नई दिल्ली: उत्तराखंड के टेरी की एक और महिला कर्मचारी द्वारा यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए जाने के बाद टेरी के कार्यकारी उपाध्यक्ष आरके पचौरी का संकट और बढ़ गया है। इस बार पचौरी लंबी छुट्टी पर चले गए हैं। वे 7 मार्च को होने वाले यूनिवर्सिटी के कन्वोकेशन में भी शामिल नही होंगे। यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला ने कार्यकारी उपाध्यक्ष के पद पर पचौरी की नियुक्ति रद्द किए जाने की भी मांग की है।मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक टेरी के छात्र भी उनके (पचौरी) के खिलाफ खड़े हो गए हैं। छात्रों का कहना है कि वे पचौरी के हाथों अपनी डिग्री नहीं लेंगे। उल्लेखनीय है कि कुछ साल पहले जिस महिला ने आरके पचौरी पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे, उसने भी टेरी में उच्च पद पर पचौरी की नियुक्ति की आलोचना की है। यौन उत्पीड़न के आरोप का पहला मामला अभी भी अदालत में है। 'द एनर्जी एंड रिसोर्सिस इंस्टिट्यूट', (टेरी) के कार्यकारी उपाध्यक्ष पचौरी पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला का कहना है कि उन्होंने 10 साल पहले कथित तौर पर आपत्तिजनक इशारे किए थे।
महिला का आरोप है कि ‘पचौरी उसे कार्यालय कक्ष में काम के बहाने बार-बार बुलाते थे, जबकि वहां ऐसा कोई काम नहीं होता था, जिसमें मुझसे चर्चा की जरूरत हो। उन्होंने मुझे बहुत असहज कर दिया था। मैंने कुछ बैठकों को टालने या अपने सहकर्मियों से बैठक के लिए जाने को कहा था, जिससे वे नाराज हो जाते थे।' महिला की वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा कि उसने पिछले साल फरवरी में पहली बार पुलिस में पचौरी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इस पर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। आरोप लगाने वाली महिला साल 2003 में टेरी में शामिल हुई थी और उस वक्त पचौरी निदेशक थे। इस मामले में पचौरी के वकील आशीष दीक्षित ने कहा कि उन्होंने दूसरी शिकायत को नहीं देखा है इसलिए वह इस पर टिप्पणी नहीं कर सकते। हालांकि पहले से चल रहे केस का जवाब दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल करते हुए पचौरी ने आरोपों को नकार दिया है। उनके अनुसार शिकायतकर्ताओं ने मामले को सनसनीखेज बनाने की कोशिश की है।