाना करीब 31 लाख यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया था। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की ओर से सॉलिसीटर जनरल रंजीत कुमार ने प्रधान न्यायाधीश टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि मेट्रो में इस समय 1282 कोच हैं। इसमें 420 कोच और जोड़े जाएंगे, जिससे इसकी क्षमता बढ़ेगी। इसके अलावा तीसरे चरण में 2016-17 के दौरान 110 किलोमीटर की अतिरिक्त मेट्रो लाइन जुड़ेगी। नई लाइन शुरू होने पर इसमें 486 कोच और जुड़ेंगे।इससे स्थिति में और अधिक सुधार होगा। इस समय मेट्रो रोजाना 31 लाख यात्रियों को ढोती है और दिसंबर 2017 तक यह संख्या बढ़कर 45 लाख तक पहुंच जाएगी। मेट्रो रेल ने व्यस्त घंटों के दौरान फिलहाल अपनी गाड़ियों के फेरे बढ़ाने में असमर्थता व्यक्त की और कहा कि इसके लिए बहुत अधिक निवेश की आवश्यकता होगी। सॉलिसीटर जनरल ने कहा कि इस समय व्यस्त घंटों में दो ट्रेनों के बीच तीन मिनट का अंतराल है और इसे और कम करना व्यावहारिक नहीं है। इसमें कोच की संख्या बढ़ाई जा सकती है, जो डीएमआरसी लगातार कर रही है।

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