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गुवाहाटी: असम में इस साल विधानसभा चुनाव कराए जाने हैं। चुनाव की औपचारिक घोषणा से चंद हफ्ते पहले राज्य को आज विकास परियोजनाओं की सौगात मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम दौरे पर आज राज्यवासियों को संबोधित भी किया। उन्होंने गुवाहाटी में आयोजित जनसभा में जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले का भी जिक्र किया। बढ़ती सियासी सरगर्मियों के बीच चुनावी बिगुल फूंकते हुए पीएम मोदी ने एक तरफ जहां भाजपा के कार्यकाल में हुए फैसलों और विकास परियोजनाओं का उल्लेख किया तो दूसरी तरफ विपक्षी राजनीतिक पार्टी- कांग्रेस को भी आड़े हाथ लिया।

पीएम मोदी ने कांग्रेस पार्टी पर आतंकियों को कंधे पर बिठाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस नेता घुसपैठियों को बचाने में लगे हैं। उन्होंने भाजपा के पक्ष में जनादेश का भरोसा जताते हुए कहा कि आने वाले चुनावों में जनता भारी बहुमत से भाजपा की सरकार चुनेगी। कांग्रेस पर तुष्टिकरण के आरोप लगाते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पूर्वोत्तर को नजरअंदाज कर कांग्रेस पार्टी ने हमेशा फंड आवंटित करने से परहेज किया।

नई दिल्ली: एक समूह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और अन्य संवैधानिक पदाधिकारियों द्वारा दिए जा रहे भाषणों को संविधान के अनुरूप नहीं और अपमानजनक बताया गया है। याचिकाकर्ताओं ने इस मामले में अनुच्छेद 32 के तहत कोर्ट से दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है।

सीएम सरमा के अलावा 2 मुख्यमंत्रियों का भी नाम

याचिका में उल्लेख किया गया है कि सीएम सरमा ने हाल ही में 'मिया मुसलमान' समुदाय के खिलाफ टिप्पणियां कीं। इसके अलावा, उन्होंने कुछ समुदाय के नागरिकों को सब्जियों की कीमत बढ़ाने, लव जिहाद और फ्लड जिहाद जैसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार ठहराया और यहां तक कहा कि चुनावी मतदाता सूची से 4-5 लाख लोगों को हटाना चाहते हैं।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि केवल असम ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों के उच्च पदाधिकारियों द्वारा दिए गए भाषण भी संवैधानिक नैतिकता के खिलाफ हैं।

नई दिल्ली: जमीयत उलेमा-ए-हिंद (एमएम) ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की हालिया टिप्पणियों को सांप्रदायिक, बेहद विभाजनकारी और संविधान की भावना के विरुद्ध बताते हुए उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।

संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के लिए निर्देशों की मांग

संगठन के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने वरिष्ठ अधिवक्ता एम. आर. शमशाद के माध्यम से दायर याचिका में अदालत से संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के लिए कड़े और प्रवर्तन योग्य दिशा-निर्देश तैयार करने का अनुरोध किया ताकि नफरत फैलाने या किसी समुदाय को निशाना बनाने के लिए सार्वजनिक पदों का दुरुपयोग न हो।

याचिका में असम के मुख्यमंत्री के 27 जनवरी, 2026 को दिए गए उस भाषण का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है, जिसमें उन्होंने यह दावा किया कि “चार से पांच लाख ‘मियां’ वोटर्स को मतदाता सूची से बाहर कर दिया जाएगा” और यह भी कहा कि वह और उनकी पार्टी “सीधे मियां लोगों के खिलाफ” हैं। याचिका के अनुसार, ‘मियां’ शब्द असम में मुसलमानों के लिए अपमानजनक और बेइज्जती करने वाले तरीके से प्रयोग किया जाता है।

गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक बार फिर मुसलमानों के खिलाफ बयान दिए हैं। उन्होंने कहा है कि, “यह छिपाने की बात नहीं है....हम मियां के खिलाफ हैं....हां, हम उनके वोट चुरा रहे हैं....हां यह हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है कि हम फॉर्म 7 भरकर उनके नाम मतदाता सूची से कटवाने के लिए चुनाव आयोग को दें...मैंने खुले तौर पर बीजेपी कार्यकर्ताओं से कहा है कि वे ऐसा काम करें, हम उन्हें वोट के अधिकार से वंचित करना चाहते हैं...वे जाएं और बांग्लादेश में वोट डालें....।” ये कुछ ऐसे बयान हैं जो हिमंत लगातार दे रहे हैं।

हालांकि बुधवार 28 जनवरी को उन्होंने इसमें एक बात और जोड़ी कि वे मुसलमानों के खिलाफ नहीं बल्कि बांग्लादेशियों के खिलाफ हैं। बीते कई दिनों से असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा कोई भी मौका नहीं छोड़ रहे हैं जब वे ऐसे बयान नहीं दे रहे हैं। उन्होंने तो यहां तक लोगों का आह्वान किया कि ‘मियां’ लोगों को परेशान करने के लिए क्या-क्या किया जाए। उन्होंने कहा कि अगर मिंयां रिक्शावाला है और उसका किराया पांच रुपया होता है तो सिर्फ 4 रुपया ही दें।

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