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देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में आए भूचाल के बीच परिस्थितियां लगातार बदल रही हैं। कांग्रेस के नौ बागी विधायकों को विधानसभा अध्यक्ष ने सदस्यता के लिए अयोग्य घोषित कर दिया है। अब ये विधायक 28 मार्च को विश्वासमत के लिए होने वाली वोटिंग में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। सूत्रों के अनुसार विधानसभा अध्यक्ष ने देर रात विधानसभा पहुंचकर यह फैसला लिया। इसके बाद इन विधायकों के आवासों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। शनिवार शाम को विधानसभा अध्यक्ष ने इन विधायकों पर लगे दल बदल कानून के उल्लंघन के आरोपों पर सुनवाई पूरी की थी। इस फैसले से उत्तराखंड की हरीश रावत सरकार को राहत मिली है। 18 मार्च को विधानसभा में बजट सत्र के दौरान घटनाक्रम के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस के नौ विधायकों को दल बदल कानून के तहत नोटिस जारी किए थे। इन विधायकों को नोटिस का जवाब देने के लिए शनिवार शाम तक का समय दिया था। विधानसभा में सुनवाई के अंतिम दिन अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल सुबह दस बजे ही पहुंच गए थे। विधानसभा आते ही उन्होंने अफसरों के साथ मंत्रणा शुरू कर दी, तो मीडिया से शाम तक दूरी बना कर रखी।

सवा 12 बजे पूर्व सीएम विजय बहुगुणा के ओएसडी दीप डिमरी वकीलों के साथ पहुंचे और साक्ष्य दिखाने को आवेदन किया, लेकिन अथॉरिटी लेटर न होने के कारण साक्ष्य नहीं दिखाए गए। डेढ़ बजे संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा हृदयेश स्पीकर से मिलने पहुंची। वो दो बजकर 50 मिनट पर कुछ समय के लिए बाहर आईं, लेकिन फिर भीतर कक्ष में चली गईं। सवा तीन बजे बागी विधायकों के वकील दिनेश द्विवेदी, चेतन शर्मा, संजीव सेन व अमित सिंह चड्डा पक्ष रखने और साक्ष्य देखने पहुंचे। सवा घंटे बाद एमएलए सुबोध उनियाल अपने भाई पूर्व महाधिवक्ता यूके उनियाल के साथ साढ़े चार बजे अपना पक्ष रखने पहुंचे। सवा छह बजे तक सुनवाई चली। सुनवाई के बाद स्पीकर ने कहा कि जिन विधायकों को नोटिस जारी किए गए, उनकी ओर से एमएलए सुबोध उनियाल ने अपने वकीलों के साथ पक्ष रखा। कुछ साक्ष्य और मांगे गए हैं, जो रविवार सुबह नौ बजे तक उपलब्ध करा दिए जाएंगे, लेकिन अब सुनवाई पूरी हो चुकी है। अब किसी से कोई बात नहीं होगी। जो जवाब दिए गए हैं, उनका परीक्षण कर ही कोई फैसला होगा। ढाई घंटे चले सुनवाई के बाद स्पीकर ने साफ किया कि सुनवाई पूरी हो गई है। शनिवार देर रात विधानसभा अध्यक्ष ने विधानसभा पहुंचकर नौ बागी विधायकों की सदस्यता को रद्द कर दिया।

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